00:00यह दुनिया है बाजार और इसमें जितने है दुकांदार सब को इतना भरोसा कैसा है कि आपको ठग लेंगे
00:06अब वो आपको यह कब दिखाएगा इस पर क्या लिखाओगा
00:10वो आपको यह तॉलिया दिखाएगा इस पर क्या लिखाओगा
00:13इस गदहे पर भी क्या लिखा होगा
00:17और ये बड़ी पुरानी तरकीव है
00:21सोज़वे
00:23इसको कैसे भरोसा है कि कुछ भी माल हो उस पर लिख दो
00:29सही
00:31वह आप बिलकुल लट्टू हो जाएंगे और जेब जाड़ देंगे
00:35कैसे पता है
00:37दुकानदार को पता है कि आप आज जिसको गलत बोलकर आ रहे हो
00:42उसी को आपने ही कभी सही बोला था
00:47दुकानदार को पता है कि आपकी पुरानी अदा रही है गलत को सही मान लेने की
00:56दुकानदार को ये भी पता है
00:58कि अभी आप जिस माल को गलत बोलकर आ रहे हो
01:04उस माल को सही दिखा कर उसी ने आपको बेचा था चार साल पहले
01:10दुकांदर जानता है आप वही हो
01:14आपका आज गलत में फसना ही बताता है
01:18कि आपको सही की पहचान तो है नहीं नहीं
01:21तो गलत में फसे के होते हैं
01:22बाजार में निकले हो क्या ढूंडने
01:24सही
01:26सही की तलाश का अर्थ ही है कि अभी कहां फसे हुए हो
01:30माने आप कौन हो
01:32वो जो गलत में फस जाता है
01:35जो गलत में फस जाता है वो बाजार में क्या ढूंडने निकला है
01:38तो फिर से क्या करेगा
01:40और ये बात दुकांदार
01:46दुबारा आप अब क्या खरीदोगे
01:49गलत
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