00:00यदि मंदिर से वापस लोट रहे हो तो देव मूर्ति को पीठ नहीं दिखानी है
00:07अगर आप तात्विक दृष्टे से देखोगे तो आपका पीठ हो कि पीठ हो
00:14वो एक बराबर ही है भाई माँ समझ जाए उसमें क्या हो जाएगा
00:19लेकिन मनोवैज्ञानिक दृष्टे से अंतर है
00:22तो कि आखें हम कहना चाहते हैं कि अहंकार सत्यमुखी रहे
00:29आखें उसको देखती रहें उसको हम पीठ न दिखा दें
00:32तो इसलिए विवस्था बनाई गई कि भाई बाहर निकलते हो पीठ मत दिखा दें
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