00:00घटते जाओ जैसे गैस का गुपारा उसमें इतना फालतू वजन चर्बी कि गुपारे की बात हो रही है देह की
00:10नहीं बात हो रही है अहंकार की बात हो रही है उसको घटाते जाओ वो उपर उठता जाएगा गुरुत्वा करशन
00:16माने प्रकृति फिर उस पर काम कम करेगा इस
00:20कारत ही नहीं है कि वो बिल्कुल निकल के पता नहीं कहां जाएगा जहां तक जाना होगा तुम्हारे लिए तो
00:38जब तक जी रहे हो यात्रा ही है बस अंत के बाद तो तुम ही नहीं तो फिर कौन बचता
00:44है परवा करने वाला
00:46जब तक तुम हो तब तक यात्रा है तो बस यात्रा से मतलब रखो तुम यात्रा ही हो बस एक
00:51उठने की यात्रा रहे गिरने की घिसटने की बंधने की लोटने की यात्रा नहीं उठने की यात्रा कुछ आरी बात
01:05समझो
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