00:00सच कोई चाय का प्याला तो है नहीं कि उसको उठा की कहोगे कि सम्मान दिया सर पर रख लिया
00:05सच को सम्मान देने का मतलब तो जूट को लात मार नहीं होता है
00:08जूट को तुम लात मारी नहीं पा रहे
00:10अब जूट कोई प्रिंसिपल कोई सिधान्त मातर नहीं है
00:14हमारी जिंदगी में तो जूट इंसानों के रूप में मौजूद है, हमारी सेलिब्रिटीज, रोल मौडल्स के रूप में मौजूद है।
00:20जूट को तुम लात्मारी नहीं पा रहे, तो फिर सच को सम्मान देने का मतलब क्या हुआ।
00:27सच कोई वस्तु तो है नहीं कि उसको लेकर के सम्मान दे लोगे, सच को तो सम्मान भी बस नकार
00:32में दिया जा सकता है, कि जो जूटे थे पर आज तक सर पे चड़े हुए थे, उनको सर से
00:38उतार दिया, यही है सच को सम्मान देना, वो उतर ही नहीं रहे।
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