00:00पिता ने वृद्धा आश्रम में तोड़ा दम
00:03बेटियों को अंतिम संसकार में शामिल होने के लिए नहीं मिला टाइम
00:07रिश्टों को जगजोड देगी ये दर्दनाक कहानी
00:12हर माता पिता का सपना होता है कि उनके बच्चे जीवन में आगे बढ़ें
00:16सफल हो और उनका नाम रोशन करें
00:18लेकिन हर सफलता के पीछे एक सवाल भी छिपा होता है
00:22क्या उस सफलता की गीमत रिश्टों से चुकानी पड़ती है
00:26अगर यकीन ना आए तो हर्याणा के सोनीपत से सामने आई इन तस्वीरों को देख लीजिए
00:31आपके सभी सवालों का जवाब मिल जाएगा
00:33ये कहानी है एक ऐसे कपड़ा व्यापारी की
00:36जिसने पूरी जिन्दगी मेहनत कर अपने परिवार को बहतर भविश्य दिया
00:56नहीं आई जानकारी के मुताबिक व्यापारी पिछले कुछ समय से सोनीपत के एक व्रिधा आश्रम में रह रहे थे
01:02उम्र बढ़ने के साथ उनकी तबियत भी लगातार खराब होती जा रही थी
01:07व्रिधा आश्रम के कर्मचारियों ने उनकी पूरी देख भाल की
01:10लेकिन एक दिन उनकी हालत अचानक बिगड रही और इलाज के दोरान उनका निधन हो गया
01:16शिवचरण गुपता की बड़ी बेटी अनीता नेपाल में अध्यापिका है
01:20दूसरी बेटी निशा उत्तरपदेश के आजमगण में लहती है
01:23जबकि सबसे छोटी बेटी प्रिया मुंबई में रहती है
01:27व्रिधा आश्रम प्रबंधन के अनुसार तीनों बेटियां अंतिम संसकार में शामिल नहीं पहुँची
01:32उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से अंतिम संसकार की प्रक्रिया देखी
01:36बड़ी बेटी अनीता ने ओनलाइन एक्क्यावन सो रुपे भेचते हुए पिता का अंतिम संसकार विधी विधान से करने के लिए
01:43कहा
01:44इसके बाद व्रिधा आश्रम के लोगों और स्थानिय समाज सेवियों ने मिलकर व्यापारी का अंतिम संसकार कराया
01:50जिन कंधों पर परिवार का साथ होना चाहिए था वहाँ समाज के लोगों ने इंसानियत का फर्ज निभाया
01:57ये द्रिश्य वहाँ मौजूद हर व्यक्ती की आँखे नम कर गया
02:01ये घटना सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है बलकि बदलते सामाजिक धाचे का भी आईना है
02:07आज लाखों बच्चे, पढ़ाई, नौकरी और बहतर भविश्य की तलाश में देश-विदेश चले जाते हैं
02:13लेकिन कई बार माता-पिता अकेले रह जाते हैं
02:16कुछ लोग विद्धा आश्रम को मजबूरी मानते हैं तो कुछ इसे समय की मांग बताते हैं
02:21लेकिन सवाल यही है कि क्या आर्थिक सभलता रिष्टों की गर्माहट की जगहा ले सकती है
02:27फिलहाल के लिए बस इतना ही बाकी अपडेट के लिए बने रहे वन इंडिया के साथ
02:58Download the OneIndia app now
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