00:00अगर हिंद महासागर को 21 सदी का सबसे बड़ा रणितिक युद्ध छेत्र कहा जाए तो उसमें चीन का हर नया
00:06कदम भारत के लिए सिर्फ एक आर्थिक परियोजना नहीं बलकि राष्ट्रे सुरक्षा, समुद्री प्रभुत्व और छेत्रिय शक्ती संतुलन का जुड़ा
00:15व
00:29पहली नजर में ये एक व्यापारिक और इंफ्रस्ट्रक्चरल परियोजना लग सकती है लेकिन इसके पीछे चिपी रणितिक तस्वीर कहीं ज्यादा
00:37बड़ी है भारत में सुरक्षा विशशग्या इसे चीन की लंबे समय से चली आ रहे ही स्ट्रिंग ओफ पॉल्स रणित
00:43का अगला चरण मार रहे हैं लेकिन सवाल सर्फ एक नए कॉरिडॉर का नहीं है सवाल ये है कि क्या
00:49चीन धीरे-धीरे भारत को चारों तरफ से रणिति ग्रूप से घेरने की कोशिश कर रहा है क्या ये परियोजना
00:55कीवल व्यापार के लिए है या भविश्य में इसका सैन मह
00:58भी हो सकता है आखिर क्यों भारत इस प्रिस्तावित कॉरिडॉर को लेकर सतर्क है इस कहारी में हम सब्झेंगे कि
01:05चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशियेटिव भी आराई क्या है स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की राजनीती और रणीती कैसे काम करती
01:12है स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स
01:27में जारी संधर्ष इस परियोजना को कैसे प्रभावित कर सकता है भारत की कलादान मल्टी मॉडल परियोजना और चीन की
01:34नई योजना में क्या मुकाबला है
01:37CPEC से इसकी तुलना क्यों की जा रही है और आखिर सुपूरे घटना क्रम का भारत की सुरक्षा हिंद महसागर
01:45बंगाल की खाड़ी और भविश्य की एशियाई भूराजुनीती पर क्या असर पड़ सकता है
01:50टॉपिक बहुत सारे हैं लेकिन देश के लिए हर एक टॉपिक बहद ही important है और खास करके जो देश
01:58से बाहर भारतिया रहते हैं
01:59जो चीन में रहते हैं, जो बंगलादेश के आसपास हैं, जो बंगाल या फिर बॉर्डरिंग स्टेट्स में भी रहते हैं,
02:06या फिर दूसरे देशों में भी रहते हैं, उनका भी जानना बेहत जरूरी है
02:10नमस्कार, मेरा नाम है रिचा पराशर और आप देख रहे हैं, वन इंडिया ही
02:24दरसली प्रस्तावित कोरिडॉर, चीन के युननान फ्रांत कुम्यानमार के रास्ते बंगलादेश से जोडने की उचना है
02:30अगर ये परियोजना पूरी होती है, तो चीन को सीधे बंगाल की खाड़ी तक पहुच बल जाएगी
02:35इतना ही नहीं, उसे बंगलादेश के दो मेहतोपुन बंदरगा, चिटगाउं और मुंगला तक भी आसान पहुच बल सकती है
02:44यही वो बिंदू है जहां भारत की रणे तक चंताएं शुरूब होती है
02:48यह पूरा मामला उस समय चर्चा में आया जब बंगलादेश की प्रिधान मंतरी तारिक रहमान ने परवरी में पर्द संपालने
02:54के बाद अपनी पहली चीन यात्रा की
02:56इसी दुरान चीन और बंगलादेश के बीच इस आर्थिक गलियारे को लेकर बाद चीत हो
03:00हलाकि अभे तक कोई अंतिम समझोता सामने नहीं आया है
03:03लेकिन बीजिंग ने सपष्ट संके दे दिये हैं कि वो इस परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए बेहत गंभीर है
03:10तो अब सवाल ये है कि आकर चीन इस कोरिडॉर में इतने दिल्चस्पी क्यों दिखा रहा है
03:15इसका जवाब उसकी महत्व कामशी Belt and Road Initiative BRI में छिपा है
03:20पचले एक दशक में चीन ने एशिया, अफ्रिका और यूरोप तक सड़कों, रेलवे, बंदर गाहों, उर्जया परियोजनाओं और अधिकारिक तोर
03:33पर इन परियोजनाओं का उदेश वियापार और आर्थिक विकास बताया जाता है
03:37लेकिन अंतराष्टी और रणितिक विशेशक ये मानते हैं कि इनका एक बड़ा उदेश चीन का वैशिक प्रभाव बढ़ाना भी है
03:43दक्षिन एशिया में चीन पहले ही कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्टरल प्रोजेक्स पर काम कर चुका है
03:49पाकस्तान में गौादर पोर्ट, श्रिलंका में हमबन टोटा पोर्ट और म्यानमार में क्याक्फियो डीप सी पोर्ट इसी रणितिक हिस्समाने जाते
03:57हैं
03:57अब यदि बांगलादेश भी इस नेटवर्क से जुड़ जाता है तो चीन का समुत्री और रणितिक दाइरा भारत के पुर्वी
04:03तटि तक भी फैल सकता है
04:05यही पर सामने आता है स्ट्रिंग ओफ पर्ल्स यानि की मोतियों की माला का सद्धान
04:11यह शब्द उन बंदरगाहों, नौसेनिक सुविधाओं और रणितिक परियोजनाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है
04:17जिने चीन हिंद महसागर छेतर में विक्सीत कर रहा है
04:20इन सभी परियोजनाओं को अगर नक्षे पर देखा जाए तो वे भारत के चारो ओर एक श्रिंखला जैसी दिखाई देती
04:27है
04:27इसलिवजे से भारतिय रणितिक समुदाय लंबे समय से आशंग का जताता रहा है
04:32ये केवल व्यापारिक निवेश नहीं बलकि भविश्य की सामरिक तयारी भी हो सकती है
04:37चीन इन बंदरगाहों को व्यावसाइक परियोजनाय बताता है
04:53तो युद्पोतों की परिचालन्ज हमता कई गुणा बढ़ जाती है
04:57यही कारण है कि भारत इन परियोजनाओं को किवल आर्थिक नजरिय से नहीं देखता
05:01यदि चीन को चिटगाहों और मोंगला जैसे बंदरगाहों तक नियमित पहुँच मिलती है
05:07तो बंगाल की खाड़ी में उसकी मौजूदगी पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकती है
05:12बंगाल की खाड़ी भारत के पुर्वी समुद्री शेत्र का अत्यंत महतोपूर्ण हिस्सा है
05:17यहीं से भारत के पुर्वोतर राज्यों तक समुद्री संपर्ख और अंडमार निकोबार द्वीब समुद्र की रणितिक निगरानी भी जुड़ी हुई
05:25है
05:25भारतिय सुरक्षा विशशग्या की एक और चुंता यह है कि भविश्य में यदि चीन और पाकिस्तान के साथ एक साथ
05:32तनाव पैदा होता है
05:33तो भारत को पश्चिम और पुर्वों दोनों दिशाओं में अतरिक्त सामरिक दबाब जहिलना पड़ सकता है
05:39इसलिए इस कॉरिडॉर को किवल एक सडक या रेलवे परियोजना के रूप में नहीं देखा जा रहा है
05:43बल्किसे भारत की सुरक्षा रणीती के व्यापक संदर में समझा जा रहा है
05:48हलाकि इस परियोजना के सामने कई बड़ी चुनोतिया भी मौजूद है
05:51सबसे बड़ी चुनोती म्यानमार की आंतरिक स्तिती है
05:54प्रस्तावित कॉरिडॉर का बड़ा हिस्सा म्यानमार के रखाईन राज्य से होकर गुजरता है
05:59यही वो इलाका है जहां इस समय अराकान आर्मी और म्यानमार की सेना की बीच लकतार संग्यर्ष चल रहा है
06:06रखाईन के कई हिस्सों पर अराकान आर्मी का प्रभाव बढ़ चुका है
06:11ऐसे में किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रेक्टरल प्रोजेक्ट को लागू करना आसान भी होगा
06:16सुरक्षा के दृष्टी से यह पूरा शेत्र बेहत सम्वेदर्शील बना हुआ है
06:20सडक निर्मान, रेलवे लाइन और द्योगिक गलियारे और बंदरगाह विकास जैसी परियोजना है लंबे समय तक संघर्ष की वज़े से
06:27प्रभाव इठ हो सकती है
06:28रखाईन में चीन पहले से क्याक फ्यू डीप सी पोर्ट विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है
06:35दूसरी तरफ भारत ने सिट्वे बंदरगाह का निर्मान किया है जो अब परिचालन में भी आ चुका है
06:39ये बंदरगाह भारत की कलादान मल्टी मॉडल ट्रांजिट ट्रांस्पोर्ट परियोजना का एहम हिस्सा है
06:45कलादान परियोजना भारत के लिए अत्यंत महतोकुन मानी जाती है क्योंकि इसका उदेश जो है वो कुलकाता से म्यानमार के
06:52रास्ते मिजोरन तक वैकल्पिक संपर्ख स्थापित करना है।
07:15एक महतोकुन परियोजना भी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रही है। इसलिए जब तक मियानमार किस्तिति स्थिर नहीं होती। तब
07:23तक CMBC केवल एकरर नितिक कल्पना बन कर रहे सकता है।
07:45विकास पर आधारित ये परियोजना लगभग 60 अरब डॉलर से अधिक की मानी जाती है।
07:49भारत शुरू से ही सीपेक का विरोध करता रहा है क्योंकि इसका एक हिस्सा पाकिस्तान अधिकरित कश्मीर से होकर गुजरता
07:56है।
07:57जिसे भारत अपना अभिन हिस्सा मानता है।
07:59नई दिल्ली का सपष्ट मत रहा है कि उसकी सम्प्रभुता से जुड़े छेतर में किसी तीसरे देश की परियोजना स्विकारे
08:06नहीं हो सकती है।
08:07अब यदि CMBC भी आगे बढ़ता है तो ये चीन की कोरिडॉर आधारी तरणीती का तूसरा बड़ा उधारन होगा।
08:37लेकिन इस सामरिक विशलेशकों का मानना है कि दक्षिन एशिया में चीन का बढ़ता इंफ्रस्ट्रक्चरल जो नेटवर्क है वो आने
08:44वाले वर्षों में अधिक संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
08:47भारत भी इस चुनौती का जवाब अपने तरीके से दे रहा है।
08:51क्वार्ट जैसे बहु पक्षिय मंचों में सक्रिय भागिदारी, अंडमान निकोबार कमांड को मजबूत करना, पुर्वी तट पर नौसायनिक शमताओं का
08:59विस्तार करना, बंगलादेश, श्रिलंका और मालदीव जैसे पडोसी देशों के साथ स्रियोग बढ़ाना और उ
09:18कमीन पर उतरता है या नहीं, लेकिन इतना तै है कि इस पर योजना ने भारत की सुरक्षा और विदेश
09:24नीती से जुड़े कई नए सवाल जरूर खड़े कर दिये हैं।
09:48में चीन और भारत की बीच प्रतिसपर्धा अब किवल सीमाओं तक सिमित नहीं है, ये बंदरगाहें, समुद्री मारगों, आर्थिक गलियारों
09:56और नितिक साज़ेदारियों तक फैल चुगी हैं।
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