00:00अगर आप नौकरी पेशा हैं और आपकी सालरी से हर महीने P.F. कटता है तो ये खबर आपके लिए
00:05बेहद महत्वपूर्ण है।
00:07कर्मचारी भविश्य निधी संगठन यानी E.P.F.O. से जुड़े मियमों में बड़ा बदलाव किया गया है।
00:12केंद्र सरकार ने नई कर्मचारी भविश्य निधी योजना 2026 को अधिसूचित कर दिया है जो अब पुरानी E.P.F.
00:19स्कीम 1952 की जगह लेगी।
00:22पहली नजर में ये बदलाव कर्मचारीों के लिए राहत जैसा लग सकता है क्योंकि इस से हर महीने हाथ में
00:27आने वाली सैलरी बढ़ने की संभावना है।
00:30लेकिन दूसरी तरफ यही फैसला आपकी रिटायर्मेंट की बचत पर भी बड़ा असर डाल सकता है।
00:35अब तक ज्यादतर कर्मचारीों की बेसिक सैलरी का 12% हिस्सा EPF में जमा होता था और कमपनी भी उतना
00:42ही योगदान देती थी।
00:43लेकिन नई नियम के मताबिक कमपनियों के लिए कानूनी रूप से केवल 15,000 रुपे की वैधानिक वेतन सीमा तक
00:49ही 12% योगदान देना अनिवार्य होगा।
00:52यानि कमपनी की तरफ से अधिकतम 1800 रुपे का योगदान ही अनिवार्य रहेगा।
00:57अगर किसी करमचारी की बेसिक सालरी 30,000 रुपे है तो पहले उसके पीएफ में 3600 रुपे जमा होते थे।
01:04अब अनिवार्य योगदान सिर्फ 18,000 रुपे रहेगा। इससे अधिक पैसा पीएफ में तभी जाएगा जब करमचारी स्वयम इसकी इच्छा
01:11जताए।
01:12यानि अब ज्यादा पीएफ जमा करना पूरी तरह करमचारी और कमपनी की आपसी सहमती पर निर्भर करेगा।
01:18इस बदलाव का सबसे बड़ा असर करमचारीों की इन हैंट सैलरी पर दिखाई भी सकता है।
01:22अगर कोई करमचारी अतिरिक्त पीएफ योगदान नहीं चुनता, तो जो रकम पहले पीएफ में चली जाती थी, वो अब वेतन
01:28के रूप में हाथ में मिल सकती है।
01:30इससे हर महीने नकद आय बढ़े भी और ततकाल खर्च या निवेश के लिए ज्यादा पैसा उपलब्ध होगा।
01:36लेकिन यहीं एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है।
01:38क्या थोड़ी ज्यादा इन हैंट सालरी के बदले भविश्य की सुरक्षित बचत कम करना सही फैसला होगा।
01:44विशिशग्यों का कहना है कि पीएफ सिर्फ बचत नहीं बलकि लंबे समय का सबसे सुरक्षित ने वेश माना जाता है।
01:50इपीएफ पर मिलने वाला ब्याज बाजार की तुलना में काफी आकरशक होता है।
01:54अगर कर्मचारी कम योगदान देगा तो रिटायर्मेंट के समय मिलने वाली कुल राशी भी काफी कम हो जाएगी।
01:59नई योजना से कमपनियों को भी रहत मिलेगी।
02:02पहले कई कमपनिया कर्मचारी की पूरी बैसिक सालरी पर बारा प्रतिशत योगदान देती थी, अब उनके ऊपर केवल 18 सरुपे
02:09तक योगदान की कानूनी बाद धेता रहेगी।
02:11इससे कमपनियों को सालरी स्ट्रक्चर तयार करने में ज्यादा लचीलापन मिलेगा और उनकी लागत भी कुछ हद तक कम हो
02:18सकती है।
02:18हालांके कई बड़ी कमपनियां अपने कर्मचारियों को आकरशित करने और बनाये रखने के लिए पुरानी व्यवस्था जारी रख सकती हैं।
02:25सरकार का कहना है कि इस बड़लाव का उद्देश्य कर्मचारियों की बचत कम करना नहीं बलकि 1952 के पुराने और
02:32जटिल कानून को नए श्रम कानूनों के अनुरूप सरल और स्पष्ट बनाना है।
02:36इससे प्रशासनिक प्रक्रिया आसान होगी, कागजी काम कम होगा और भविश्य निधी से जुड़े विवादों में भी कमी आने की
02:42उम्मीद है।
03:09नई योजना में एक और बड़ा बदलाव किया गया है।
03:13अगर कोई व्यक्ति आज ज्यादा इन्हेंट सैलरी चाहता है, तो वो कम पीएफ योगदान चुन सकता है।
03:18लेकिन अगर वो भविश्य के लिए मजबूत वित्तिय सुरक्षा चाहता है, तो पहले की तरह अधिक योगदान जारी रख सकता
03:24है।
03:24इसलिए फैसला लेने से पहले सिर्फ आज की सैलरी नहीं, बलकि रिटार्मेंट के बाद की जरूरतों को भी जरूर ध्यान
03:30में रखना होगा।
03:33प्यूट चाहता है जाज की जरूरतों की तरह चाहता है।
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