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CJI Suryakant on UAPA Cases: दिल्ली दंगा मामले के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे अंडरट्रायल कैदियों की जमानत और मुकदमों में हो रही देरी को लेकर छिड़ी बहस के बीच देश के प्रधान न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत का एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक बयान सामने आया है।

भारत में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए (UAPA), धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) और एनडीपीएस (NDPS) जैसे कड़े कानूनों के तहत दर्ज मामलों के लंबा खिंचने और आरोपियों को सालों तक जमानत न मिलने पर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने गंभीर चिंता जताई है। दिल्ली दंगा मामले (Delhi Riots Case) के आरोपी उमर खालिद (Umar Khalid) के लंबे समय से जेल में बंद रहने के मुद्दे के बीच, चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बिना किसी का नाम लिए साफ किया है कि इन गंभीर मामलों का समयबद्ध और शीघ्र निपटारा ही इस विवाद का एकमात्र और सबसे प्रभावी समाधान है।

सीजेआई ने खुलासा किया कि न्यायपालिका के सुझाव पर केंद्र सरकार ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। अब देश में UAPA, PMLA और ड्रग्स से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें (Special Courts) स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन विशेष अदालतों का लक्ष्य ऐसे सभी संवेदनशील और बड़े मुकदमों का निपटारा एक वर्ष के भीतर करना होगा। अगर ऐसा होता है, तो लंबे समय तक विचाराधीन कैद (Undertrial Detention) में रहने और जमानत न मिलने को लेकर पैदा होने वाले सारे विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। कोर्ट कचहरी की सुस्त रफ्तार और देश की न्याय प्रणाली को बदलने वाले इस ऐतिहासिक फैसले की पूरी इनसाइड स्टोरी और ऋचा पराशर का यह खास विश्लेषण अंत तक जरूर देखें।

Chief Justice of India (CJI) Justice Suryakant has expressed serious concern over the prolonged trial delays and bail disputes involving undertrial prisoners locked under strict laws like UAPA, PMLA, and NDPS. Against the backdrop of the continuous detention of Delhi riots accused Umar Khalid and Sharzil Imam, the CJI announced that the central government has agreed to establish designated Special Courts. These courts will expedite high-stakes cases to achieve a final verdict within one year, significantly transforming the speed of India's judicial delivery system.

#CJISuryakant #UmarKhalid #UAPALaw #SupremeCourt

~PR.514~HT.178~GR.510~VG.HM~

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Transcript
00:00दिल्ली तग्गा मामले में R.O.P. उमर खालिद महीनों से जेल में बंद है
00:03खालिद को गैर कानूनि गतिविधी रोक्ठाम कानून U.A.P.A. के तहट आरोपी बनाया गया था
00:08और लम्बे समय से जेल में बंद उमर खालिद को जबानत भी नहीं मिल रही है
00:12उस पर कई सारे सवाल उठाय जा रहे थे
00:14कि अभारत में यूए पीए जैसे गंभीर मामलों में
00:17सालों तक जेल में रहना ही सबसे बड़ी सजा बनता जा रहा है
00:20आखिर क्यों कई आरोपी वर्षों तक ट्रायल पूरा होने का इंतजार करते रहते हैं
00:24लेकिन उन्हें जमानत नहीं मिलती जुसके बाद
00:26CGI Justice सूर्यकांत ने इन तमाम मुद्दों पर अपनी राय रखी
00:31नमस्कार मेरा नाम हरिचा पराशर और आप देख रहे हैं One India Hindi
00:41गैर कानूनी गतिविधियां रोख थाम अधिनियम
00:44यानि UAPA के तहट दर्ज मामलों में लंबे समय तक सुनवाई और जमानत को लेकर एक बार फिर बहस देज
00:50हो गई
00:50खासकर दिल्ली दंगा मामले में आरोपी उमर खालिद समय तक कई विचार आधीन कैदियों के लंबे समय से
00:57जेल में रहने को लेकर लगतार सवाल उठते रहे हैं इसे बीच भारत के प्रधार नियाधीश जस्टिस सुर्यकांत ने ऐसे
01:03मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चुनता जताई है
01:06उन्होंने कहा कि इस समस्या का सबसे प्रभावी समधान मामलों का शिग्र निपचारा है
01:12एक कारिक्रेम के दोरान अपनी बात रखते हुए CGI ने किसी विशेश व्यक्ति या मामले का नाम लिये भीना कहा
01:18कि नियाई पालिका को ये सुनिश्यत करना होगा कि गंभीर मामलों की सुनवाई अनवश्यक रूप से वर्चों तक लंबित ना
01:25रहे
01:25जरसल यूए पिये के तहट दर्ज मामलों में जमानत के प्रावधान सामाने अपराधिक मामलों की तुल्ला में काफी सख्त है
01:32ऐसे में कई आरोपी लंबे समय तक वुचाराधीन कैदी के रूप में जेल में रहते हैं जबकि मुकदमे की सुनवाई
01:38जारी रहती है
01:39CGI सूरेकान ने बताया कि न्याईक प्रक्रिया के माध्हम से केंद्र सरकार को सुझाव दिया गया है
01:44कि UAPA, धन शोधन निवारन अधिनियम यानि की PMLA और NDPS कानून जैसे मामलों के सुनवाई के लिए विशेश अदालते
01:52स्थापित की जाएं
01:53उन्हेंने कहा कि केंद्र सरकार ने इस दिशा में सहमती भी जताई है और इन विशेश अदालतों की स्थापना की
01:59प्रक्रिया शुरू हो चुकी है
02:01प्रधान नियाधिश के मताबिक यदि इन अदालतों के जरिये ऐसे मामलों का निप्चारा एक वर्ष के भीतर या फिर जितना
02:07जल्दी संभव हो सके किया जाता है तो लंबे समय तक विचाराधिन कैद और जमानत से जुड़े अधिकांश विवाद स्था
02:15समाप्त हो जाए
02:21सुप्रिम कोट, हाई कोट और निचली अदालतों में लाखों मुकदमे वर्षों से लंबीद हैं इसका असर केवल यूए पीए जैसे
02:28मामलों पर नहीं बलकि आम नागरी को को नियाय मिलने के प्रत्रिया पर भी पड़ता है कानूनी विशशग्यों का भी
02:34मानना है कि गंभ
03:15पर नियायाले जमानत और सुनवाई से जुड़े पैसले लेते हैं।
03:19इस विशव से जुड़े हर अपडेट के लिए हमारे साथ देखते रहिए वन इंडिया है।
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