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Muharram 2026: मुहर्रम में खिचड़ा (हलीम) बनाना और नियाज़-फ़ातिहा दिलाना इस्लाम में कैसा है? क्या यह जायज़ है या बिदअत? इस वीडियो में जानिए इसकी शरई हैसियत, समाज में फैली गलतफहमियां और इस पर क़ुरआन, हदीस, देवबंद और बरेलवी (आला हज़रत) के उलेमा के प्रामाणिक फ़तवे। सच्चाई जानने और सुन्नत के सही रास्ते को समझने के लिए वीडियो पूरा देखें और शेयर करें। शोहदा-ए-कर्बला का सही इसाले-सवाब क्या है?


Muharram 2026: Is making Khichda (Haleem) and doing Niyaz in Muharram allowed in Islam or is it a Bid'ah? Watch this video to learn the authentic ruling based on the Quran, Hadith, and prominent Islamic scholars (Deoband & Bareilly). Understand the difference between charity and innovation (Bidat) to follow the true path of Sunnah. Watch till the end to clear all your doubts and share this important message.



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Transcript
00:03महरम का महीना शुरू होते ही हमारे घरों और गली महलों में एक चीज बहुत आम हो जाती है और
00:08वो है महरम का खिचड़ा या हलीम बनाना उस पर नियास फातिह दिलाना
00:12कुछ लोग इसे महरम की सबसे बड़ी अबादत और ज़रूरी रस्म मानते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे पूरी तरह
00:16बिदत और नाजायस कराण देते हैं
00:18लेकिन एक मुसल्मान होने के नाते, सबसे जरूरी ये जानना है कि इस बारे में कुरान हदीस और उल्मा की
00:23राय क्या है, क्या महर्म में एक खिचड़ा बनाना सच में जायज है या या ये दीन में एक नई
00:28बुराई है।
00:28चलिए इस वीडियो में समझने की कोशिश करते हैं
00:31सबसे पहले बुनियादी उसूल को समझते हैं
00:33इसलाम में किसी को खाना खिलाना बहुत अवजल अबादत है
00:36कुरान मजीद की सुरह अल-इंसान आयत 8 में अल्ला ताला फर्माता है कि
00:41और वो अल्ला की महबत में मिस्कीन, यतीम और कैदियों को खाना खिलाते हैं
00:45इसी तरह बुखारी शरीफ की हदीश है कि नबी सुल अल-इंसे पूछा गया कि कौन सा इसलाम सबसे बहतर
00:50है
00:50तो आपने फर्माया तुम खाना खिलाओ और जिसे जानो या ना जानो उसे सलाम करो
00:55मरने वाले मुसल्मानों के लिए दूआ करना और उनके नाम पर सत्का खेरात जिसे इसाल सबाब कहा जाता है सुनत
01:01से साबित है
01:02इसलिए इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के नाम पर गरीबों को खाना खिलाना या दूआ करना मूल रूप से
01:08नाजायज नहीं है
01:09तो फिर विवात कहा है उलेमा ने इसे मना क्यूं किया है
01:12गलती तब होती है जब कुछ लोग अंद विश्वास या मन गड़न बाते इससे जोड़ देते हैं
01:17हमारे समाज में दो बड़े गलत फहिमिया है
01:19पहली गलत फहिमी कुछ लोग समझते हैं कि कर्बला के मैदान में जब पानी और अनाज बन था
01:23तो सब चीजे मिलाकर खिचड़ा बनाया गया था
01:25इतिहास में इसका कोई सबूत नहीं है
01:27दूसरी गलत फहिमी इसे महरम का एक जरूरी मजभी फर्ज मान लेना
01:31इसी वज़े से उल्मा एकराम चाहें वो आला हज़रत इमाम एहमद रजा खान साहब हों
01:36या दारुलूम देवबन के उल्मा हों
01:38सबका इस बात पर इतिफाक है कि
01:40अगर कोई शक्स खिचड़े को महरम का जरूरी हिस्सा समझता है
01:44या ढोलत आशे और गयर इसलामी रस्मों के साथ इसे मनाता है
01:47तो वो बिदत और नाजायज है
01:49खुलासा ये है कि महरम में खिचड़ा या कोई भी दूसरा साफसुतरा खाना बनाना
01:53उस पर बिना किसी दिखावे या बिदत कि सीधे हला के नाम की सूरह पढ़कर
01:57शोधा या करबला को सवाब पहुजाना और उसे गरीबों में बाटना बिलकुल जायज है
02:01लेकिन इसे इसलाम का जरूरी कानून मान लेना इसके बिना महरम को अधूरा समझना
02:06या करबला के नाम पर अंद विश्वास पहलाना गलत और बिदत है
02:09वेतर ये है कि रस्मों प्रिवाज के बजाए हम गरीबों की असनी मदद करें
02:13पानी की सबील लगाएं और महरम की सुन्नत यानि 9 और 10 महरम के रोजे रखें
02:17फिलाल इस वीडियो में अगर आपको ये जानकारे पसंद आई हो तो इसे लाइक करें
02:20शेर करें और चैनल को सब्सक्राइब करना बिलकुल न भूले
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