00:03महरम का महीना शुरू होते ही हमारे घरों और गली महलों में एक चीज बहुत आम हो जाती है और
00:08वो है महरम का खिचड़ा या हलीम बनाना उस पर नियास फातिह दिलाना
00:12कुछ लोग इसे महरम की सबसे बड़ी अबादत और ज़रूरी रस्म मानते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे पूरी तरह
00:16बिदत और नाजायस कराण देते हैं
00:18लेकिन एक मुसल्मान होने के नाते, सबसे जरूरी ये जानना है कि इस बारे में कुरान हदीस और उल्मा की
00:23राय क्या है, क्या महर्म में एक खिचड़ा बनाना सच में जायज है या या ये दीन में एक नई
00:28बुराई है।
00:28चलिए इस वीडियो में समझने की कोशिश करते हैं
00:31सबसे पहले बुनियादी उसूल को समझते हैं
00:33इसलाम में किसी को खाना खिलाना बहुत अवजल अबादत है
00:36कुरान मजीद की सुरह अल-इंसान आयत 8 में अल्ला ताला फर्माता है कि
00:41और वो अल्ला की महबत में मिस्कीन, यतीम और कैदियों को खाना खिलाते हैं
00:45इसी तरह बुखारी शरीफ की हदीश है कि नबी सुल अल-इंसे पूछा गया कि कौन सा इसलाम सबसे बहतर
00:50है
00:50तो आपने फर्माया तुम खाना खिलाओ और जिसे जानो या ना जानो उसे सलाम करो
00:55मरने वाले मुसल्मानों के लिए दूआ करना और उनके नाम पर सत्का खेरात जिसे इसाल सबाब कहा जाता है सुनत
01:01से साबित है
01:02इसलिए इमाम हुसेन और कर्बला के शहीदों के नाम पर गरीबों को खाना खिलाना या दूआ करना मूल रूप से
01:08नाजायज नहीं है
01:09तो फिर विवात कहा है उलेमा ने इसे मना क्यूं किया है
01:12गलती तब होती है जब कुछ लोग अंद विश्वास या मन गड़न बाते इससे जोड़ देते हैं
01:17हमारे समाज में दो बड़े गलत फहिमिया है
01:19पहली गलत फहिमी कुछ लोग समझते हैं कि कर्बला के मैदान में जब पानी और अनाज बन था
01:23तो सब चीजे मिलाकर खिचड़ा बनाया गया था
01:25इतिहास में इसका कोई सबूत नहीं है
01:27दूसरी गलत फहिमी इसे महरम का एक जरूरी मजभी फर्ज मान लेना
01:31इसी वज़े से उल्मा एकराम चाहें वो आला हज़रत इमाम एहमद रजा खान साहब हों
01:36या दारुलूम देवबन के उल्मा हों
01:38सबका इस बात पर इतिफाक है कि
01:40अगर कोई शक्स खिचड़े को महरम का जरूरी हिस्सा समझता है
01:44या ढोलत आशे और गयर इसलामी रस्मों के साथ इसे मनाता है
01:47तो वो बिदत और नाजायज है
01:49खुलासा ये है कि महरम में खिचड़ा या कोई भी दूसरा साफसुतरा खाना बनाना
01:53उस पर बिना किसी दिखावे या बिदत कि सीधे हला के नाम की सूरह पढ़कर
01:57शोधा या करबला को सवाब पहुजाना और उसे गरीबों में बाटना बिलकुल जायज है
02:01लेकिन इसे इसलाम का जरूरी कानून मान लेना इसके बिना महरम को अधूरा समझना
02:06या करबला के नाम पर अंद विश्वास पहलाना गलत और बिदत है
02:09वेतर ये है कि रस्मों प्रिवाज के बजाए हम गरीबों की असनी मदद करें
02:13पानी की सबील लगाएं और महरम की सुन्नत यानि 9 और 10 महरम के रोजे रखें
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