00:03इसलामी कलेंडर के पहले महीने यानि मोहर्रम उलहरम की शुरुवात हो चुकी है
00:08आज मोहर्रम की आठ तारिक है
00:09आज के इस वीडियो में हम बात करेंगे मोहर्रम में दी जाने वाली फातिहा के बारे में
00:24आजकल सोचल मीडिया पर महरम को लेकर कई तरह की बाते चलती है
00:27कोई कहता है फातिया डेना सही है, कोई कहता है गल्त है
00:29ऐसे में जरूरी है कि हम कुरान, हदीस और उलिमा एक्राम की बात समझें ना कि सिर्फ सोचल मेडिया की
00:34महरम इसलामी साल का पहला महीना है और इसे अशुरल हुरूम यानि इज़त वाले महीनों में शामिल किया गया
00:40इस महीने की खास एहमियत है क्योंकि इसी महीने में कर्बला का वो दर्दनाक वाकिया हुआ था है जहां हजरत
00:46इमाम हुसैन रजियल्लाहुत अनके परिवार और साथियों ने इसलाम और सच्चाई के लिए कुर्बानी दी
00:50साल 2026 में भारत में दस महरम यानि यौम आशूरा लगबक 26 जून को मनाया जा रहा है अब बात
00:56करते हैं फातिहा की फातिहा का मतलब होता है कुरान शरीफ की तिलावत करके अल्लाह से दुआ करना कि उसका
01:01सवाब किसी नेक बंदे या मरहूम तक पहुंचे इसे इसाले सवा
01:17करना और उनके लिए मख़वरत मांगना जायज है हदिश शरीफ में भी आता है कि इनसान के मरने के बाद
01:21भी सवाब नेक ऑलाद की दुआ और इल्म का सवाब पहुंचता रहता है अब सवाल आता है कि महरम में
01:27फातिहा किसके नाम से दी जाती है आम तोर पर लोग हज़रत �
01:31हजरत हसन और शहिदान कर्बला के इसाले सवाब के लिए फातिहा करते हैं कई लोग अपने घर के मरहूम लोगों
01:38के लिए भी फातिहा करते हैं अब जानते हैं कि फातिहा देने का तरीका क्या है सबसे पहले घर में
01:42सापसुतरी जगा पर खाना या पानी रखा जाता है जैस
01:58फातिहा कैसे पढ़े, सबसे बहले वजू कर ले, फिर पिबले की तरफ बैट जाएं, इसके बाद बिसम इल्ला पढ़ें, दुरूद
02:04शरीफ पढ़ें, सुरे फातिहा, सुरे इखलास तीन बार, सुरे फलक, सुरे नास, आयत अलकुर्सी, और अगर हो सके तो थोड़ा
02:10कुरा
02:26पानी और शर्बत बाढ़ते हैं, कुछ लोग इस दिन फातिहा भी करते हैं, अब बात करते हैं, नौ महरम की
02:32इसे तास्वा कहा जाता है, इस दिन इबादत करना, कुरान पढ़ना और रोजा रखना अच्छी बात मानी जाती, कई उलमा
02:37कहते हैं कि नौ और दस दूनों दिन
02:39रोजा रखना बहतर है, अब बात करते हैं, दस महरम की यानि यौम आशूरा, ये बहुत एहम दिने, हदिश शरीफ
02:45में आता है, कि आशूरा के दिन का रोजा पिछले एक साल के गुनाओं का कफारा बन जाता है, इसी
02:49दिन कर्बला में हज़रत इमाम हुसेन रजियल लाह न
03:03तो ये जायज माना जाता है, लेकिन अगर कोई दिखावा करें, फिजूल खर्ची करें, या गलत रस्मों को इसलाम समझें,
03:08तो इससे बचना चाहिए, महरम सिर्फ मातम का महीना नहीं है, बलकि सबर, इंसाफ और कुरवानी और इंसानियत का पैगाम
03:13देने वाला महीना है,
03:15इसलिए गरीबों की मदद करें, पानी पिलाएं, रोजा रखें, दुआ करें और इमाम हुसैन की कुरबानी से सीख लें, फिलाल
03:21इस वीडियो में इतना है, उमेद आपको ये वीडियो पसंद आये होगा, वीडियो को लाइक करें, शियर करें और चैनल
03:25को सब्सक्राइब क
03:26करना बेल पुलाब पूलेगा.
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