00:00दो राज्ये, एक नदी और दश को पुराना पानी का जगडा
00:04जब जब आस्मान में बादल कम बरसते हैं तब तब दक्षिन भारत में कावेरी नदी का पानी एक बार फिर
00:10अदालत के दर्वाजे पर आकर खड़ा हो जाता है
00:17हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे पुराने और समवेधन शील अंतर राज्ये जल विबादू में से एक कावेरी
00:24जल विबाद की
00:24सोमवार 17 अगस को सुप्रीम कोट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए करनाटक सरकार को दो टूक लेज़े में
00:31कड़ा संदेश दिया है
00:32सुप्रीम कोट ने साफ कहा है कि तमिल नाडू के हिस्से का पानी चुपुडने के निरदीशों का तुरंत और सक्ती
00:38से पालन किया ज़ए
00:39आखिर क्यों एक बार फिर करनाटक और तमिल नाडू आमनी सामने हैं
00:43सुप्रीम कोट को ये सक्त रवया क्यों अपनाना पड़ा और कावेरी नदी के पानी का ये गड़ित आखिर है क्या
00:49आए इस पूरी कहानी को आसान भाषा में समझते हैं
00:52सबसे पहले जानते हैं कि सुमवार को सुप्रीम कोट में क्या क्या हुआ
00:56न्याय मूर्ती विक्रम नाथ और न्याय मूर्ती संदीप मेता की पीठ ने कावेरी जल विवाद मामले पर सुनवाई की
01:02अदालत ने करनाटिक सरकार को निर्देश दिया कि वो कावेरी जल प्रबंदन प्राधी करन द्वारत अमिल नाडू को पानी जारी
01:09करने की आदेशों का अविलंब पालन करें
01:12मामले की गंभीता को देखते हुए सरवोच अदालत ने अगली सुनवाई की तारीक 24 अगस दो हजार 26 तै की
01:18साथ ही अदालत ने CWMA से कहा है की वो अगली सुनवाई तक तमिल नाडू को छोड़े गए पानी की
01:24एकदम नवीन तम यानी लेटेस्टिती रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें
01:28अब सवाल उठता है की मामला अदालत तक पहुँचा कैसे
01:31दरसलती नगस को तमिल नाडू सरकार सुप्रीम कोड पहुँची थी तमिल नाडू का अरोप था कि करनाटक के जलाश्यों में
01:37परियाप्त पानी मौजूद है फिर भी उसके हग का आवंटित पानी नहीं दिया जा रहा है
01:43तमिल नाडू सरकार के आकडों के मुताबिक टी नगस्तक करनाटक के चार प्रमुक जलाश्यों कृष्णा राजवासागर, काविनी, हरंगी और हेमावती
01:51में कुल 77.537 टीमसी पानी का विश्वालब डार मौजूद
01:57मिल नाडू का कहना था कि उसे 64 टीमसी की हग के मुकाबले अब तक सिर्फ 14.814 टीमसी पानी
02:05ही मिला है, जोसे लगबग 20 टीमसी का भारी बैकलॉग बन गया है
02:0928 जुलाई को काविरी जल विनीयमन सिमिती ने करनाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए रोजाना 3500 क्यूसेक
02:18पानी शकूने की सिफारिश की थी
02:20तमिल लाडू का अरूप था कि दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित बिली गुंडलू मापन केंद्र पर 29 जुलाई से
02:262 अगस के बीच पानी का प्रभा मात्र 158 से 550 क्यूसेक की बीच ही दर्ज किया गया, जो तै
02:33मात्रा से बेहत कम था
02:35दूसरी और करनाटक का कहना है कि उसने 11 अगस 2026 तक CWMA के निर्दिशों का पालन किया और कई
02:41मौकों पर तै सीमा से अधिक पानी भी छोड़ा है
02:45करनाटक का तर्क है कि उसे अपने राज्यों की किसानों की सिचाई और बेंगलूरू जैसे शेहरों के पेजल की जरुतों
02:51को भी पूरा करना होता है
02:52हाला कि हाली में KRS और काविनी जिलाश्यों के कैच मेंट एरिया में हुई अच्छी बारिश से पानी की स्थिती
02:59में सुधार हुआ है
03:00हजर अगस दोहजार चबीस की सुबा बिली गुर्लू में पानी का प्रभा आवश्यक 12,000 की उसेक से अधिक दर्ज
03:06किया गया जिसे सुप्रीम कोट ने भी नोट किया है
03:08इस विवाद को गहराई से समझने के लिए हमें इसकी बाक स्टोरी जानने में कावेरी नदी दक्षिट भारत की जीवन
03:14रिखा है
03:14निकरनाटक के कुर्ग जुले से निकलती है और तमिलनाडू, केरल और केंडर शाषित प्रदेश पुड्डू चैरी से होते हुए बंगाल
03:21की खाडी में गिरती है
03:221892 और 1924 में ततकाली मंद्रास प्रेजिडेंसी और मैसूर रियासत के बीच पानी को लेकर पहला समझाता हुआ था
03:30लेकिन आजादी के बाद राज्यों के पुनर गठन और बढ़ती पानी के जरुत्व की कारण ये विबाद लगातार गहराता कि
03:36कावेरी जल विबाद न्यायधी करण ने 2007 में अपना अंतिम फैसला सुनाया जिसमें चार राज्यों के लिए पानी का कोटा
03:42तै किया गया
03:43सुप्रीम कोट ने 2018 में ट्रिब्यूनल के फैसले में थोड़ा संसोधन किया और पीने के पानी को प्राथमिक्ता देते हुए
03:49करनाटा का हिस्सा थोड़ा बढ़ा है
03:51इसी 2018 के फैसले के तहट कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनिया मन समीती का गठन हुआ
03:58इनका काम है मौसम, बारिश और जलाश्यों के स्तर को देख कर ये तै करनाटा को कब और कितना पानी
04:17मिलना चाहे
04:18CWA में ये एक स्टाचरी बाड़ी है जो राज्यों की बीच जल बटवारे की नियमों का पालन कराती है
04:24ये विवाद अक्सर तब उग्र होता है जब दक्षन पश्यम मों सून कमजोर रहता है और जलाश्यों में पानी की
04:29कमी हो जाती है
04:30कावेरी नदी केवल दो राज्यों की बीच बहने वाला पानी नहीं है ये करोणों किसानों की रूजी रोटी, फसलों की
04:36सिचाई और करोडों नाग्रेकों की पीनी के पानी से जुड़ी जीवन रिखा है
04:40सुप्रीम कोट के इस सक्थ आदेश के बाद अब सभी की निगाये 24 अगस 2026 की अगली सुनवाई पटिकी है
04:46जहां CWA में अदालत को अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट सौपेगी
04:50लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या अदालती आदेशो और कानूरी संस्थाओं के जरिये जल बटवारे का ये तनाव हमेशा
04:55के लिए सुलच पाएगा
04:56या फिर जल वायू परिवर्तिन के इस दोर में जब नदिया सूख रही है और मोंसुन अनिश्चत हो रहा है
05:02इसमें भारत को अंतर राजवे जल प्रबंधन के लिए किसी नई और टिकाओ मॉडल की सक्थ जरूरत
05:08आप इस पूरी मुद्धे पर क्या सोचते हैं कॉमेंट में हमेरा आए जरूर बताए फिलाल बस इतना ही देश और
05:12दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहे वान इंटिया हिंदी
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