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The Cauvery water dispute has once again become a source of tension between Karnataka and Tamil Nadu. On August 17, 2026, the Supreme Court directed the Karnataka government to strictly comply with the Cauvery Water Management Authority (CWMA) orders and release Tamil Nadu’s allocated share of water. Tamil Nadu has alleged that despite sufficient water reserves in Karnataka’s reservoirs, it is not receiving its due share. Karnataka, on the other hand, maintains that it must also meet the irrigation needs of its farmers and the drinking water requirements of Bengaluru and other areas. The two states have also presented differing claims over water flow recorded at the Billigundlu gauging station.


कावेरी जल विवाद एक बार फिर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच तनाव का कारण बन गया है। 17 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) के निर्देशों का सख्ती से पालन करते हुए तमिलनाडु के हिस्से का पानी छोड़ने का आदेश दिया। तमिलनाडु का आरोप है कि पर्याप्त जल भंडार होने के बावजूद उसे आवंटित पानी नहीं मिल रहा, जबकि कर्नाटक का कहना है कि उसे अपने किसानों की सिंचाई और बेंगलुरु समेत अन्य क्षेत्रों की पेयजल जरूरतों का भी ध्यान रखना है। बिलिगुंडलू जल मापन केंद्र पर पानी के प्रवाह को लेकर भी दोनों राज्यों के दावे अलग-अलग हैं। कावेरी विवाद की जड़ 1924 के समझौते और बाद के जल बंटवारे से जुड़ी है। 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद CWMA और CWRC की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई। अब 24 अगस्त की सुनवाई पर सभी की नजरें हैं।


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~HT.178~PR.516~ED.276~GR.538~VG.HM~

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00:00दो राज्ये, एक नदी और दश को पुराना पानी का जगडा
00:04जब जब आस्मान में बादल कम बरसते हैं तब तब दक्षिन भारत में कावेरी नदी का पानी एक बार फिर
00:10अदालत के दर्वाजे पर आकर खड़ा हो जाता है
00:17हम बात कर रहे हैं भारत के सबसे पुराने और समवेधन शील अंतर राज्ये जल विबादू में से एक कावेरी
00:24जल विबाद की
00:24सोमवार 17 अगस को सुप्रीम कोट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए करनाटक सरकार को दो टूक लेज़े में
00:31कड़ा संदेश दिया है
00:32सुप्रीम कोट ने साफ कहा है कि तमिल नाडू के हिस्से का पानी चुपुडने के निरदीशों का तुरंत और सक्ती
00:38से पालन किया ज़ए
00:39आखिर क्यों एक बार फिर करनाटक और तमिल नाडू आमनी सामने हैं
00:43सुप्रीम कोट को ये सक्त रवया क्यों अपनाना पड़ा और कावेरी नदी के पानी का ये गड़ित आखिर है क्या
00:49आए इस पूरी कहानी को आसान भाषा में समझते हैं
00:52सबसे पहले जानते हैं कि सुमवार को सुप्रीम कोट में क्या क्या हुआ
00:56न्याय मूर्ती विक्रम नाथ और न्याय मूर्ती संदीप मेता की पीठ ने कावेरी जल विवाद मामले पर सुनवाई की
01:02अदालत ने करनाटिक सरकार को निर्देश दिया कि वो कावेरी जल प्रबंदन प्राधी करन द्वारत अमिल नाडू को पानी जारी
01:09करने की आदेशों का अविलंब पालन करें
01:12मामले की गंभीता को देखते हुए सरवोच अदालत ने अगली सुनवाई की तारीक 24 अगस दो हजार 26 तै की
01:18साथ ही अदालत ने CWMA से कहा है की वो अगली सुनवाई तक तमिल नाडू को छोड़े गए पानी की
01:24एकदम नवीन तम यानी लेटेस्टिती रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करें
01:28अब सवाल उठता है की मामला अदालत तक पहुँचा कैसे
01:31दरसलती नगस को तमिल नाडू सरकार सुप्रीम कोड पहुँची थी तमिल नाडू का अरोप था कि करनाटक के जलाश्यों में
01:37परियाप्त पानी मौजूद है फिर भी उसके हग का आवंटित पानी नहीं दिया जा रहा है
01:43तमिल नाडू सरकार के आकडों के मुताबिक टी नगस्तक करनाटक के चार प्रमुक जलाश्यों कृष्णा राजवासागर, काविनी, हरंगी और हेमावती
01:51में कुल 77.537 टीमसी पानी का विश्वालब डार मौजूद
01:57मिल नाडू का कहना था कि उसे 64 टीमसी की हग के मुकाबले अब तक सिर्फ 14.814 टीमसी पानी
02:05ही मिला है, जोसे लगबग 20 टीमसी का भारी बैकलॉग बन गया है
02:0928 जुलाई को काविरी जल विनीयमन सिमिती ने करनाटक को 29 जुलाई से 15 दिनों के लिए रोजाना 3500 क्यूसेक
02:18पानी शकूने की सिफारिश की थी
02:20तमिल लाडू का अरूप था कि दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित बिली गुंडलू मापन केंद्र पर 29 जुलाई से
02:262 अगस के बीच पानी का प्रभा मात्र 158 से 550 क्यूसेक की बीच ही दर्ज किया गया, जो तै
02:33मात्रा से बेहत कम था
02:35दूसरी और करनाटक का कहना है कि उसने 11 अगस 2026 तक CWMA के निर्दिशों का पालन किया और कई
02:41मौकों पर तै सीमा से अधिक पानी भी छोड़ा है
02:45करनाटक का तर्क है कि उसे अपने राज्यों की किसानों की सिचाई और बेंगलूरू जैसे शेहरों के पेजल की जरुतों
02:51को भी पूरा करना होता है
02:52हाला कि हाली में KRS और काविनी जिलाश्यों के कैच मेंट एरिया में हुई अच्छी बारिश से पानी की स्थिती
02:59में सुधार हुआ है
03:00हजर अगस दोहजार चबीस की सुबा बिली गुर्लू में पानी का प्रभा आवश्यक 12,000 की उसेक से अधिक दर्ज
03:06किया गया जिसे सुप्रीम कोट ने भी नोट किया है
03:08इस विवाद को गहराई से समझने के लिए हमें इसकी बाक स्टोरी जानने में कावेरी नदी दक्षिट भारत की जीवन
03:14रिखा है
03:14निकरनाटक के कुर्ग जुले से निकलती है और तमिलनाडू, केरल और केंडर शाषित प्रदेश पुड्डू चैरी से होते हुए बंगाल
03:21की खाडी में गिरती है
03:221892 और 1924 में ततकाली मंद्रास प्रेजिडेंसी और मैसूर रियासत के बीच पानी को लेकर पहला समझाता हुआ था
03:30लेकिन आजादी के बाद राज्यों के पुनर गठन और बढ़ती पानी के जरुत्व की कारण ये विबाद लगातार गहराता कि
03:36कावेरी जल विबाद न्यायधी करण ने 2007 में अपना अंतिम फैसला सुनाया जिसमें चार राज्यों के लिए पानी का कोटा
03:42तै किया गया
03:43सुप्रीम कोट ने 2018 में ट्रिब्यूनल के फैसले में थोड़ा संसोधन किया और पीने के पानी को प्राथमिक्ता देते हुए
03:49करनाटा का हिस्सा थोड़ा बढ़ा है
03:51इसी 2018 के फैसले के तहट कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण और कावेरी जल विनिया मन समीती का गठन हुआ
03:58इनका काम है मौसम, बारिश और जलाश्यों के स्तर को देख कर ये तै करनाटा को कब और कितना पानी
04:17मिलना चाहे
04:18CWA में ये एक स्टाचरी बाड़ी है जो राज्यों की बीच जल बटवारे की नियमों का पालन कराती है
04:24ये विवाद अक्सर तब उग्र होता है जब दक्षन पश्यम मों सून कमजोर रहता है और जलाश्यों में पानी की
04:29कमी हो जाती है
04:30कावेरी नदी केवल दो राज्यों की बीच बहने वाला पानी नहीं है ये करोणों किसानों की रूजी रोटी, फसलों की
04:36सिचाई और करोडों नाग्रेकों की पीनी के पानी से जुड़ी जीवन रिखा है
04:40सुप्रीम कोट के इस सक्थ आदेश के बाद अब सभी की निगाये 24 अगस 2026 की अगली सुनवाई पटिकी है
04:46जहां CWA में अदालत को अपनी लेटेस्ट रिपोर्ट सौपेगी
04:50लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या अदालती आदेशो और कानूरी संस्थाओं के जरिये जल बटवारे का ये तनाव हमेशा
04:55के लिए सुलच पाएगा
04:56या फिर जल वायू परिवर्तिन के इस दोर में जब नदिया सूख रही है और मोंसुन अनिश्चत हो रहा है
05:02इसमें भारत को अंतर राजवे जल प्रबंधन के लिए किसी नई और टिकाओ मॉडल की सक्थ जरूरत
05:08आप इस पूरी मुद्धे पर क्या सोचते हैं कॉमेंट में हमेरा आए जरूर बताए फिलाल बस इतना ही देश और
05:12दुनिया की तमाम बड़ी खबरों के लिए देखते रहे वान इंटिया हिंदी
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