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“पढ़ाएँ या बचाएँ?” नोएडा के एक सरकारी स्कूल की Teacher Rajni Mishra ने बच्चों के सामने मौजूद ऐसी चुनौतियों के बारे में बताया, जो सिर्फ classroom teaching से हल नहीं हो सकतीं।

इस Ground Report में Teacher ने बताया कि कई बच्चे बेहद कठिन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों से स्कूल आते हैं। कई बार माता-पिता सुबह बहुत जल्दी काम पर निकल जाते हैं और बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी उन्हीं पर रह जाती है।

Teacher के मुताबिक, कुछ बच्चे सुबह बिना खाना खाए स्कूल पहुंचते हैं। Lunch से पहले उनकी तबीयत बिगड़ जाती है और कभी-कभी बच्चे बेहोश तक हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में Teachers के सामने पढ़ाई से पहले बच्चे को संभालने और उसे सामान्य करने की चुनौती होती है।

Teacher ने यह भी बताया कि कई बच्चों के परिवारों में पानी, भोजन और साफ-सफाई जैसी Basic जरूरतों की भी गंभीर समस्या है। Mid-Day Meal मिलने के बावजूद बाकी समय के भोजन और पोषण की समस्या बनी रहती है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि कुछ बड़े बच्चों पर छोटे भाई-बहनों के लिए खाना बनाने और उनकी देखभाल की जिम्मेदारी भी आ जाती है। माता-पिता की आर्थिक मजबूरी में कई बार “रोटी पहले, शिक्षा बाद में” हो जाती है और बच्चे पढ़ाई छोड़कर कोई Skill सीखने या काम करने की ओर चले जाते हैं।

Teacher Rajni Mishra की यह बातचीत बताती है कि सरकारी स्कूल में Teacher की भूमिका सिर्फ पढ़ाने तक सीमित नहीं रह जाती। जब कोई बच्चा भूख, बीमारी या दूसरी परेशानी से जूझ रहा हो, तो Teacher के लिए उसकी सुरक्षा और स्वास्थ्य पहली प्राथमिकता बन जाता है।

यह रिपोर्ट किसी स्कूल या परिवार को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि उन सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को समझने की कोशिश है जिनका असर बच्चों की Education और उनके भविष्य पर पड़ रहा है।

क्या सिर्फ स्कूल और Teachers बच्चों की इन समस्याओं का समाधान कर सकते हैं?
क्या शिक्षा से पहले परिवारों के सामने रोटी की मजबूरी खड़ी है?
और क्या ऐसी परिस्थितियों में बच्चों की पढ़ाई को प्रभावित होने से बचाया जा सकता है?

देखिए पूरी Ground Report और अपनी राय Comment में जरूर बताइए।

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Transcript
00:00खाने पीने के लिए बिमारियों की दिक्कत हो जाती है कि उस्वास गोजन नहीं हमके साथ
00:04हम इस्कूल में नमेड़े मिल खिला देंगे जो आएगा बाकी का क्या
00:08कभी-कभी बच्चे सुबह से कुछ नहीं खाके आए रहते हैं और लंच टाइम हुआ नहीं है अभी हमारा गिर
00:13गए बच्चे फेंट हो गए जल्दी जल्दी उन्हें पानी मंगवाओ उनके लिए बिस्किट मंगवाओ ताकि उन्हें कुछ खिलाओ ऐसी इस्थी
00:20भी हो जात
00:36बच्चे ंगे साथैमिंधे संगार्ण जामरिट ओवी खेंचे अउ समय से अना विद्यालर क्योंकि पेरेंस नंकी घर पर नहीं है उनकल
00:53की जम्मेदारी है कि वह जम्मेदारी है वह खिलाओ आए नहीं हमारे आये
00:59कभी-कभी पैरंट्स चले गए हैं तो बच्चे ऐसे ही चले आए बाल भी नहीं बने हुए हैं मुह भी
01:05नहीं दुला हुआ है तो हमारे टीचर्स उसको देखते हैं फिर उसे धुलवाते हैं कि जाओ तुम अपना बाल ठीक
01:10करके आओ साफ करके आओ अपने आपको क्लास में ब
01:28में प्लिगास बहुत है कि यह बहुत साफ सफाई के साथ नहीं आ पाते कि पीने
01:37के लिए पानी तो खरीच सकते हैं कि सारी चीजों के लिए पानी कैसे खाने पीने के लिए बीमारी यो
01:43की दिक्कत हो जाती है कि उस्वास बोजन नहीं हमके साथ हम इसकूल में न मिड़े मिल खिला देंगे जो
01:48आएगा बाकी का क्या साम क्या क्या है वो तो उनके पैरेंट्स �
01:53जैसा कमाएंगे वह सक्लाएंगे वो भीमार भी बहुत होते हैं हम रोतते उत्सक्रायningar को बारे में करता दिये ले Oklahoma
02:15नेतेों मस्ट्रावbn के लगद है
02:30तो यह जो चैलेंज है यह हम सब टीचर ही फेस करते हैं कभी-कभी बच्चे सुबह से कुछ नहीं
02:36खाके आए रहते हैं और लंच टाइम हुआ नहीं है अभी हमारा गिर गए बच्चे फेंट हो गए जल्दी जल्दी
02:41उन्हें पानी मंगवाओ उनके लिए बिस्किट मंगवा
02:53हैं तो खाके आएंगे नहीं बनाया तो चलो झोल्व ठीक है तो लंच टो टाइम टाइम पे होगा ना यहाँ
02:58पर मजदूर एक असली सम्स्या
03:23क्या करेंगे हम जागरूख होते हैं हम अपने बच्चों के क्लास सीचर को इनफॉर्म करते हैं हमारे बेटी को आज
03:30बुखार था इस बात का ध्यान रखा जाए या उसका एक्जाम खतम हो जाए तो हमें बुला लिया जाए हम
03:35उसे लेने आएंगे यहां पैरेंट्स कुछ नह
03:50प्रुद्धान करने का है चोटी मोटी दवाओ की जरुवत पड़े तो वह वी हम टीचर स्मंगवा लेते हैं या पर
03:55खाने के रूप में मिद्धे मिल देते हैं जोगा यहां पर हम लोग कैसमें कोई रोल नहीं रखता है चलिए
04:15दनवाद आपना आपने यहां के अलावा भ
04:19बच्चों की समाजिक समस्या को जो आपने अब्जर्ब किया है तीचर यहां की बात कर सकती है वह बहुत महपूर
04:31है और टीचर ऐसे एकर समझ ले तो यह संदेश है मदद की जा सकती है आप अपने हद में
04:36हैं लेकिन सरकार के और विबस्ता की जा सकती है
04:39मुझे लगता है ना कि हमारे जो भी हमारे बेसिक डिपार्डमेंट का जो भी टीचर है वो हर बात को
04:47समझ रहा है और अपने अस्तर पर हल भी कर रहा है लेकिन जब उसकी इन समस्याओं का एक ही
04:53जवाब उसको दिया जाता है मैडम काम तो करना पड़ेगा काम तो आप कर रही
05:08कि वो कैसे होश में आएगा उसे किस चीज की अभी सरो हो जाता है नहीं आइगा लेकिन होता था
05:16सकता है और उसका रिजन होता है जनरली भूग पहला को शन भूचन होता है टीचर्स का ऑना यह कुछ
05:25खा क्या क्या है और?
05:33कभी कभी जो बड़े बच्चे हैं उनके ऊपर ही खाना बनाने की जिम्मेदारी है
05:38जो बनाएंगे तो अपने चोटे भाई बहनों के लिए बिबे में बंद कर लेंगे कुछ और अपने भी आ जाएंगे
05:45कभी कोई भाई बेहन बिमार पड़ गया उनका तो पेरेंट्स नहीं रुख सकते इसलिए वो रुख जाते हैं लेकिन जब
06:05बच्चा अपने हाथ पेर से थोड़ा स्ट्रांग होता है
06:08पेरेंट्स को यह लगता है कि इस से हमें मिल क्या रहा है, मिलेगा क्या
06:13तो चलो भाई तुम्हें काम सीख लो, एक स्किल सीख लो
06:17अब तुम करने पे आजागे
06:18पढ़ाई छूट जागे
06:19पढ़ाई छूट
06:21मोटीवेट करते ही रहते हैं लेकिन वह उता नहीं है
06:25बिल्कॉट
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