00:00लिसमें एक भिजले किर्टपर �喜歡 अब अपने आपती है कar भी हिताया कीगें तो आपये होगे है।
00:17कि तो खीमे एक भी में आप इनले को अब नहीं है।
00:25तो यह एक होती है हमारी death instinct, एक होती है life instinct, हर इंसान में जीने की इचा और
00:31मरने की इचा होती है, तो जब ऐसी situation आती है, especially डर का समय आता है, तो हमारा survival
00:37instinct जिसे बोलते है activate हो जाता है, तो जब survival जिसे हमारे सामने शेर आ गया, तो हमें पहले
00:45ही मिस्फूस होता है कि हमें उससे �
00:47तो उस बचने में हमारा दिवाग काम करना बंद कर देता है, तो ऐसे situation में most of the time
00:54यह हाजसे होते हैं, क्यूंकि हम fight mode में आ गये हैं कि मुझे अब अपने आपको बचाना है, और
01:01वो mass level पर होना है, और देखिए, जब भी ऐसी चीज़े होती है, तो हमारे यहां ऐसे भी लोग
01:07होते हैं, जो मौके का फाइदा उठाते हैं, चाहे वो जन संक्या समाज में 10% ऐसे लोग होंगे, जो
01:12की anti-social traits वाले हो, जिने लोगों को hurt करके, sadistic personality, नुकसान करके, मज़ा आता है, और जिने
01:20लगता है कि जब तक कोई scene create ना हो, और ऐसा कुछ नहीं होगा, तो highlight नहीं होगा
01:25तो ऐसी चीज़े कहीं न कहीं हमें समझना पड़ेगा, और fair psychosis कि डर का, डर में हमें क्या होता
01:32है, हम कंट्रोल चाते हैं, हमें अपने आपको protect करना होता है, और उसी डर की वज़ा से, क्योंकि हम
01:38anxious feel करते हैं कि future में क्या होगा, future में कहीं हम अपने आपको खोतों नहीं दें
01:55वह भगवान करेगा, तो उस वक्त भी उनको यह नहीं लगता कि अब मुझे भगवान बचाएगा, उनको यह लगता है,
02:02अब मैं अपने आपको बचा सकता हूं, और मैं जितना best करूं, क्योंकि हम जब survival mode में most of
02:07the time आते हैं, तो हमारा दो ही instinct काम करती है, fight, love flight, majority of time, फिर हम
02:13freeze
02:13or other stages में आते हैं, जो कि fear की होती है, depend करता है situation to situation पर, हम
02:20कौन सी situations में हैं, जिसमें हम freeze mode में चले जाएगे और flop mode में चले जाएगे, और इस
02:25particular situation में जो लोग है, majority of time, flight mode में ही जाते हैं, क्योंकि मुझे अपने आपको बचाना
02:32है, बिल्कुल, आपने बताया कि हमें क्या नहीं �
02:36एक और इसका जो दूसरा पक्ष है कि आखिर हम करें क्या, कोई भी हम में से आप, मैं या
02:40कोई भी इस तरह की भगदड़ का शिकार हो सकता है, तो भीड में सबसे पहला, अगर हम कोई उपाए
02:46कह लीजिए, सबसे पहला solution की तरह अगर दिमाग लगाएं, तो क्या हो सकता है?
02:50देखिये, सबसे पहले कि अगर ये खबर आई है, तो हम उस खबर को कितना सही मानते हैं, और एक
02:57इनसान कह रहा है, ये हमारे समाज का ये है कि हम किसी भी information को double check नहीं करते
03:05हैं, वो double check करना बहुत जरूरी है, अगर हम double check करेंगे दुसरा situations जो है, वो बहुत release
03:13हो सकती है, जैस
03:17जैसे spread होती है, बिना उसकी acknowledgement किये कि वो सही है या गलत है, अगर आपको किसी रिष्टेदार ने,
03:24किसी दोस्त ने कोई बात की है, तो हमारा दिमाग पहले वो information को collect नहीं करता कि ये हुई
03:29है, सीधा ही survival mode में चला जाता है, इसी को हम emotional regulation बोलते हैं, हमारा खुद पर कितना
03:37control है
03:38अगर ऐसी situation में कुछ हुआ है, तो हमने पहले अपने आपको comfort कराना है, कि अगर ऐसा, अगर कोई
03:45महाल में हो गया है, तो जतना हम सही हम रखेंगे, उतना ही situation से बाहर जल्दी निकल पाएंगे, और
03:51अराम से निकल पाएंगे, क्योंकि self awareness कम है, self awareness का मतलब है, मेरे behavior का दूस
04:08near about 15, 10 से 15 परसंट लोग है, जिने ये समझ में आता है, मैं क्या चाहता हूँ, और
04:16मेरे behavior का दूसरों पर क्या आसर पड़ेगा, और अगर मुझे कोई बात कहीं जा रही है, तो मैं उसे
04:23feedback में तोर पर लूँ, नहीं लूँ, और मुझे किसी बात को सुन कर react नहीं करना है, respond कर
04:34कि जब हम किसी cutting समस्या में या stress की situation में आते हूं, तो हमें सयम रखता है, और
04:42वो control हमारे हाथ में है, environment हमें जिसे impact करेगा, पर उस environment से हमें impact नहीं होना, उसके
04:51लिए हमें अपने आप पर काम करने की जरूरत है, तो जब mass level पर काम हो रहा है, और
04:56mass level पर problem आ रही है, तो हर इंस
04:59कि अपनी जिम्यदारी बनती है, ऐसी situation पर आकर, सब को ये बोले, कोई भी जो जादा self-aware है,
05:06कि इस वक्त सयम रखना है, अगर ये लोग भाग रहे थे, तो 10-15 लोग या 50 लोग ऐसे
05:13भी होलते, बोल ये भागिये मत, शांती बनाए रखिये, तो शायद उस भीड को control किया ज
05:20सकता, और मैं फिर वही कहूंगी कि हम दूसरों में, जब हम fair की situation में होते हैं, तो religious
05:27places पर भी हम ज्यादा इसी वज़ा से जाते हैं, कि जो मेरे control के बार है, वो परमात्मा पर
05:33faith में तबदील हो, और वो faith से हमें उस problem से निकाले, तो जिस परमात्मा के धर भी वो
05:39आये थे, तो
05:50जिकरा रहे हैं, पर वो faith सोच में है, action में नहीं, बिल्कुल मैं, आपके बात से ही एक सवाल
05:56निकलता है, और एक और चोड़ा सवाल मैं जोड़ूँगा, आपने का कि इस तरह के कोई अफ़वा हाती, जिसकि आज
06:01current वाले तायर का जिकर हुआ, तो instant कई बार होता है कि फोन �
06:06भी नहीं होता, साथ में फोन जमा हो जाते हैं, लॉकर्स में, या लाइन में, भीड में लोग हैं, वहाँ
06:10पर क्या source हो सकता है, चेक करने का, अचानक ख़बर आई, भीड एक तरफ भागना शुरू होती है, और
06:16उसी दिशा में सारे लोग, सारे आपके लिए शरत धालू द
06:33देखा, वहाँ पर तो काफी दूसरी जगए भी थी, लेकिन लोग एक तरफ ही क्यों भागना पसंद करते हैं, वहाँ
06:38पर कोई सुरक्षा का खास हैसास होता है, इस वक्त क्या दिमाग काम कर रहा होता है, देखिए हम सब
06:44अधिकतर लोगों को दूसरों का उपीनियन बहुत
06:47मैटर करता है, और अगर दस लोग एक काम को कर रहे हैं, तो अधिकतर हम यही सोचते हैं, वो
06:53सही कर रहे हैं, और उसी में हमारा दिमाग चलता है, तो हम इंफ्लूएंस बहुत ज़्यादा होते हैं, जहां मास
07:01लेवल है, गिव यू एन एग्जामपल, आज करके जो हमारे इ
07:07देखें, पंद्रा लाग फॉल्वर देखें, बीस लाग फॉल्वर देखें, तो वो इनसान बहुत अच्छा है, बहुत नॉलेजेबल है, पर अगर
07:16किसी जगह पर लोग भीड कम है, तो शायद वो अच्छा नहीं, ऐसा एक बहुत जर्नल एक सोच है, जैसे
07:23आप मुझे ब
07:37इसी हाईवे पर थी, जो हाईवे पर दो साइड़ होती है, एक लेफ और एक राइड जो आने मतलब इस
07:43एक रोड थी, जिस पर दो लाइन थी, एक तरफ जा रहे थे, और अधिक तरह हम देख रहे थे,
07:49ब्लाइंड बहुत लबी दी और एक तरफ लाइक छोटी दी, तो मु
08:07अगे वाली लोग को रोक रही थी, यह मैं सोच रही थी, कि मुझे लाइन से नहीं हतना अगे वाली
08:11लोगों को रोक रही है, 15 मिनट बाद मुझे पता चला, वो इतनी लंबी लाइन जो थी, उसने से आदी
08:17से ज्यादा लाइन तो CNG की थी, जो इतनी लंबी रोड पर थी, �
08:21तो आप समझेए कि इस situation का नहीं पता होता, तभी हमें अपने आपको consciously बोलना है, मैं इस वक्त
08:28क्या महसूस कर रहा हूँ, मुझे डर लग रहा है, अगर मुझे डर लग रहा है, तो मैं इस situation
08:34में मेरे पास क्या options हैं, और मैं कौन सा सही decision ले सकता हूँ,
08:40emotional dysregulation में जो regulation का जो first step होता है, मैं क्या महसूस कर रहा हूँ, मेरे पास क्या
08:48options है, मेरा mind और body एक alignment में है, और मैं right decision हूँ, यह सब उन seconds में
08:56करना होता है, और वो again मैं वही seconds में करने की बात हूँ, यह हर इंसान का conscious decide
09:02करता है, जैसे मुझे cold drink पीनी है के नहीं पीनी है, वो मेरी सह
09:07प्रेक्टिस के लिए नुकसान दायक है, हम ही decide करते हैं, तो cold drink खाने पीने से लेकर है, उसी
09:14तरह जब stress की situation में आते हैं, तो वो भी हमारी conscious choice में हो जाता है, कि मुझे
09:21यह करना है या नहीं करना है, और इसको करने का फाइदा है या नहीं, यह एक दिन में नहीं
09:27आता है, यह
09:28प्रेक्टिस से आता है, अगर हम प्रेक्टिस करेंगे, यह जितने भी लोग यहां शामिल थे, अधिकतर वो कितने पड़े लिखे
09:36लोग थे, अगें, self-awareness का वैसे पड़े लिखे होने से भी कोई नाता नहीं है, बट हम कितना situation
09:44को समझते हैं, और कितना control कर सकते हैं, कई ब
09:58को लोग leadership की position में होते हैं, उनको इसना knowledge नहीं होता, वो बता नहीं पाते हैं.
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