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Fissure Ayurvedic Treatment: गुदा फिशर (एनल फिशर) के आयुर्वेदिक उपचार में कब्ज से राहत, घाव भरना और वात-पित्त दोष को संतुलित करना शामिल है। मुख्य उपायों में गुनगुने पानी से सिट्ज़ बाथ (अवगाह स्वेद), त्रिफला चूर्ण व इसबगोल जैसे फाइबर, और [आयुर्वेदिक मलहम व तेलों (जतिधृत, हरियादि घृत)] का स्थानीय प्रयोग किया जाता है। अधिक पुराने मामलों में क्षार कर्म या बस्ती चिकित्सा भी दी जाती है।Fissure Ayurvedic Treatment: Bina Operation Kaise Theek Kare ?

Ayurvedic treatment for Anal fissures includes relieving constipation, healing wounds, and balancing the Vata and Pitta doshas . Key remedies includeSitz baths (Avagah Sweda) with lukewarm water, fibers such as Triphala powder and Isabgol, and topical application of Ayurvedic ointments and oils (Jatidhrita, Hariyadi Ghrita) are used.In more chronic cases, Kshara Karma or Basti therapy is also given.

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00:03शौच करते समय तेज दर्द, जलन और ताजा खून आना अगर ये परिशानी बार-बार हो रही है तो इसकी
00:09वज़़ एनल फिशर यानि गूदा के पास आई छोटी सी दरार हो सकती है
00:13लेकिन क्या फिशर में ओपरेशन जरूरी है क्या आयरवेद में ऐसी दवाएं हैं जो कब्स और हार्ड स्टूल को किंट्रोल
00:20करके फिशर को हील करने में मदद करेगी
00:23आई ये इस वीडियो में आपको बताते हैं
00:26एनल फिशर अक्सर हार्ड स्टूल, कॉंस्टिपेशन और बाउल मूमेंट के दौरान ज़ादा स्ट्रेन करने की वज़े से होता है
00:33जब हार्ड स्टूल और कैनाल से गुजरता है तो वहां की सेंसिटिव स्किन में छोटी सी टियर हो जाती है
00:39इसमें बाउल मूमेंट के वक्त दर्द होना, जलन होना और खून भी दिखाई देता है
00:44हर फिशर में सर्जरी जरूरी नहीं, खासत दोर पर शुरुवाती फिशर में कॉंस्टिपेशन को कंट्रोल करना होगा
00:53जादा से जादा पानी पीना होगा और फाइबर लेना और लोकल केर से सुधार हो सकता है
00:58आयरवेद में कौन सी दवा इस्तमाल की जाती है? आईए बताते हैं
01:02त्रिफला को आयरवेद में बाउल रेगुलारिटी और डाइजेशन सपोर्ट के लिए इस्तमाल किया जाता है
01:08लेकिन इसकी मात्रा हर्व्यक्ति के कंडिशन और बाउल पैटर्न के मताबिक अलग हो सकती है
01:14इसलिए इसे आयरवेदिक फिजीशन की सला से लेना बहतर रहेगा
01:18रात में सोने से पहले फिजीशन द्वारा बताई गई मात्रा में पानी के साथ आप ले सकते हैं
01:23अगर इससे लूज मोशन या अब्डॉमिनल डिसकमफर्ट है तो इसका इस्तमाल रोक कर डॉक्टर से बात करें
01:29हरितकी
01:30हरितकी को भी आयरवेद में कॉंस्टिपेशन और बाउल रेगुलेशन के लिए इस्तमाल करते हैं
01:36लेकिन इसे त्रिफला के साथ या अलग से लेना है या नहीं ये पेशन की कंडिशन देखकर तै किया जाएगा
01:42इसकी एग्जाक्ट डोज और फ्रेक्वेंसी आयरवेड डॉक्टर से तै करवाएं
01:47क्यूंकि हर व्यक्ति में कॉंस्टिपेशन की सिवीरेटी और बोडी रिस्पॉंस अलग होते हैं
01:54इसब गोल
01:54फिशर में सबसे जरूरी चीजों में से एक है स्टूल को सॉफ्ट करना
01:58इसके लिए फाइबर सप्लिमेंट जैसे इसब गोल का इस्तमाल करते हैं
02:03इसे आमतोर पर परियाप्त पानी के साथ लिया जाता है
02:06लेकिन फाइबर लेने के साथ पानी कम पीने पर कॉंस्टिपेशन और ब्लोटिंग की परशानी बढ़ती है
02:12इस सब गोल की मात्रा भी पेशेंट की जरूरत के अनुसार तै करनी चाहिए
02:16अगर पेशेंट को swallowing problem, bowel obstruction का suspicion या कोई दूसरी medical condition है तो बिना medical advice के
02:25इसे ना ले
02:26फिशर में local discomfort कम करने के लिए आयरवेद में कुछ medicated oils और local preparation का इस्तमाल किया जाता
02:34है
02:34लेकिन इन्हें फिशर के अंदर या खुले घाव पर खुद से लगाना सही नहीं है
02:38एक्सपर्ट से proper examination के बाद ही ये तैह होना चाहिए कि कौन सा preparation suitable है और कितनी मात्रा
02:45में आपको इस्तमाल करना चाहिए
02:47इसके अलावा 6 बाद भी मददकार है
02:50गुनगुने पानी में दिन भर में 3-4 बार 10-15 मिनट बैटना खासकर bowel movement के बाद anal muscles
02:57को राहत देता है
03:00अपने डाइट में हरी सबजियां, सीजनल fruits, oats और grains, दाल, परियाप्त मात्रा में पानी जरूर शामल करें
03:08फिलहाल असे वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
03:11साथी चानल को सब्सक्राइब करना ना भूलें
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