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Hariyali Amavasya Vrat Katha 2026: सावन मास की अमावस्या तिथि का विशेष महत्व है और इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती के साथ पीपल की पूजा करने का भी विधान है। मान्यता है कि अमावस्या के दिन पीपल की पूजा करने के बाद कथा सुनने व पढ़ने मात्र से जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख समृद्धि आती है। इस वीडियो में आप हरियाली अमावस्या का पाठ पढ़ व सुन सकते हैं।Hariyali Amavasya Vrat Katha 2026: Hariyali Amavasya Kyu Manayi Jati Hai ?

The Amavasya date of the month of Sawan holds special significance, and on this day, it is customary to worship the Peepal tree along with Lord Shiva and Goddess Parvati. It is believed that simply listening to and reading the story after worshipping the Peepal tree on Amavasya removes all life's troubles and brings happiness and prosperity. In this video, you can read and listen to the Hariyali Amavasya recitation.

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Transcript
00:28एक समय की बात है।
00:32पुष दिनों के बाद महल में कुछ महमान आये।
00:36चूहों ने सोचा कि ये अच्छा मौका है।
00:41बदला लेने के लिए चूहों ने बभू की साड़ी चुराई और उसे जाकर अधिती के कम्रे में रख दी।
00:46जब सुबा सेव को और अन्य लोगों ने उस साड़ी को वहां पर देखा तो लोग राजा की बहु के
00:51चरत्र के बारे में बात करने लगे।
00:53ये बात जंगल में आँग की तरफ पूरे गाउं में फैल गई। जब ये बात राजा के कानों तक पहुँची
00:59तो उसने अपनी पुत्रवधू के चरत्र पर शक करते हुए उसे महल से ही निकाल दिया।
01:23दिपक जलाया करती थी। तस दोरान उनका ध्यान उस पेड के आसपास जगमगाती रोश्नी पर गया। राजा इसे देखकर चकित
01:31रह गया।
01:32महल में वापस आने के बाद उन्होंने अपने सैनिकों से उस रोश्नी के रहस्य का पता लगाने के लिए कहा।
01:38सैनिक राजा की बात मान कर उस पेड के पास चले गए। वहाँ पर उन्होंने देखा कि दीपक आपस में
01:44बात कर रहे थे।
01:45सभी दीपक अपनी अपनी कहानी बता रहे थे। तभी एक दीपक बोला मैं राजा के महल से हूँ।
01:50महल से निकाले जाने के बाद राजा की पत्रवधू रोज मेरी पूजा करती हैं और मुझे प्रज्वलित करती हैं।
01:56अन्य दीपकों ने उससे पूछा कि राजा की बहु को महल से क्यों निकाला गया। तो उसने पूरी कहानी बताई।
02:03ये सब सुनकर सैनिक भी हैरान रहे गये और महल वापस आकर उन्होंने राजा को वही कहानी सुनाई।
02:09ये सुनकर राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपनी पुत्रवधू को महल में वापस बुला लिया।
02:14इस तरह पीपल के पेड़ की नियमित पूजा करने का फल राजा की बहु को मिला और वो अपना जीवन
02:21आराम से बिताने लगी।
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