00:00आज आएं बगेर किसी तमहीद के सीधा उस तफसीली जाइजे की तरफ चलते हैं।
00:03आज हम N.E.D. University के Heritage Cell की जानब से 2018 में की गई एक जबरदस कोशिश पर
00:09बात करेंगे।
00:10यानी कराची के तारीखी फ्रेयर हाल की जामे तामिराती दस्तावेस साजी।
00:14ये कोई आम सी रिपोर्ट नहीं है, बलके एक पूरी की पूरी तारीखी इमारत को कागज और डिजिटल शकल में
00:20हमेशा के लिए महफूज करने का एक खेर मामूली काम है।
00:23जरा इस तस्वीर को देखें, क्या कमाल का विनीशियन गौथिक तरजित आमीर है, है ना, ये नोकीले मिनार, वो सुर्ख
00:31छटें और इसका वो अजीम और शान बेरूनी हिस्सा, सब मिलकर कितनी हैरत अंगेज कशिश पैदा करते हैं।
00:39कराची के बिलकुल बीचो बीच खड़ा ये शाकार, वाकई अपने अंदर सदियों की तारीख समेठे वे है।
00:45और इस काम के स्केल को समझने के लिए हम एक बहुती दिल्चस सफर तै करेंगे।
00:49हम आर्काइविंग के अमल से शुरू करके इमारत के शांदार बेरूनी हिस्से, इसके अंदरूनी ढाचे, पेचीदा तामीराती तफसीलात और फिर
00:56सीधा हॉल के अंदर के शांदार मनाजर तक का जायज अलेंगे।
00:59तो चलें सबसे पहले ये देखते हैं कि फ्रेयर हॉल को आर्काइव करने के इस मुनज़म और इतने बड़े काम
01:05की शुरुआत आखिर हुई कैसे?
01:06देखें, ये कोई ऐसा काम तो था नहीं कि बस गए और चंद तस्वीरें खेंच लाए।
01:36इमारत के शांदार बेरूनी हिस्से और उसके फने तामिराती जादू की तरफ आते हैं।
02:06जावर्स का कोई रुख भी छूटने ना पाए।
02:08हर जाविये से इस इमारत की शान और शौकत को हमेशा के लिए महफूस कर लिया गया है।
02:13बैरूनी खौल तो हमने देख लिया, अब जरह इसके अंदरूनी साखती धांचे यानि इमारत की एनॉटमी की तरफ चलते हैं।
02:21यहां समझने वाली सबसे एहम बात यह है कि इस दस्तावेज में अमूदी जगा को किस तरह तक्सीम किया गया
02:27है।
03:11अब आते हैं इन पेचीदा तामीराती तफसीलात की तरफ जहां यह सारा काम एक जुनूनी हद तक बारीक यानि माइक्रो
03:19लेवल पर पहुंच जाता है।
03:21यह आर्काइव सिर्फ दीवारों और फर्शों तक ही महदूद नहीं है बलकि महराबों के बिलकुल दुरस्त प्रोफाइल्स को कैटलॉग किया
03:26गया है और दर्वाजों और खिड़कियों के लिए चार अलग-अलग हिस्से रखे गये हैं।
03:30और हैरत की बात यह है कि इन तफसीलात को थ्री ओवर एट इंच तक के पैमाने पर रिकॉर्ड किया
03:35गया है।
03:36मतलब इस दौर के कारीगरों ने लकड़ी और पत्तर के काम में जो कमाल किया था उसे बिलकुल इसी नफासत
03:42से महफूस किया गया है।
03:43और आखिर में आई-एस हॉल के अंदर कदम रखते हैं और इसके हकी फनी कमाल को महसूस करते हैं।
03:49यहां जो चीज मुझे सबसे ज्यादा मुतासिर करती है वो यह है कि तस्वीरी दस्ताविजात इन खुश्क तक्नीकी आदादो शुमार
03:56में कैसे जान डाल देती हैं।
03:57यह तस्वीरें उन शांदार पेंट की गई जटों के मूरल्स और लक्री की परशिको सीडियों के मनाजिर पेश करती हैं।
04:03नक्षों की वो सीधी साधी लकीरें यहां आके शोख रंगों और कमाल की फनकारी में बदल जाती हैं।
04:09अच्छा, एक और बहुत दिल्चस पहलू ये भी है कि इस पूरे बसरी तहफुस को पाकिस्तानी कॉपिराइट कानून की मुकमल
04:15हमायत हासल है।
04:16कानून बिलकुल वाज़े तोर पर ये जाज़त देता है कि जो तामिराती और फनकाराना काम मुस्तकिल तोर पर अवामी मकामात
04:21पर मौझूद हैं, उनकी तस्वीरी अक्सबंदी की जा सकती है।
04:24और सची बात तो ये है कि इसी कानूनी आज़ादी की वज़ा से ही इस तरह के अजीम काम मुम्किन
04:29हो पाते हैं ताकि विरासत सब की पहुँश में रहे।
04:32तो सोचिए, 128 इंच के साइट प्लान से लेकर शोख रंगों से सजी हुई छटों तक हर एक चीज़ को
04:38कानूनी दाइरे में रहते हुए इतनी बारीक बीनी से महफूज कर लिया गया है।
05:02तरह करना महस कोई तामीराती मश्क नहीं रही बलके ये आने वाली नसलों के लिए हमारी एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी
05:07बन चुकी है। क्यों? क्योंके अगर कल को इमारतें वक्त के साथ बदल भी जाएं या खुदाना खास्ता मिट जाएं
05:12तो क्या उनका ये डिजिट
05:14नक्ष हमेशा के लिए हमारी तारीख को जिन्दा नहीं रखेगा? जरूर सोचिएगा।
Comments