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Datia Bypoll Narottam Mishra Ticket Cut: मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए बीजेपी ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर सबको चौंका दिया है। उनकी जगह संगठन के पुराने चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारने के बाद दतिया की सड़कों पर भारी बवाल और हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।

मध्य प्रदेश की राजनीति (MP Politics) से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर दतिया उपचुनाव को लेकर आ रही है। बीजेपी आलाकमान ने पूर्व गृह मंत्री और क्षेत्र के कद्दावर नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा (Dr Narottam Mishra) की जगह एक चौंकाने वाला नाम तय करते हुए आशुतोष तिवारी (Ashutosh Tiwari) को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस फैसले के सार्वजनिक होते ही दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों का गुस्सा फूट पड़ा। सड़कों पर चक्काजाम, नारेबाजी और पथराव की खबरें सामने आई हैं, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। हालात को काबू में करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा है।

राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर मध्य प्रदेश बीजेपी के सबसे आक्रामक और प्रभावशाली चेहरों में शुमार नरोत्तम मिश्रा का टिकट क्यों काटा गया? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद राज्य में सत्ता का समीकरण बदल चुका है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (CM Mohan Yadav) के नेतृत्व में बीजेपी अब राज्य में एक साथ कई बड़े शक्ति केंद्र खड़े होने देना नहीं चाहती। इसके अलावा, आशुतोष तिवारी की पृष्ठभूमि विद्यार्थी परिषद (ABVP) और आरएसएस (RSS) के कैडर से जुड़ी रही है, जिससे यह साफ संदेश मिलता है कि संगठन में व्यक्ति से ऊपर वैचारिक निष्ठा और जमीनी कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है।


About the Story:
A major political storm has erupted in Madhya Pradesh after the BJP denied a ticket to former Home Minister Dr. Narottam Mishra for the upcoming Datia assembly by-poll, naming organization loyalist Ashutosh Tiwari instead. The announcement triggered violent protests, stone-pelting, and road blockades by Mishra's disgruntled supporters. Political analysts suggest this bold move reflects the BJP and RSS's broader strategy under CM Mohan Yadav to promote second-generation leadership, break established power centers, and prioritize organizational devotion over individual political stature.

#NarottamMishra #DatiaBypoll #MPPolitics #MohanYadav

~PR.514~HT.408~ED.106~GR.538~VG.HM~

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Transcript
00:00क्या दतिया में नरोत्तम मिश्रा का टिकेट काट कर बीजेपी ने सिफ उमिद्वार बदला है या फिर मध्य प्रदेश की
00:06राजुनीती में ताकत का नाया समिकरन लिख दिया गया है
00:08क्या संगठर ने सत्ता से बड़ा संदेश दिया है क्या मध्य प्रदेश बीजेपी में अब फैसलों पर RSS का प्रभाव
00:14पहले से ज्यादा दिखाई दे रहा है
00:16और सबसे बड़ा सवाल नरोतम मिश्रा को दतिया में आखर क्यों नहीं मिला टिकेट
00:31मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट उपर होने वाला उप्चुनाव अब सिर्फ एक चुनाव नहीं रहे गया है
00:36ये बीजेपी के अंदर ने तृत्व, संगठन, सत्ता संतुलन और भविश्य की राजनीती की सबसे बड़ी परीप्षा बन चुका है
00:43बीजेपी ने जब पुर्व ग्रिह मंत्री और दतिया से कई बार विधायक रह चुके, डॉक्टर नरोत्ता मिश्रा की जगे संगठन
00:49से जुड़े नेता, आशुतोष तिवारी को उमिद्वार घोशित किया, तो इसका विरोध पार्टी कार्याले से लेकर सड़कों तक प
01:10सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि कभी मध्यप्रदेश बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाने वाले
01:17नरोत्तम मिश्रा को टिकेट नहीं मिला, क्या ये केवल चुनाव जीतने का फैसला था या फिर पार्टी के भीतर शक्ती
01:23संगुलन मनाये र
01:38विधान सभा में आकरामक शैली, विपक्ष पर तीखे हमले और पाटी नेतरत्य के भरोसेमंद चेहरे के रूप में उन्होंने अपनी
01:46अलग पहचान बनाई
01:47लेकिन 2023 के विधान सभा चुनाओं में उनकी हार ने राजनितिक सम्मिकरण बदल दिये
01:52इसके बाद माना जा रहा था कि दत्या उप्चुनाओं उनके लिए वापसी का सबसे बड़ा अवसर होका
01:58पिछले कई महीनों से वेरगतार छेतर में सक्रिया थे
02:01अलग-अलग समाजों के बीच बैठ के कर रहे थे, पुराने कारेकरताओं को जोड़ रहे थे, समाजिक सम्मिकरण सादने की
02:07कोशिश कर रहे थे
02:08स्थानिय स्तर पर लगभगिये धारना बन चुकी थी कि टिकेट उन्हें ही मिलेगा
02:12बताया जा रहा है कि उन्होंने नामांकर की तयारी भी शुरू कर दी थी, फॉर्म भी खरीद लिया था
02:17लेकिन अंतिम समय में पार्टी ने आशुतो उश्तिवारी के नाम पर मोहर लगा दी
02:20यहीं से राजनितिक चर्चाओं का दोर शुरू हो गया
02:23पीजीपी के भीतर कई नेताओं का मानना है कि यह फैसला किवल उमिद्वार बदलने का नहीं
02:27बल्कि भविशे की राजनिती तय करने का फैसला था
02:30राजनितिक विशलेशकों का कहरा है कि यदि नरुत्तम विश्राव चुनाव जीत कर विधार सभलोटते
02:34तो वो फिर से राजनिती में एक मजबूत शक्ति का केंद्र बन सकते थे
02:38मौजूदा समय में मुख्यमंतरी मोहन यादव अपनी राजनितिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे है
02:43ऐसे में पार्टी शायद एक साथ कई बड़े शक्ति केंद्र नहीं चाहती
02:47इसी वजह से संगठन ने ऐसा चेहरा चुना जो संगठन के प्रती पूरी तरह समर्पित माना जाता है
02:52यहीं से चर्चा RSS की भूमिका तक पहुँचती है
02:55ध्यान देने वाली बात यह है कि BJP ने जिस आशुतोष तिवारी को मदवार बनाया है
03:00उनकी पहचान चुनावी राजनीती से ज्यादा संगठन के कार्यकरता की रही
03:04उन्होंने लंबे समय तक विद्यार्थी परिशद और BJP संगठन में काम किया है
03:09वे बूत स्तर से लेकर संगठन की विभन जिम्मदारिया निभाते रही है
03:12राजनीतीक गल्यारों में यही चर्चा है कि संगठन आधारित नेताओं को प्राथमिक्ता देने की सोच
03:19RSS की कार्यशाली से मेल खाती है
03:21हालाकि ये सपष्ट कर देना जरूरी है कि BJP ये RSS ने आधिकारी क्रूप से कहीं भी ये नहीं कहा
03:27कि टिकेट वितरण में RSS ने कोई सीधा निदेश दिया था
03:31लेकिन राजनीतीक विशलेशक ये जरूर कहते हैं कि मध्यप्रदेश BJP में संगठन और वैचारेक प्रिष्ट भूमी वाले नेताओं की भूमी
03:38का लगतार मजबूत होती दिखाई दे रही है
03:41दरसल RSS की कारेप्रणाली हमेशा व्यक्ति से ज्यादा संगठन को महत्व देने की रही है
03:46संग का मूल सिधान्त यही माना जाता है कि संगठन सर्वोपरी है और कोई भी व्यक्ति संगठन से बड़ा नहीं
03:54हो सकता
03:54इसी सोच को देखते हुए राश्रितिक जानकारस फैसले को संगठन की प्राथमित्ता के रूप में देख रहे है
04:00दूसरी तरफ ये भी कहा जा रहा है कि BJP अब हविश्य की दूसरी प्रीवी तयार करने में जुटी हुई
04:05है
04:06कई राज्यों में पाटी नए चेहरों को मौका दे रही है ताकि आने वाले वर्षों में नितरत्व का संक्रमन सहस
04:13तरीके से हो सके
04:14दत्या में आशुतोष तिवारी का चयन भी उसी रणिती का हिस्सा माना जा रहा है
04:18लेकिन क्या केवल संगठनात्मक निष्टा ही वजहती राज्योतिक विश्री शकों का कहना है कि चुनावी गणित भी उतना ही महतोपून
04:25है
04:26दत्या में ब्रामहन, अनुसुचित जाती, कुश्वाह, यादव, ठाकुर वैश्य और अन्य पिछड़ा वर्ग के मदाता चुनावी परिनाम तै करने में
04:34बड़ी भूमी का निभाते है
04:35बीजेपी ने बचले कुछ समय में संगठन में भी बड़े बदलाव किये हैं
04:39विभिन समाजों को प्रतिनी धित्व देने की कोशिश की गई है, ताकि किसी एक नेता पर पूरी चुनावी रणेती निर्भर
04:45ना रहे
04:46इसी कारण पार्टी को भरोसा है कि मजबूत संगठन और सामाजिक समिकरनों के सहारे चुनाव जीता जा सकता है
04:52तो अब सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या नरोत्तम मिश्टा की सक्रियता ही उनके खिलाफ चली गई
04:58कुछ राजजितिक विश्रेक्षकों का और परियुक्षकों का मानना है कि पछले कई महीनों से जिस तरह उनके समर्थकों ने टिकेट
05:05लगभकते मान लिया था
05:06उससे पार्टी नेतर तो अलग संदेश देना चाहता था
05:09विजेपी पहले भी कई बार ऐसे फैसले ले चुकी है जहां अंतिम समय में उमिद्वार बदल लिये गए
05:15पार्टी का संदेश अकसर यही रहा कि अंतिम निर्ने केवल केंद्रिया नेतर्तो और संगठन का होता है
05:21तो अब बात करते हैं विरोध प्रदर्शन की
05:23टिकिट की घोष्णा के बाद जिस तरह समर्थकों ने प्रदर्शन किया, सड़के, जाम की और हिंसक घटनाये सामने आई
05:29उसने पार्टी नेतरतो के चिंता जरूर बढ़ा दी
05:32खुद नरोत्तम मिश्टा ने सारवजनी की रूप से अपने समर्थकों से शान्ती बनाये रखने की अपील की
05:38उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की आगजनी या हिंसा स्विकार नहीं है
05:42और कारकरताओं को अपनी बात पार्टी फोरम में रखने चाहिए
05:47ये बयान भी बताता है कि वे पार्टी अनुशासन बनाये रखना चाहते हैं
05:51अब सबसे बड़ा राजनीतिक सवाथ
05:53क्या इससे नरोत्तम मिश्टा का राजनीतिक भविशा खत्म हो गया है
05:56राजनीति में शायद ही कभी किसी नेता का भविशे एक फैसले से तय होता है
06:01बीजेपी में कई ऐसे उदाहरन हैं जोहां नेताओं को कुछ समय तक संगठनात्मक जिम्मदारिया दी गई
06:06और बाद में बड़ी वापसी भी हुई
06:09इसलिए ये कहना जल्दबाजी होगी कि नरोतम मिश्रा की सक्रिय राजनीति समाथ हो गई है
06:14हलाके इतना जरूर है कि फिलहाल पार्टी ने सपश्ट संदेश दिया है कि टिकिट का फैसला केवल पुराने राजनीतिक कद
06:21के आधार पर नहीं होगा
06:22संगठन, रणीति, स्तामाजिक समीकरण और भविशकी राजनीति और उसकी जरूरते भी उतनी ही महत्वपूर्ण है
06:29जहां तक RSS के प्रभाव की बात है
06:31राजनीतिक विशलेशकों की राय अलग है
06:33कुछ का मानना है कि मध्यप्रदेश BJP में संगठन की भूमी का पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई
06:39दूसरे विशलेशक इसे पूरी तरह BJP नेतरत्व का राजनीतिक निर्णे वदाते हैं
06:44और कहते हैं कि हर संगठनात्मक फैसले को सिध्य RSS से जोड़ना उचित नहीं होगा
06:49सच्चाई शायद इन दोनों के बीच कहीं और मौजूत है
06:53BJP और RSS का वैचारिक रिष्टा दशकों पुराना है
06:57चुनावी रणी की संगठन नर्मान और कारेकरता तयार करने में संग की भूमी का हमीशा महत्तोपूर्ण रही है
07:04लेकिन उमेद्वार चैन का अंतिम अधिकार BJP के संगठन और संसधिय बोड के पास ही होता है
07:09इसलिए बिना आधिकारिक पुष्टी के ये कहना कि टिकेट केवल RSS के कहने पर काटा गया तथ्यात्मक रूप से सही
07:16नहीं होगा
07:17लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि दतिया का फैसला संगठन को प्राथमिक्ता देने वाला फैसला माना जा रहा
07:23है
07:23और इसी वज़े से राजनितिक गल्यारों में RSS की कारेशैली को लेकर चर्चाएं तेज हैं
07:28अब सबकी नजर उपचुनाव के नतीजों पर होगी
07:31अगर बीजेपी आशुतोष तिवारी के साथ जीत दर्ज करती है
07:34तो ये संगठन आधारित राजनिति की बड़ी जीत मानी जाएगी
07:38लेकिन यदि परिणाम उमीद के मताबिक नहीं आते
07:41तो नरुत्तम मिश्रा को टिकट न देने का फैसला
07:44लंबे समय तक राजनितिक बहस का विशे बना रहेगा
07:47फिलहाल इतना तय है कि दतिया का उप चुनाव के वलेक विधान सभा सीट का चुनाव नहीं रहे गया है
07:52ये मध्यप्रदेश बीजेपी के भीतर बदलते ने तृत्व, संगठन की ताकत, भविशे की रणीती और सत्ता संतुलन का सबसे बड़ा
08:00राजनितिक संगेत बन चुका है
08:01तो अब देखना दल्चस्प होगा कि उजनता किसे चुनती है और ये फैसला आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश की राजनीती
08:07की दिशा किस तरह से तैय करता है
08:10इस ख़बर में इतना ही इस से जुड़ी जो भी नहीं जानकारिया आएंगे उनके लिए देखते रहिए One India है

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