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  • 4 hours ago
जहां थर-थर कांपती हैं नकरतकमक शक्तियां, देखें मेहंदीपुर बालाजी धाम की अद्भुत आस्था

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00:10जागर जे अनुमान जान गुनसागर जे कपिस्ति हुलो को जागर
00:32जागर जे अनुमान जान गुनसागर जे कपिस्ति हुलो को जे रहे
00:44जाम दूत अकुलत वलधामा अंजन निकुत रचएन सुचनामा
00:59जागर जागर जे अनुमान गुनसागर जे कपिस्ति हुलो को जागर
01:20जे अनुमान जान गुनसागर जे रहे कपिस्ति हुलो को जागर
01:27जागर जे रहे
01:39आप मंदर दर्शन करने जाते हुँगे तो घर पर सबके लिए वहाँ से प्रसाद लेकर आते हुँगे
01:45पर आज हम आपको एक ऐसे सिद्ध धाम लिए चलेंगे जहां से प्रसाद बाहर लाना मना है
01:51आम तोर पर आप मंदर से निकल कर एक बार पीछे देखकर फेर ईश्वर को प्रणाम करते होंगे
01:56पर आज हम आपको एक ऐसे मंदर लिए चलेंगे जहां पलट कर देखना मना है
02:01यहां की हर रीती अध्भूत है हर मान्यता अविश्वस्निय है यहां की महिमा और कल्पनिय है
02:09नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आज चलिए हमारे साथ राजिस्थान के दोसा जिले के श्री महनिपूर बालाजी धाम
02:31कर दोसे प्राजिस्थान की राजिस्थान के दोसे बाबा के सरन में आये हैं पालाजी के तब से बहुत तराम के
02:50नमारे बच्ची
02:54अध्या ऐसा जगह है कि आपका हर एक एक चीज जो काम नहीं बनेगा यहां पर बन जाएगा
02:58यहां आने के बाद में यहां के बातवन में ही ऐसी पोजिटिविटी है कि यहां आके लोग ओटोमेटिकी सही हो
03:05जाते हैं
03:11यहां पर किसी को कुछ किया कराया हो कुछ है यहां पर सब आके सब वादाएं बिगन दूर हो जाती
03:18है
03:20आप खुद देहो ना ये तो एक तरह से बाबागी कचेरी है
03:26मैंने जो फर्स टाइम एंट्री करी थी तो मुझे इस धर्टी पर पैर रखता ही
03:29मुझे पता लगने लग जया था कि बाबा साक्षाद यहां पर है
03:35यहां पर पीछे मुण के न देखना और शाद न खाना
03:52एक मंदिर जहां लगती है भूतों की अदाला
04:07एक धाम जहां तालों में कैद कर दी जाती हैं बुरी शक्तियों की परच्छाईयां
04:23एक आस्था जहां हर चीख के पीछे छिपी होती है एक उम्मीद
04:36अद्भुत हैं यहां के मानिताएं
04:50अविश्वस्नी है शद्धालों का विश्वास
04:56मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो आते थे तिसे सास नहीं होती थी यहां पर आके ठीक हो जाते
05:02थे
05:03मैंने खुद का अनुभव है मैंने देखा हैं
05:07अकलपनी है यहां से जुड़ी लोग कताएं
05:14यह ऐसा केंद्र है चाहे दुखी हो बिमार हो लाचार हो कोई भी व्यक्त आता है तो प्रभूल का भला
05:22करते हैं
05:23भगवान का और भग्त का मिलन होता है जो जिस सास्था साता है उसको उसी प्राप्ति होती है
05:33कोई अपने भय के साथ आता है और विश्वास लेकर लोटता है कोई अपनी व्यथा लेकर आता है और प्रार्थना
05:41छोड़कर जाता है
05:42कोई उत्तर खोजने आता है तो कोई केवल श्री बाला जी का आशिरवाद पानी
05:56मेंदिपूर बालाजी धाम का हर रहसे एक नई परंपरा से जुड़ा है और हर परंपरा के पीछे छिपी है सदियों
06:03पुरानी आस्था
06:04यहां केवल भगवान के दर्शन नहीं होते बलकि कुछ ऐसी मर्यादाओं का भी पालन किया जाता है जिन्हें लाखों श्रद्धालू
06:12आज भी अटूट विश्वास के साथ निभाते हैं
06:29हर मंदिर की अपनी परंपरा होती है लेकिन ये ऐसा मंदिर है जहां भगवान के दर्शन से पहले नियमों के
06:37दर्शन होते हैं
06:39जहां श्रद्धा के साथ अनुशासन भी अनिवार रहे और जहां हर कदम पर आस्था की मर्यादाएं आपका इंतिजार करती हैं
06:55कि ये बाबा बाला जी हन्मान जी महराज का धाम है इसे घाटे वाले बाला जी और मेंदिपूर बाला जी
07:03के नाम से लोगभग जानते हैं
07:04मैं पिछले लगभग बीस पक्ची साल से हैं बाबा के दर्वार में हा रहा हूं लोगभग हैं ये तो आस्ता
07:12की बात है बाबा की तो खिर्पा ऐसी आ
07:14कि लोगों का संकटी काड़ देते हैं गया
07:18और इसी आस्ता के लिए लोग बाग यहां आते हैं क्योंकि यहां संकट कटते लोगों ने अपने प्रत्यक्ष देखा है
07:24और कटते भी है आप खुद देखो न यह तो एक तरह से बाबा की कचेरी है कि यहां कोतवाल
07:30जी भी बैठे हैं प्रेतराज जी भी बैठे हैं भैरो बा
07:54भारत में अनेकों मंदिर हैं लेकिन राजस्थान के महंदीपुर बालाजी धाम की परंपराएं बिलकुल अलग है
08:05भक्तों को बालाजी का प्रसाद घर लेकर जाना मना है
08:09मंदर दर्शन से पहले ही आपको लहसुन, प्याज, मानसाहार और मदीरा का त्याग करना है
08:16दर्बार में प्रवेश से पहले इत्र और परफ्यूम का इस्तिमाल निशेद है
08:22दर्शन के बाद 40 दिनों तक सात्विक जीवन का पालन करना है
08:28मंदर परिसर में पीडित व्यक्तियों को जूना या बाद चीत करना मना है
08:34बालाजी, प्रेत राज सरकार और भैरव बाबा, तीनों का दर्शन अनिवार्य है
08:41और सबसे बढ़कर मंदर से बाहर निकलते समय पीछे मुड कर देखना ना है
09:11या सोखा ओजा, जो भी किस चक्क्रम पड़ते हैं, ऐसे किसी ब्यक्ति के पर चक्क्रम नपड़े
09:15चिद्धा वाला जी के दरबार आएं, जो नियम है, कानून है कुछ यहां कि उन नियम का पालन करेंगे पुना
09:22स्थीख हो जाते हैं
09:23ऐसा मेरा मानना है यही बाला जी की किरपा है सबसे बड़ी किरपा है कल्यूग के राजा है यह अब
09:28कल्यूग में सबसे अगर की चलता है तो बाला जी का ही चलता है
09:31क्या ये सच है या केवल भ्रांती अगर सच है तो क्यों क्या इन नियमों के पीछे कोई प्राचीन धार्मिक
09:43परंपरा है
09:45क्या ये केवल लोक मानिताएं हैं या फिर सदियों से चली आ रही ऐसी आस्था जिसे आज भी लाखों श्रद्धालों
09:54पूरे विश्वास के साथ निभाते हैं
09:59मेहंदीपूर धाम ऐसा धाम है जो कश्टों को निवारन करता है सुखों को परदान करता है तो इसलिए दुनिया ये
10:07आजकल कल जुग में देव सिद्ध हो तुमी हनुमान तुमारा क्या कहना ऐसे बाबा है स्वेंबू है प्रगट अपने आप
10:13हुए है प्रेतरा सरकार जी
10:41मेहंदीपूर बाला जी धाम में नियम किसी शिला लेक परदान करता है
10:45बल्कि शद्धालों के विश्वास में बसते हैं शायद यही वज़े है कि इस दिव्द दरबार में आने वाला हर भक्त
10:54केवल तर्शन करने नहीं आता बल्कि उन परंपराओं का पालन करने आता है जिन्हें पीड़ियों से आस्था ने जीवित कर
11:03रखा है और यही विश्�
11:08के सबसे रहस्यमई और सबसे अनोखे तीर्थों में से एक अलग पहचान देता है वो यसे संकट मोचन हनुमान की
11:22दिव्य कृपा का दर्बार मानता है तो कोई इन सब बातों को लेकर कहता है कि ये तो केवल लोक
11:28विश्वास है विज्ञान भूत प्रेत को नहीं मानता और इं
11:38बात तैह अद्बूत हैं यहां की परंपराएं और विश्वास निये हैं यहां से जुड़े लोगों की अनुभव और अकल्पिनिया हैं
11:45वो मान्यता हैं जिन्होंने महंदीपूर बालाजी धाम को रहस्य और आस्था का अनोखा संगम बना दिया है
12:06यहां विश्वास का संसार तर्क से नहीं श्रद्धा से चलता है
12:20हमारे साथ बहुत सारे एक्सपीरियंस हैं हमारे घर में भी ऐसे बहुत सारे हुए हैं जो यहां आके हमें बहुत
12:26ही पोस्ची वाइप्स मिली हैं
12:28और हमें कहीं से भी आराम नहीं आ रहा था तो हम बाबा के दर्शेंगर नहीं आते हैं तो हमें
12:33बहुत ही यहां पर सुकून मिलता है यहां पर तो इतनी अद्बुत चीजें हैं कि कोई जो विश्वाश भी नहीं
12:39करता हो एक बार आके यहां देखेगा तो इसको अपने आप प
12:58तो मुझे इस दर्टी पर पैर रखता ही मुझे पता लगने लग जया था कि बाबा साक्षाद यहां पर है
13:02और हमारे साथ परस्टनल एक चीज होई कि मेरे मामा की बेटी ती वो काफी बिमार रहती थी किसी भी
13:08डॉक्टर ने कोई इलाज समझ नहीं आ पाया नाएंगी रि
13:27यहां 2400 घंटे प्रार्थनाएं गोंचती हैं और उम्मीद कभी ख़दम नहीं होते
13:40वो अभी घर ले जाते हैं परिवार के लिए उसमें लिखा है आपको घर ले जाना चाहिए कोई दिक्तर की
13:47पेकिट पे लिखा है
13:48मंदिर में फेकिट बढ़ते हैं ओ ले जाते हैं और महिमा बालाजी जब हर दर्वाजा बंद हो जाता है तब
14:09बहुत से लोग आखरी उम्मीद लेकर मेहदीपुर बालाजी धाम पहुंचते हैं
14:27मैं नर्शिंगी स्टाप हूँ इन चीजों पर विश्वास नहीं करती थी और यहां आके मने देखा हाँ साइस अलग गया
14:34बगवान बहुत बड़ी चीज है
14:37मेरे में कश्ट आया हाँ बीस साल से हाँ मेरे सिरकातर दुआ था मैंने जोदबुर वगेर हर जगे से इलाज
14:47लिया कहीं कोई फाइदा नहीं आया यहां पर आई मैं उसके बाद मेरे को पता चला हाँ साइस अलग चीज
14:54है बगवान बगवान है
15:09विज्ञान की नजर में भूत प्रेत या उपरी बाधा का कोई प्रमाण नहीं मिलता लेकिन इस दरबार में आने वाले
15:17अनेक श्रद्धालू दावा करते हैं कि उन्हें यहां राहत में
15:27हम अजद्धा जी से आये हैं हमारे बच्चे को संकट ने बहुत तगलीब दिया है लड्डू में खिलाया गया था
15:34बाबा हमको बहुत सक्ती दिये हम बच्चे को कंट्रोल में कर ले नहीं दबावबा काम नहीं कर रहा था
15:41इतना तगलीब देता था यह देखो हाथ में काट लिया यहां पूरा हाथ काट दिया था मुह से बच्चे को
15:50चोटे भाई को बहुत मारता था
15:53यह मौणेद्रब 2014 का मेंटर है दो हजार चोट्रा में मलब पान साल का था तभी उसको लड़ू में खिलाया
16:01घया था
16:03तो मौणा हम तांतिरिक के पार जाते थे तो तांतिरिक मलब करते थे मल अराम हो जाता था मलब इसको
16:11अच्छे से नहीं थिख कर पते थे
16:23अद्भुत है ये अनुभव, अविश्वसनी है ये तावे और अकलपनी है कहानिया जो हर दिन महंदीपुर बालाजी धाम में सुनाई
16:33देती है
16:43कम से हम पांच-छे डक्तर से अच्छे अच्छे से पर मेरे को बिनकुल रखनी पड़ा है तो उन्हें बोला
16:53साले रोता क्यो है जाओ में देपुर बालाजी चला जा मेरे को उन्हें एक अनुवान क्याली से दिया छोटा तेर
17:01को टकली वह रस्ते में तो एक ले जा बस देख �
17:08अब बिल्कुल स्वस्त है आठ बार आ गया में जा परिवार सही और एक बात में बंड़ा भी कर क्यों
17:14का हूं और ही गाड़ी भरके लाया था मैं परिवार की
17:26क्या ये केवल अटूट आस्था की शक्ती है क्या ये मनो वैज्ञानिक विश्वास का असर है या फिर ऐसा कोई
17:33रहस्य जिसे आज तक कोई पूरी तरह समझ नहीं पाया
17:49मेहंदीपूर बालाजी धाम की एक तस्वीर वो है जो रहस्य और लोक मान्यताओं से जुड़ी दिखाई देती है
17:55लेकिन इस पवित्र दर्वार का एक दूसरा रूप भी है जहां लोग केवल अपनी परिशानिया लेकर नहीं आते बल्कि उमीद,
18:02प्राधना और नए सपनों के साथ पहुँचते हैं
18:12महंदीपुर बालाजी धाम नाम सुनते ही कई लोगों के मन में भूत प्रेत और प्रेत बाधा की कहानियां उभराती हैं
18:19लेकिन इस दिव्य दर्वार की पहचान सिर्फ इतनी नहीं है
18:31सब परसेंट मनोकामना पूरी होती है जब से आये हैं जब से बाबा की इतनी क्रपा हुई है हमारे उपर
18:37कि हम बस बढ़न नहीं कर सकते हैं
18:39सब नेगेटिव एनरजी क्या ये समझ लो का आपको जीवन में सुकून मिल जाता है
19:08सदियों पुराना ये धाम केवल रहस का बिंदू नहीं बल्कि करोडों लोगों की आस्था का केंद रहे
19:14यहां कोई अपने बच्चों के बेहतर भविश्च की प्राठना लेकर पहुँचता है
19:19कोई नौकरी की मनोकामना लेकर आता है
19:21तो कोई ब्यापार में सफलता की उमीद के साथ
19:28यहां पर आते हुए हमें लगबग दो-तीन साल हुए है
19:31और बाबा के ऐसी किरपा हुए कि गुरुदो एक भवान के ऐसी किरपा आशिरवाद से
19:36हम यहां पर जब से आये हैं हमारे दिन दुने राचोगने किरपा होते रही है
19:40और बाबा जी का आशिरवाद ऐसे बिलता रहा है और बरसता रहा है
19:50इस दर्बार में अरजी अलग-अलग है लेकिन हर प्रार्थना का पता एक ही है श्री पालाजी महराज
20:12मैं यहाँ पर पिछले जुलाई से आ रहा हूँ यही एक साल लगब हो गया
20:18हाँ परिवाई समस्या जो हमने विचात करके आना शुरू किये
20:23उस पर ये तो नहीं कहा जा सकता है कि पूर्णते हैं समातों गए लेकिन उस पर हम सुधार की
20:28तरफ हैं
20:29मलब आसा से अधिक हमारी वाईप वहीं सुल्तानपूर डायट पर लेक्चरा रहें तो इनको कुछ दिक्कत रहती थी दवापाती होती
20:36थी लेकिन
20:36मलब सुस्त नहीं रहती थी थी थोड़ा सा सुधार क्या लगभग 50% के बब कह लिया जाए कि परिवार
20:44में सकरात्म उर्जा जो कहीं से नकरात्म आ गया था उसका निदान
20:51भाषा बदल जाती है पहनावा बदल जाता है लेकिन एक चीज नहीं बदलती बालजी महराज पर अटूट विश्वास
21:20और उनकी एक चमतकार है कि जितनी भी नेगेटिव एनरजी से ग्रेशित लोग यहां आते हैं उनको पोजिटिविटी फील होती
21:29है और मतलब जो चमतकार वेग्यानिक भी नहीं कर पाते हैं वो बालजी महराज स्वेम चलाते हैं लोग यहां पर
21:39पागलों जैसे हरकत करते ह�
21:42और एक दो दिन में यहां से बिल्कुर सही होके जाते हैं इस दर्बार में कोई अपने आसू लेकर आता
21:49है तो कोई अपनी उम्मीद कोई खाली हां आता है लेकिन लोडते वक्त अपने साथ एक नया विश्वास लेकर जाता
21:57है
22:00मेंदिपूर बालजी धाम में हर सवाल के साथ एक नया रहस्य सामने आ रहा था कहीं ताले थे कहीं हतेलियों
22:07के निशान कहीं पीछे मुड़कर न देखने की परंपरा तो कहीं इनी मान्यताओं को केवल लोग विश्वास बताने वाले लोग
22:14यानि एक ही धाम लेकिन धारना
22:45में अलग-अलग तरे कि
22:47एक विशाल संसार हमेशा यहां जीवन्त रहता है
22:53आगे बढ़ते हुए हमारी नजर मंदर के अलग-अलग प्रवेश द्वार पर लोहे के सैक्णों तालों पर बढ़ता है
23:02यह तालत के है जाज़ अपने कुए कर्ष्ट परिसाने उसको यही कैद करने के लिए बांदे है
23:08कि जो अमारी दिक्कत है वो यही रेजया अमारे साथ अमारे घर पर नहीं जया
23:12तो ऐसी मर mistake माननेता है कि ताला लगाने से अमारी दिक्कत यही कैद हो
23:23शद्धालूं का विश्वास है कि जब किसी रिख्ति को यहां आकर राहत मिलती है
23:28तो वो मंदिर के द्वार पर एक ताला बांध कर अपनी प्रार्थना पूर्ण होने का प्रतीक छोड़ जाता है
23:37कुछ लोगों का कहना है कि जैसे ताला बंध हो जाता है वैसे ही उनके जीवन में संकट भी यहीं
23:45रुप जाते हैं
23:46नकरात्मक शक्तियां इसी द्वार पर बंध कर रह जाती हैं और दोबारा उनका पीछा नहीं करती
24:07कुछ ना कुछ होके तब हम यहां मतलब आते हैं क्योंकि हमेशा मतलब आके मन को बहुत संतुष्टी मिलती है
24:12अगर एक बार जो आए गरा दर्शन करने वो बावपीस आने की जरूर सोचेगा
24:32ताले के इस रहस से हम आगे बढ़े तो मंदिर की दीवारों ने हमें रोक लिया
24:39केरवे रंग से बने सैकडों हथेलियों के निशान हर तरफ नजर आ रहे थे
24:43हमने अलग-अलग लोगों से बात की और लगभग हर व्यक्ती ने अलग कहानी सुनाई
24:49किसी ने कहा ये उन श्रधालूं की हथेलियों के निशान है जिनहें यहाँ आकर मानसिक शान्ती मिली
24:58कुछ लोगों ने बताया कि संकट से मुक्ती मिलने के बाद
25:03श्रधालू अपनी हथेली तीवार पर लगा कर घर की ओड जाते हैं
25:11हर उत्तर अलग था
25:13लेकिन हर उत्तर में विश्वास की गहराई समान थी
25:18इसी पीच एक और बाद लगभग हर श्रधालू की जुबान से सुनाई दी
25:23दर्शन करके लोटो लेकिन पीछे मत देखना
25:29जब हमने इसका कारण पूछा तो कुछ लोगों ने बताया ये वर्षों पुरानी परंपरा है
25:35कुछ ने बताया ये सब मन गणन्त है
25:40इसका कारण है ना इसके बीचे कि बाबा जो लोगों के संकट काटते हैं अपना संकट कौन कटके पीछे मुड़के
25:45देखना जाएगा
25:46जो संकट कट गया वो बाबा ने काट दिया आपको उससे क्या अगरना आपका तो संकट कट गया
25:51तो इसलिए आपको पीछे मुलके नहीं देखना है, आपको तो जो बाबा ने आपके किरपा करी हो, उस किरपा का
25:55सुख का अनन्द लो, आप बाबा के दर्शन करो और अपने सुख का अनन्द लो
25:58अपनी मनों कामना पूरी करने के लें बावा के दरवार में धागावान के आते हैं और ये जो बोलते हैं
26:03के पीचे मुलके नहीं देखना चाहिए या फिर परशाद नहीं खाना चाहिए ये भी सब गल्ट बाते हैं ऐसा कुछ
26:08नहीं है
26:19अमुमन देखा जाता है कि किसी सिद्ध जगे को लेकर प्राचीन मान्यताएं अलग होती हैं और समय के साथ साथ
26:25काफी चीजें यूँ ही जोड़ दी जाती हैं
26:28हमें ऐसे ही कुछ स्थानिये लोग मिले जिनकी शिकायप थी कि महन्दीपूर बालाजी धाम को लेकर कई तरह की भ्रांतियां
26:35फैला दी गई है
26:37इन लोगों का कहना था कि हर सुनी-सुनाई बात पर विश्वास करना उचित नहीं
26:44आस्था का सम्मान होना चाहिए लेकिन अफवाह और परंपरा में अंतर भी समझना जरूरी है
26:52यह क्या है जिनको कोई दिक्कत है परेशानी है उनके लिए नियम है
26:56बाकि आम आदमी कोई दर्शन करने आता है वो परेशानी दिक्कत वालोग लिए है
27:15आम आदमी के लिए नहीं है
27:17भगवान के परेशान को ग्रहन करने से घर ले जाने से कुछ फायदा ही मिलता है ना कि कोई नुक्सान
27:25आज तक कभी हमने ऐसा नहीं सुना अगर यहां का परेशान काने से किसी के कुछ गलत हुआ हो
27:30ने कि आदमी के जो भी कोई बीमारी लगती है यहां के तो वातावर्ण में ही पोजिटिविटी है
27:37परसाद में तो ऐसा कुछ भी नहीं है बागी यहां तो सिर्फ एक अफवा हैं लोगों की
27:42परसाद में ऐसा बागी ऐसा कुछ भी नहीं है परसाद लोग घर भी लेके जाते हैं
27:46हम किलो किलो तोल के मिठाईयां बरके सोकेस में रखते हैं और लोग खूब लेके जाते हैं हमारे यहां से
27:52लेकिन कुछ लोगों जो अफवाओं से ग्रसित होते हैं वो लोग इन चीजों को मानते हैं
27:58बागी ऐसा कुछ भी नहीं है कि परशाद गर नहीं ले जाने से बलकि पायदा होता है ना कि नुक्सान
28:03होता है।
28:28परशाद घर नहीं ले जाया जाता तो कुछ लोगों ने सपश्ट किया कि ये नियम हर व्यक्ति के लिए नहीं
28:34है।
29:04परशाद ना खाना और तरह तरह कि यहां कि ब्रांदिया फैल आएगी है।
29:10इसा कुछ नहीं एक भगवान का और भगत का मिलन होता है जो जिस आस्था साता है उसको उसी प्राप्ति
29:17होती है।
29:17हमारी आखों के सामने आस्था के अनेक रूप थे कहीं मंदिर के द्वार पर बंधे ताले कहीं दीवारों पर हथेलियों
29:26के गेरवे निशान कहीं पीछे मुड़कर ना देखने की परंपरा तो कहीं इन्हीं बातों को लोग विश्वास मानने वाले लोग।
29:37मेंदिपूर बालाजी धाम में जैसे जैसे हम आगे बहते गए उतना ही स्पष्ट होता गया कि यहां केवल दर्शन नहीं
29:45होती हैं यहां विश्वास की अनकिनत कथाएं चन्म लेती हैं।
29:51अद्भुद है यहां की परंपराएं।
29:57अविश्वसनी है यहां से जुड़ी लोक मान्यताएं।
30:01और अकल्पनी है वो अटूट श्रद्धा जो हर दिन देश के कोने कोने से लाखों लोगों को इस दिव्य दर्बार
30:11घींच लाती है।
30:16महंदिपूर बालजी धाम के दिव्य दर्बार में भगवान हनुमान के बाल स्वरूप की पूजा होती है।
30:22और साथ में ही होती है प्रेत राज सरकार और भैरो बाबा की पूजा।
30:26कहा जाता है यहां आने पर तीनों के दर्शन और तीनों के पूजन करना अनिवारिय है।
30:38तो उची पहाडियों के बीच बसा एक ऐसा धाम जहां कदम रखते ही सब कुछ बदल जाता है।
30:49जैकारों की गूज, घंटियों की आवास और हजारों शद्धालवों की आस था।
30:58लेकिन महंदीपुर बालाजी धाम की पहचान केवल यहीं तक सीमित नहीं है।
31:03सदियों से लोगों का विश्वास है कि यहां संकट मोचन श्री बालाजी महराज अपने भक्तों के हर संकट को हर
31:11लेते हैं।
31:27कि मैं पिछले आठ साल पहले काफी बिमार हो गया था और एक महीने में तक मैं बिमार रहा था।
31:30डॉक्टरों ने मेरे हाथ में उठा दिया था रेफर्स कर दिया था प्लेंशर से गौर्णन वाटा जेपी ऐस्पताल के लिए।
31:56दाम में विराजमान बाला जी महराज संकट मोचन हनुमान के बाल स्वरूप है।
32:08मानेताओं के अनुसार ये प्रतिमा किसी शल्बकार ने नहीं बनाई बलकि ये स्वयम्भू है।
32:18कहा जाता है कि ये मूर्ती लगभग एक हजार साल पुरानी है।
32:29बाला जी महराज यहां अपने बाल रूप में वराजमान है।
32:34और उनकी एक चमतकार है कि जितनी भी नेगेटिव एनरजी से ग्रसित लोग यहां आते हैं उनको पॉजिटिविटी फील होती
32:43है।
32:43बाला जी महराज के अरदाश करते हैं। आने के पहले धरकाश लगती है। अरजी लगती है। सामनी बंडारा लगता है।
32:51और भी कई चीजे लगती है।
32:53चोला चढ़ाया जाता है यह तीन चोले चढ़ते हैं सप्के में। सोंबार, बुद्वार, तो शुक्तर लगता है। चार से चे
33:01के बीच में मंदिर बंदर है। उस पिरेड में चोला चढ़ता है।
33:08हम आपको यहां इश्वर के रूप के बारे में और भी अद्बुत बातें मताते हैं
33:14बालाजी महराज की प्रतिमा पर एक सूक्ष्म छिद्र है जहां से निरंतर पवित्र जल निकलता रहता है
33:21बालजी महराज के साथ दो और देवस्धलों का यहां विशेष महत्व माना चाता है
33:27बालजी के गरब करी के पास है व्रेट राज सरकार जिनहें लोक विश्वास में तंडा धिकारी कहा चाता है
33:35मारिता है कि नकरातमक और दुष्ट शक्तियों पर न्याय करने का दाइत्व नहीं के पास है
33:42दूसरे हैं कोटवाल कप्तान भैरव बाबा
33:46चद्धालूओं का विश्वास है कि जैसे किसी राज की सुरक्षा का दाइत्व कोटवाल पर होता है
33:52उसी तरह इस दुद्ध दर्बार की रख्षा कदाइत भैरव बाबा दिभाते है
34:23और मैं करीब 20 साल से आ रहा हूँ बाबा के पृति आस्ता है और बाबा पर भरूसा है
34:31और खुशी मिलती है बाबा के आन से और जो मनु कामना पूर जाती है तो उसके बाद बाबा का
34:37परसाथ सभामनी है
34:45यहां आने वाले शद्धालू केवल बालाजी महराज के ही नहीं बलकि प्रेद राज सरकार और भैरव बाबा के भी दर्शन
34:53करते हैं
34:55परंपरा की अनुसार तीनों देवस्थलों पर अलग अलग प्रसाद अर्पित किया जाता है
35:00बालाजी महराज को लड़ू प्रेद राज सरकार को चावल और भैरव बाबा को उडद अर्पित किया जाता है
35:07शद्धालूं का विश्वास है कि तीनों देवों की क्रपा से जीवन के कष्ट दूर होते हैं
35:13और नकरात्मक शक्तियों का प्रभाव समाप्त हो जाता है
35:30इसके बाद बहरोजी को पिर प्रभाव जाता है
35:56विज्ञान इन मानिताओं को अपने नजरिये से देख सकता है
35:59लेकिन मेहनिपूर बालाजी धाम में आने वाले लाखों शद्धालवों के लिए सबसे बड़ा प्रमाण उनका अपना विश्वास है
36:09लेकिन इस धाम की पहचान केवल आस्था और रहस्यों तक ही सिमित नहीं है
36:15जिकेवल प्राटनाओं का स्थान नहीं बलकि हजारों सकनों को नई उडान देने वाला केंद्र भी है
36:25सिक्षा के चेतर में मंदर ट्रस्ट वर्तमान में मेहदीपूर बालाजी सिक्षन संस्थान के तहत साथ संस्थाएं संचालित करता है
36:32जिसमें तीन कॉलेजेज हैं जिसमें एक महिला कॉलेज बीजी कॉलेज है जो राजस्तान विश्विद्याले से अफिलेटेड है एक संस्कत महा
36:40विद्याले है जो जगतगुरु रामाननदाचारिय राजस्तान संस्कत विश्विद्याले से अफिलेटेड है एक संस्कत की स
37:10यहां मंदर की घंटियों के साथ साथ बच्चों की पाठशाला भी गूंचती है
37:14प्रेवान्त प्रृष्ण केन्च मंचती है
37:22सस्थाम् बच्च आंगे बचा साथ प्रांगे घंटां
37:27उन्गोरृृः प्रृष्णो वन्देगो पहिस्वार न्गेंगिन दो वन्गेंगे साथ साथ साथ बच्च परम्रमा
37:51मेंदिपुर बालाजी धाम की सबसे बड़ी शक्ति क्या है?
37:56क्या ये केवल सदियों से चली आ रही लोक मानिताओं का प्रभाव है?
38:02या फिर करोणों लोगों की अटूट आस्था का संकल्प?
38:08क्या यहां मिलने वाली शान्ती केवल मन का विश्वास है?
38:13यह सचमुच इस दर्वार में ऐसी दिप यूँचा है जिसे शब्दों में समझाया नहीं जासे है?
38:22यहां आने वाला हर व्यक्ति अपने साथ कोई न कोई सवाल लेकर आता है
38:39लेकिन लोटते समय उसके पास एक जवाब जरूर होता है
38:56शायद यही महंदीपूर बालजी धाम की सबसे बड़ी पहचान है
39:00अद्भुत और विश्वस्निय और कल्पनिय में आज के लिए इतना ही
39:03अनिमेश रंजन और क्यामर परसन अमित कुमार के साथ मुझे दीजिये इजाजत
39:07देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए आज तक
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