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यह वीडियो 24 मार्च 2026 को NIT रायपुर में आयोजित "संवाद" सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00हर इंसान का जीवन चार स्थम्भो के उपर खड़ा रहता है
00:03फैमली, फ्रेंड्स, हेल्थ और वर्ग
00:05और जितने भी सक्सेस्फुल लोग हैं
00:08उन सभी में से हर किसी ने एक नएक स्थम्भो को अपने जीवन से निकाला है
00:12जैसे कई लोगों ने अपनी फैमली को हटाया है
00:15कई लोगों ने दोस नहीं बनाए
00:16कई लोगों ने अपनी हेल्थ पर द्यान नहीं दिया
00:18गीता में कृष्ण अर्जुन के क्या है
00:22बार बार कहते हैं अर्जुन सक्खा
00:25अर्जुन सबसे पहले बोलते जीवन से फ्रेंड को निकालो
00:27अर्जुन के तो परम सखा कृष्ण नहीं थे
00:31कृष्ण अर्जुन के गुरुबाद में थे
00:33सखा पहले थे
00:35वो तो निकाल देते बोलते दोस्तों होने नहीं चाहिए दीवन में निकाल दो
00:39बात दोस्तों को जीवन से निकालने की नहीं है
00:42बात जीवन में सही दोस्तों को रखने की है
00:50दूसरी क्या बोली किसको निकालना पड़ता क्या
00:52फैमिली निकालनी पड़ती है
00:55ये जो फैमिली की विर्थ की परिभाशा है वो हटानी है
01:00क्यों तुम कह रहे हो कि जिससे तुम्हारा देह का और खून का रिष्टा है मात्र वही तुम्हारी फैमिली है
01:06क्यों कह रहे हो अगर देह और खून का रिष्टे की बात करनी है तो गीता का ही जो उदाहरन
01:12चल रहा है इसको और आगे बढ़ा लो
01:14रिष्टे में तो श्री कृष्ण अर्जुन के बहुत निकट संबंधी नहीं थे
01:21और जो सामने खड़े थे वो अर्जुन के कोई बहुत दूर के संबंधी नहीं थे
01:27कर्ण तो सीधे सीधे अर्जुन के बड़े भाई थे
01:31और दुर्योधन भी भाई ही लगते थे रिष्टे में
01:35गीता सिखा रही है फैमिली की ये परिभाशा गलत है
01:38जहां तुम कहते हो किसी से खून का रिष्टा है तो भाई हो गया
01:42खून के रिष्टे से भाई नहीं हो जाते
01:44चेतना के रिष्टे से भाई होते है
01:49इतने सैणिकों
01:50उने अरजुन के लिए जयान दी है
01:51क्या अरजुन का उनसे रख्त-संबंद था
01:54था क्या
01:55वो घटोतकच
01:57उसने आ कर जयान दे दी
01:59उससे दूर का रिष्टा है वो फिर
02:01धीम है
02:02फिर वो दूसरे कुल की
02:04और दूसरे रेस की
02:07हिडिमबा है फिर उसका बेटा है वो आकर के जान दिये दे रहा है अरजुन के लिए
02:13न्याय देखो ग्यान देखो विवेक देखो प्रेम देखो ये पहले आते हैं ये खून का रिष्टा और इस तरह की
02:22फिल्मी बाते ये बहुत बाद में आती हैं
02:25जिदर सच्चाई खड़े हो उधर खड़े हो ना जिदर खून खड़ा उधर नहीं खड़े हुआ जाता
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