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Transcript
00:00आपके लाइफ में ऐसा कुछ अनकनफिटिबल तुथ है जो कि अपने अपने बारे में एकसेप्ट किया है
00:06आपका लाइफ उसमें कैसे चेंज हुआ उससे
00:09मैं आपसे कह रहा हूँ डरना मत दबना मत अगर मैंने अपने भीतर डर नहीं देखा होता
00:14अगर मैंने अपने भीतर आवाज नहीं सुनी होती जो कह रही हो प्रशान दबजा प्रशान बिकजा तो मैं आपसे कैसे
00:21बोलता कि होता है
00:21तो आपने कैसे वो अनकनफिटिबल तुथ को लाइक एकसेप्ट किया
00:26नहीं दबा एकसेप्ट किया
00:40जिन्दगी इसलिए थोड़ी है कि आज जैसे हो बीस साल बाद भी वैसे ही रहोगे
00:43कोई भी जानवर जैसे ही पैदा होता है तो यसे ही पैदा होते है आप पैदा हुए हो तो आप
00:48क्या करते हो ज्यान बाचते हो आप पैदा होते हो तो क्या करते हो
00:52सूसू पोटी और क्या करोगे
00:54शोर मचाते हो
00:56इधर उधर जो भी है
00:57आपके पास क्या होता है ग्यान तो छोड़ दो
01:00आपके प्रेम भी नहीं होता है
01:01अब उसको आप क्यूटनेस बोल दीजिए वो अलग बात है
01:04लेकिन वो बहुत एनिमलिस्टिक होती है
01:06वो हर जानवरें पाई जाती है
01:07तो अगर हमको वैसे ही रहना होता जैसे हम पैदा हुए थे
01:10तो हमें अभी सबको कैसा होना चाहिए था
01:14अच्छा तो यही कर रहा होता है
01:16या तो सोता है या रोता है
01:18जिन्दगी तो है इसलिए कि
01:20आप जैसे हो उसको छोड़ छाड़ के आगे बढ़ते रहो
01:22तो जितने भी तरह के दोश हो सकते हैं
01:25जिनकी मैं आपसे बात करता हूँ
01:27तो किसी भी साधारण इंसान की तरह
01:29मैंने उन्हें अपने भीतर भी देखा है
01:34देख रहा हूँ
01:37अब ठीक?
01:39इससे आपको हौसला भी रहेगा
01:41कि सब में होता है
01:43और इससे आपको इस अंतोश भी रहेगा
01:45कि आपकी हालत टाइट नहीं है मेरी भी है
01:50जिंदगी संगरश का नाम है भाई
01:51ये सब चीजें बनी रहती हैं
01:53तो अपना काम है करते रहना होता है
01:56मुक्ति एनलाइटनमेंट जैसी कोई आखरी बात नहीं होती है
01:59लगातार आगे बढ़ते रहना होता है
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