00:00वैभव सूर्य वंशी ने टीम इंडिया में रचा नया इतिहास, पिता संजीव का पूरा किया अधूरा सपना।
00:05शनिवार 4 जुलाई 2026 को मैंचेस्टर के मैदान पर जब 15 साल के वैभव सूर्य वंशी को भारतिय टीम की
00:11डेब्यू कैप मिली तो ये सिर्फ एक खिलाडी का सफर नहीं, बलकि एक पिता की 15 साल पुरानी तपस्या का
00:16इनाम था।
00:17समस्तिपूर के मोतिपूर गाव में जन में वैभव के पिता संजीव सूर्य वंशी खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन बदहाल
00:23व्यवस्था के कारण उनका सपना अधूरा रह गया।
00:25उन्होंने शिप्याड में काम किया, बाउंसर बने, पर हार नहीं मानी और बेटे को चैंपियन बनाने की ठान ली।
00:31वैभव जब 4 साल के थे, तभी से उनके हाथ में बल्ला थमा दिया गया था।
00:34मास सुभः चार बजे उटका टिफिन बनाती और पिता वैभव को 200 किलोमीटर दूर क्रिकेट एकैडमी लेकर जाते थे।
00:40वैभव हर दिन करीब 600 गेंदों का सामना करते थे।
00:43उनके टैलेंट का असली जल्वा तब दिखा जब राजस्थान रोयल्स के ट्रायल में उन्होंने 150 किलोमीटर की रफतार वाली गेंद
00:48पर साइट स्क्रीन के ऊपर छक्का जड़ दिया।
00:50इसके बाद IPL 2026 में टैल का मचाने वाले वैभव आज भारत के सबसे युवा इंटरनेशनल क्रिकेटर बन चुके हैं।
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