Skip to playerSkip to main content
Europe Heat Wave: यूरोप इस समय भीषण हीटवेव की चपेट में है। फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली और पुर्तगाल जैसे देशों में 40°C के आसपास तापमान ने हजारों लोगों की जान ले ली है। दूसरी ओर भारत के कई शहर हर साल 45°C से 48°C तक की गर्मी झेलते हैं, जबकि खाड़ी देशों (Gulf) में लाखों भारतीय 50°C तक के तापमान में भी काम करते हैं। आखिर ऐसा क्यों? क्या भारतीयों का शरीर अलग है, या इसकी वजह हमारी जीवनशैली, खान-पान, रहन-सहन और वर्षों की गर्म जलवायु के अनुरूप विकसित हुई अनुकूलन क्षमता है?

इस विशेष रिपोर्ट में हम वैज्ञानिक शोध, WHO, IPCC और अन्य विश्वसनीय अध्ययनों के आधार पर समझेंगे कि यूरोप में गर्मी इतनी जानलेवा क्यों बन रही है, जबकि भारत और खाड़ी देशों में रहने वाले करोड़ों लोग इससे कैसे मुकाबला करते हैं। साथ ही जानेंगे कि क्या भारतीयों के लिए भी भविष्य में जलवायु परिवर्तन (Climate Change) बड़ा खतरा बन सकता है।

यह वीडियो खास तौर पर भारत में रहने वाले लोगों, विदेशों में बसे भारतीयों (Indian Diaspora), यूरोप में रहने वाले भारतीय छात्रों और पेशेवरों, तथा Gulf देशों में काम कर रहे भारतीयों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अगर आप या आपका कोई परिचित यूरोप, अमेरिका, कनाडा या खाड़ी देशों में रहता है, तो यह जानकारी उसके लिए भी उपयोगी हो सकती है।

Europe is witnessing one of its deadliest heatwaves in recent history. Countries including France, Germany, Spain, Italy, and Portugal have recorded temperatures close to or above 40°C, with nearly 2,000 heat-related deaths reported in just a week. Meanwhile, many parts of India experience 45–48°C every summer, and millions of Indians working across the Gulf routinely face temperatures approaching 50°C. So why does the impact appear so different?

#EuropeHeatwave #IndianDiaspora #HeatWave #Weather #ClimateChange #India #Europe

~PR.514~HT.408~ED.276~GR.508~VG.HM~

Category

🗞
News
Transcript
00:00यूरोप, जुसे दुनिया आधुनी के स्वास्त वेवस्था, बहतर जीवन स्थर और विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक मानती है, वही यूरोप इंदनों
00:09ऐसे गर्मी से जबुच रहा है, जुसने कुछ ही दिनों में हजारों परिवारों की दुनिया उजारती है।
00:15फ्रांस के अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस की कतारे हैं, इटली के शहरों में दोपहर के समय सडके लगभग खाली हो
00:21चुकी हैं, स्पेन और पुर्तगाल में प्रिशासन लोगों से घरों से बाहर ना निकलने की अपील कर रहा है। जर्मनी
00:28जैसे देश जहां कभी 30 डि�
00:33करी को जहां हीट वेव कहा जाता था, वहां थर्मा मीटर 40 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है।
00:40विश्व स्वास्त संगठन और यूरोप की कई स्वास्त एजंसियों के शुरुवाती आकलनों के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह में इस
00:46बिशुन कर्मी से ल�
01:02मध्य भारत और कई इलाकों में हर जगे 45-48 डिग्री और इसके साथ ही ये भी लिखा रहता है
01:08कि फील्स लाइक 50 फील्स लाइक 51 यानि कि जितनी होती है उससे 3-4 डिग्री ज्यादा लोग परेशान जरूर
01:15होते हैं हीट वेव की चितावनिया भी जारी होती है लेकिन यूर
01:31जारों साल का विकास क्रम हमारी जीवन शेली हमारे घरों की बनावट हमारी रोजमर्रा की आदते जिम्मिदार हैं और सबसे
01:39वड़ा सवार अगर जलवायू परिवर्तर ही इस रफ्तार से बढ़ता रहा तो क्या भविश्य में भारत भी यूरोप जैसी स्तिती
01:45का सामना करे
01:59और आज की इस पूरी कहानी को इस पूरी स्टोरी को हम दो पार्ट में समझेंगे पहला पार्ट होगा हीट
02:07एक्लामिटाइजेशन जेनेटिक्स बनाम अडापटेशन इसमें हम जानेंगे भारतिय शरीर के बारे में स्वेटिंग का साइंस जानेंगे एवल्यूशन और य�
02:28अगिसिसतार से जानेंगे कि गल्फ देशों में भारतिया कैसे 50 डिईग्री सील्शेस में भी काम करते हैं उरोप के सरदी
02:34में कैसे आखिर हो क्या रहा है
02:50क्योंकि बैज्ञानिक इसे गर्मी नहीं कह रहा है बलकि एक स्ट्रीम हीट इवेंट कह रहा है यानिकि अत्यधिक तापिय आपदा
02:56मान रहे हैं
02:57अंतराश्ट्य मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार यूरोप में अफरीका से आने वाली गर्म और शुस्क हवाएं समुदरी तापमान में
03:04बढ़ोतरी और जलवायू परिवर्तिन के सयुक्त प्रभाव ने कई देशों में तापमान को सामाने से कई डिगरी उपर उ�
03:25लेकिन यूरोप के कई शहरों में इस बार रात का तापमान भी 30 डिगरी से कम नहीं पहुंच रहा है
03:30यानि शरीर को ठंडा होने का आवसर ही नहीं मिल रहा है लगतार कई दिनों तक यहीं स्तिति बनी रह
03:37रही और लाखों लोग बिन राहत के उसी गर्मी में जीने को मजब
03:54तो हमारा शरीर सबसे पहले पसीना निकाल कर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है अगर यहीं प्रक्रिय सफल
04:00हो जाए तो शरीर का आंतरिक तापमान लग भग 37 डिगरी सिल्सियस पर बना रहता है लेकिन अगर गर्मी बहुत
04:06ज्यादा हो हवा गर्म हो वातावरन में न
04:22कर आते हैं उल्टी तेज होती है फिर धड़कन बढ़ने लगती है और ब्रहम की स्तिती भी पैदा हो सकती
04:27है अगर समय रहते इलाज ना मिले तो शरीर का तापमान 40 डिगरी सिल्सियस से उपर पहुंच सकता है इसे
04:33हीट स्ट्रोक कहा जाता है इस सबस्था में मस्तिष्क प
04:51जवान भी थे बच्चे भी थे लेकिन बुजर्ग ज्यादा थे वह लब्बे समय से चेतावनी देता रहा है कि गर्मी
04:56से होने वाली मौतों में सबसे अधिक जोकिम 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में और हिदय रोगियों में
05:02मधुमें के मरीजों में और अकेले रहने �
05:05पाले लोगों को होता है प्रांस और इटली जैसे देशों में बड़ी संख्या में बुजर्ग अकिले अपार्टमेंट्स में रहते हैं
05:10कई लोगों के पास परिवार नहीं होता जो समय पर पानी पिलाए डॉक्टर बुलाए या फिर उन्हें ठंडी जगे ले
05:16जाए यही का
05:29शरीर का तापमान पूरी दुनिया में लगभग एक जैसा है तो भारत में लोग 45-48 डिग्री तक की गर्मी
05:36में अब एक शाकृत बेहतर तरीके से कैसे जी लेते हैं
05:39क्या सचमुच हमारे शरीर में कोई जैविक बदलाव है या इसका जवाब हमारी हजारों साल पुराने जीवन शैली और विकास
05:47क्रम में छिपा है
05:48इसी सवाल का जवाब हमें विज्ञान के सबसे रोचक अध्याय तक ले जाता है और वहीं से शुरू होती है
05:54इस कहाने की सबसे दिल्चस्प यात्रा
05:57तो क्या इसका मतलब है कि भारतियों के शरीर में ऐसी कोई सुपर पावर है जो उन्हें यूरोप के लोगों
06:03से ज्यादा गर्मी सहने के लायक बना देती है
06:05सोशल मीजिया पर अक्सर ऐसे दावे किये जाते हैं कि भारतियों के जीन्स अलग हैं इसलिए उन्हें गर्मी कुछ नहीं
06:10बिगाड सकती उनका लेकिन जब हमने विज्ञानी के शोदों को खंगाला हमने जब रिसर्च किया तो तस्वीर अलग नहीं अब
06:18तक नेचर, दे लैं
06:32मौजूद है जो उन्हें जन्म से यूरोप के लोगों की तुलना में अधिक गर्मी सहने की शक्ती देता है क्योंकि
06:38बारतियों तो अधिक सर्दी भी सह लेते हैं हमारे देश में सर्दी का भी टेंपरेचर कभी पहाड़ों के तरफ जाए
06:44तो माइनस में जाता है गर्मी में
06:47पचास के प्लस जा रहा है तो हमारा शरीर जो हता है भारत भारतवासियों का जो शरीर है सभी तरह
06:52के टेंपरेचर जहिल पाता है यानि कि केवल जेनेटिक्स इस कहानी का जवाब नहीं है असल जवाब दो शब्दों में
06:58छिपा है अद्रेप्टेशन और एक्लाइमिटाइ
07:15जबकि एक क्लाइमिटाइजेशन यानि कि एक ही इनसान का अपने जीवन काल में किसी मौसम के अनुसार खुद को ढाल
07:22लेना उधारन के लिए अगर कोई यूरोपिया वैक्ती 6 महीने भारत में रहे तो उसका शरीर भी धीरी धीर गर्मी
07:27सहने में पहले से बहतर हो जाएगा
07:29वही अगर कोई भारतिया कई साल ठंडे देश में रहे तो उसकी गर्मी जहलने की शमता भी कुछ हट तक
07:35बदल सकती है यानि शरीर सीखता है इनसान का शरीर मौसम के हिसाब से खुद को प्रशिक्षित करता है यही
07:42कारण है कि राजस्थान का एक मजदूर मैं जुन की दो�
07:58प्रशिक्षित करती क्या है वेज्ञानिक बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति लगतार कई दिनों तक गर्म वतावरण में रहता है
08:05तो लगभग एक से दो सब्ता के भीतर उसके शरीर में कई बदलाव शुरू हो जाते हैं सबसे पहला बदलाव
08:11पसीने में आता है शरीर पहले
08:28जिससे दिल को और शरीर को ठंडा रखने में कम महनत करनी पड़ती है यानि गर्मी से लड़ने के लिए
08:34शरीर अपनी पूरी मशीनरी को अपग्रेड कर देता है अब आते हैं उस सवाल पर जो सबसे ज्यादा पूछा जाता
08:41है क्या भारतिय ये उरोपियों से ज्यादा पसी
08:58उनका शरीर अकसरकम तापमान बढ़ने पर पी पसीना निकालना शुरू कर देता है यानि उनका कूलिंग सिस्टम जल्दी सक्रिय हो
09:06जाता है दूसरी और जिन लोगों का जीवन ठंडे मौसम में बीता है उनके शरीर को इस प्रक्रिया में थोड़ा
09:11अधिक समय लग सकता है
09:13यही ये समझना भी जरूरी है कि पसीना दुश्मन नहीं बलकि हमारे जान बचाने वाला सबसे बड़ा हत्यार है
09:19सोचिये आपकी कार का इंजन गर्म हो जाए तो क्या होता है उसका radiator अतरिक्त गर्मी बाहर निकालता है ठीक
09:26उसी तरह इंसानी शरीर का radiator है पसीना तवचा से उड़ता है तो वो शरीर की गर्मी अपने साथ ले
09:33जाता है इसी प्रक्रिया को एवोपरेट्टिव कूलिंग कहा
09:36जाता है अगर ये प्रक्रियस सही से चलती रहे तो 45 डिग्री टापमान में भी शरीर का दुरूमी टापमान सामाने
09:43रह सकता है लेकिन यहां एक और वैग्यानिक ट्विस्ट है किवल टापमान ही सब कुछ तैय नहीं करता असली खेल
09:50खेलती है humidity यानि हवा में मौजूद नमी
09:53अगर बाहर 45 डिग्री टापमान है लेकिन हवा सूखी है तो पसीना तेजी से सूख जाएगा और शरीर ठंडा होता
09:59रहेगा प्रोसेस लगतार चलता रहेगा लेकिन अगर टापमान 38 से 40 डिग्री हो और नमी 80 प्रतिशत हो तो पसीना
10:07त्वचा पर ही चिपका रहेगा वो �
10:11जैसे ही ऐसा होता है शरीर का प्राकृतिक एर कंडिशनर फेल होने लगता है इसे वजह से मौसम वैज्यानिक बार
10:18बार वेट बल्ब टेंपरेचर की बात करते हैं ये केवल तापमान नहीं है बलकि तापमान और नमी का संयुक्त माप
10:24है वैज्यानिकों का मानना है कि अगर
10:27वेट बल्ब टेंपरेचर लगभग 35 डिगरी सिल्सियस तक पहुंच जाए तो स्वस्त इंसान भी लंबे समय तक जिवित नहीं रह
10:33सकता क्योंकि उस स्तिति में शरीर चाहे जितना भी पसी ना निकाले वो खुद को ठंडा नहीं कर पाएगा यही
10:40वजह है कि 40 डिगरी का प
10:54जरूर हुए हैं जैसे तुचा में अधिक मिलेनिन जो सूरज की पैरा बैंगनी के रनों से सुरक्षा देता है कुछ
11:01शोद बताते हैं कि गर्म इलाकों में रहने वाली आबादी में शरीर की गर्मी बाहर निकालने की शमता बहतर हो
11:07सकती है लेकिन वैज्ञानिक साफ कहते ह
11:09कि इसका मतलब ये नहीं कि कोई भी आबादी गर्मी से अजेय हो गई है आखिरकार इंसानी शरीर की अपनी
11:16जैविक सीमाएं हैं यानि निश्कर्ष साफ है भारत के लोग इसलिए गर्मी नहीं जेल पाते हैं क्योंकि उनके जीन सूपर
11:23हूमन है बलकि इसलिए कि उनका शरी
11:38के खिलाफ क्यों काम करने लगते हैं ये भी सवाल उठेंगे आप वीडियो तो तमाम तरह के देख रहे हैं
11:42जिसमें सड़क भी पेगलता दिखाई दे रहा है काडियो के टायर पेगलते दिखाई दे रहे हैं वहां के घर सड़के
11:47इमारत हीट वेफ के दौरान मौत का जाल �
11:50बन जाती हैं खिर क्यों और क्यों भारत के पारंपरिक घर पंखे सूती कपड़े और दोपहर की जीवन शैली आज
11:56भी विज्ञान की कसोटी पर सही साबित होते हैं यहीं कहानी का अगला और शायद सबसे चौकाने वाला ध्याय है
12:03लेकिन कहानी यहां खत नहीं हो रही है अ
12:19कि उसके आसपास बना सिस्टम दरसल यूरोप की ज्यादा तर इमारतें ठंड से बचने के लिए बनाई गई थी गर्मी
12:26से लड़ने के लिए नहीं फ्रांस जर्मनी बेल्जियम नीदलैंस और ब्रिटेन जैसे देशों में दशकों तक सबसे बड़ी चुनोती ठंड
12:33थी इस
12:49गर्मी हुई मारतें पूरी रात गर्मी छोड़ती रहती हैं कई शहरों में रात का तापमान 30 टिगरी से नीचे उतर
12:54ही नहीं रहा यानि लोगों के शरीर को आराम करने का मौका ही नहीं मिल रहा अब भारत की तस्वीर
13:00देखिए यहां सदियों से लोग गर्मी के साथ जीना
13:03सीखाए हैं पुराने भारते घरों में उंची छतें बड़े आंगन फुली खिड़कियां और हवा के आने जाने का पूरा इंतिजाम
13:10होता है बेंटिलेशन बनाया जाता है आज भी करोडों घरों में सीलिंग फैन मौजूद है एर कंडिशनर भले हर घर
13:16में ना हो लेकिन प
13:32जारत में गर में शुरू होते ही जिवन शली अपने आप बदल जाती है दोपहर की दूप में लोग बेवजे
13:37बाहर निकलने से बचते हैं गाउ में आज भी कई जगे दोपहर में काम धीमा पढ़ जाता है शेरों में
13:42भी लोग छाया तलाशते हैं सिर ढखते हैं सूती कप�
13:45पहनते हैं और बार-बार पानी पीते हैं यह सब हमें किसी किताब ने नहीं सिखाया यह पीडियों से चली
13:52आ रही समाजिक समझ है और इसके साथ जो किताब पढ़ रहे हैं उसमें अलग से इसके बारे में लिखा
13:56जाता है लेकिन जो किताब नहीं भी पढ़ रहे हैं उनको �
13:59भी इसकी समझ है हमारे खान पार में भी विज्ञान चिपा हुआ है गर्मी बढ़ते ही घरों में छांच बनने
14:04लगती है कहीं लस्ती पी जाती है कहीं आम पन्ना कहीं बेल गशरबद कहीं नीबू पानी कहीं नारियल पाने डॉक्टर
14:11आज ओरस पीने की सला देते हैं लेकिन �
14:12भारतिय समाज सदियों से नमक पानी और दही के जरिये शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता आया है आधुने के
14:19विज्ञान आज इस हाइड्रेशन की बाद करता है उसका एक बड़ा हिस्सा भारतिय जीवन शैली में पहले से मौजूब था
14:25अब एक और जल्
14:41नियम है कई खाड़ी देशों में दोपहर के सबसे गर्म घंटों में आउट्डोर काम रोग दिया जाता है मजदूरों को
14:47नियमित पानी आराम और च्छाया उपलब्द कराई जाती है काम के शिफ्ट सुभे और शाम में बाटी जाती है यानि
14:54वहां भी इनसान नहीं सिस्�
15:01पानी आते हैं और कई मजदूरों की मौत भी होती है इसलिए यह कहना गलत होगा कि भारतियों को गर्मी
15:05का नुकसान कभी होता ही नहीं भारत में भी हीट स्ट्रोक होता है भारत में भी मरते हैं और यह
15:10दुखद है लेकिन अगर कंप्यार किया जाये तो अगर यहां पर 1% है
15:14तो वहां पर 10%, 20%, 50% का रिश्यो है यही सबसे बड़ा मिथक है जो से तोड़ना जरूरी है
15:20अक्सर कहा जाता है कि भारतियों तो 50 डिक्री में आराम से काम कर लेते हैं लेकिन सच्चाइज से अलग
15:26है भारत में हर साल 1000 लोगों की लूट से मौत होती है चपेड में आते हैं क
15:43विश्यो स्वास्त संगठन यानि की WHO और IPCC दोनों लगतार चितावनी दे रहे हैं कि जलवायू परिवर्तन के कारण भविश्य
15:51में भारत भी पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहेगा जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा और हवा में नमी बढ़ेगी वैसे वैसे शरीर
15:57की प्र
16:13भूल होगी क्योंकि ये भविश्य की वो तस्वीर हो सकती है जिसकी दस्तक भारत के दर्वाजे पर भी सुनाई देने
16:19लगी है सवाल अब यह नहीं है कि भारत के गर्मी ज्येल सकते हैं या नहीं असली सवाल यह है
16:24कि क्या हमारे शहर हमारी स्वास्ता हमारी तयारी और आने
16:42अप्डेडे लाप्ट है अप्डवानाओी प्यावार लाप्ट है
Comments

Recommended