00:00यूरोप, जुसे दुनिया आधुनी के स्वास्त वेवस्था, बहतर जीवन स्थर और विकसित इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक मानती है, वही यूरोप इंदनों
00:09ऐसे गर्मी से जबुच रहा है, जुसने कुछ ही दिनों में हजारों परिवारों की दुनिया उजारती है।
00:15फ्रांस के अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस की कतारे हैं, इटली के शहरों में दोपहर के समय सडके लगभग खाली हो
00:21चुकी हैं, स्पेन और पुर्तगाल में प्रिशासन लोगों से घरों से बाहर ना निकलने की अपील कर रहा है। जर्मनी
00:28जैसे देश जहां कभी 30 डि�
00:33करी को जहां हीट वेव कहा जाता था, वहां थर्मा मीटर 40 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच चुका है।
00:40विश्व स्वास्त संगठन और यूरोप की कई स्वास्त एजंसियों के शुरुवाती आकलनों के अनुसार जून के अंतिम सप्ताह में इस
00:46बिशुन कर्मी से ल�
01:02मध्य भारत और कई इलाकों में हर जगे 45-48 डिग्री और इसके साथ ही ये भी लिखा रहता है
01:08कि फील्स लाइक 50 फील्स लाइक 51 यानि कि जितनी होती है उससे 3-4 डिग्री ज्यादा लोग परेशान जरूर
01:15होते हैं हीट वेव की चितावनिया भी जारी होती है लेकिन यूर
01:31जारों साल का विकास क्रम हमारी जीवन शेली हमारे घरों की बनावट हमारी रोजमर्रा की आदते जिम्मिदार हैं और सबसे
01:39वड़ा सवार अगर जलवायू परिवर्तर ही इस रफ्तार से बढ़ता रहा तो क्या भविश्य में भारत भी यूरोप जैसी स्तिती
01:45का सामना करे
01:59और आज की इस पूरी कहानी को इस पूरी स्टोरी को हम दो पार्ट में समझेंगे पहला पार्ट होगा हीट
02:07एक्लामिटाइजेशन जेनेटिक्स बनाम अडापटेशन इसमें हम जानेंगे भारतिय शरीर के बारे में स्वेटिंग का साइंस जानेंगे एवल्यूशन और य�
02:28अगिसिसतार से जानेंगे कि गल्फ देशों में भारतिया कैसे 50 डिईग्री सील्शेस में भी काम करते हैं उरोप के सरदी
02:34में कैसे आखिर हो क्या रहा है
02:50क्योंकि बैज्ञानिक इसे गर्मी नहीं कह रहा है बलकि एक स्ट्रीम हीट इवेंट कह रहा है यानिकि अत्यधिक तापिय आपदा
02:56मान रहे हैं
02:57अंतराश्ट्य मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस बार यूरोप में अफरीका से आने वाली गर्म और शुस्क हवाएं समुदरी तापमान में
03:04बढ़ोतरी और जलवायू परिवर्तिन के सयुक्त प्रभाव ने कई देशों में तापमान को सामाने से कई डिगरी उपर उ�
03:25लेकिन यूरोप के कई शहरों में इस बार रात का तापमान भी 30 डिगरी से कम नहीं पहुंच रहा है
03:30यानि शरीर को ठंडा होने का आवसर ही नहीं मिल रहा है लगतार कई दिनों तक यहीं स्तिति बनी रह
03:37रही और लाखों लोग बिन राहत के उसी गर्मी में जीने को मजब
03:54तो हमारा शरीर सबसे पहले पसीना निकाल कर खुद को ठंडा करने की कोशिश करता है अगर यहीं प्रक्रिय सफल
04:00हो जाए तो शरीर का आंतरिक तापमान लग भग 37 डिगरी सिल्सियस पर बना रहता है लेकिन अगर गर्मी बहुत
04:06ज्यादा हो हवा गर्म हो वातावरन में न
04:22कर आते हैं उल्टी तेज होती है फिर धड़कन बढ़ने लगती है और ब्रहम की स्तिती भी पैदा हो सकती
04:27है अगर समय रहते इलाज ना मिले तो शरीर का तापमान 40 डिगरी सिल्सियस से उपर पहुंच सकता है इसे
04:33हीट स्ट्रोक कहा जाता है इस सबस्था में मस्तिष्क प
04:51जवान भी थे बच्चे भी थे लेकिन बुजर्ग ज्यादा थे वह लब्बे समय से चेतावनी देता रहा है कि गर्मी
04:56से होने वाली मौतों में सबसे अधिक जोकिम 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में और हिदय रोगियों में
05:02मधुमें के मरीजों में और अकेले रहने �
05:05पाले लोगों को होता है प्रांस और इटली जैसे देशों में बड़ी संख्या में बुजर्ग अकिले अपार्टमेंट्स में रहते हैं
05:10कई लोगों के पास परिवार नहीं होता जो समय पर पानी पिलाए डॉक्टर बुलाए या फिर उन्हें ठंडी जगे ले
05:16जाए यही का
05:29शरीर का तापमान पूरी दुनिया में लगभग एक जैसा है तो भारत में लोग 45-48 डिग्री तक की गर्मी
05:36में अब एक शाकृत बेहतर तरीके से कैसे जी लेते हैं
05:39क्या सचमुच हमारे शरीर में कोई जैविक बदलाव है या इसका जवाब हमारी हजारों साल पुराने जीवन शैली और विकास
05:47क्रम में छिपा है
05:48इसी सवाल का जवाब हमें विज्ञान के सबसे रोचक अध्याय तक ले जाता है और वहीं से शुरू होती है
05:54इस कहाने की सबसे दिल्चस्प यात्रा
05:57तो क्या इसका मतलब है कि भारतियों के शरीर में ऐसी कोई सुपर पावर है जो उन्हें यूरोप के लोगों
06:03से ज्यादा गर्मी सहने के लायक बना देती है
06:05सोशल मीजिया पर अक्सर ऐसे दावे किये जाते हैं कि भारतियों के जीन्स अलग हैं इसलिए उन्हें गर्मी कुछ नहीं
06:10बिगाड सकती उनका लेकिन जब हमने विज्ञानी के शोदों को खंगाला हमने जब रिसर्च किया तो तस्वीर अलग नहीं अब
06:18तक नेचर, दे लैं
06:32मौजूद है जो उन्हें जन्म से यूरोप के लोगों की तुलना में अधिक गर्मी सहने की शक्ती देता है क्योंकि
06:38बारतियों तो अधिक सर्दी भी सह लेते हैं हमारे देश में सर्दी का भी टेंपरेचर कभी पहाड़ों के तरफ जाए
06:44तो माइनस में जाता है गर्मी में
06:47पचास के प्लस जा रहा है तो हमारा शरीर जो हता है भारत भारतवासियों का जो शरीर है सभी तरह
06:52के टेंपरेचर जहिल पाता है यानि कि केवल जेनेटिक्स इस कहानी का जवाब नहीं है असल जवाब दो शब्दों में
06:58छिपा है अद्रेप्टेशन और एक्लाइमिटाइ
07:15जबकि एक क्लाइमिटाइजेशन यानि कि एक ही इनसान का अपने जीवन काल में किसी मौसम के अनुसार खुद को ढाल
07:22लेना उधारन के लिए अगर कोई यूरोपिया वैक्ती 6 महीने भारत में रहे तो उसका शरीर भी धीरी धीर गर्मी
07:27सहने में पहले से बहतर हो जाएगा
07:29वही अगर कोई भारतिया कई साल ठंडे देश में रहे तो उसकी गर्मी जहलने की शमता भी कुछ हट तक
07:35बदल सकती है यानि शरीर सीखता है इनसान का शरीर मौसम के हिसाब से खुद को प्रशिक्षित करता है यही
07:42कारण है कि राजस्थान का एक मजदूर मैं जुन की दो�
07:58प्रशिक्षित करती क्या है वेज्ञानिक बताते हैं कि जब कोई व्यक्ति लगतार कई दिनों तक गर्म वतावरण में रहता है
08:05तो लगभग एक से दो सब्ता के भीतर उसके शरीर में कई बदलाव शुरू हो जाते हैं सबसे पहला बदलाव
08:11पसीने में आता है शरीर पहले
08:28जिससे दिल को और शरीर को ठंडा रखने में कम महनत करनी पड़ती है यानि गर्मी से लड़ने के लिए
08:34शरीर अपनी पूरी मशीनरी को अपग्रेड कर देता है अब आते हैं उस सवाल पर जो सबसे ज्यादा पूछा जाता
08:41है क्या भारतिय ये उरोपियों से ज्यादा पसी
08:58उनका शरीर अकसरकम तापमान बढ़ने पर पी पसीना निकालना शुरू कर देता है यानि उनका कूलिंग सिस्टम जल्दी सक्रिय हो
09:06जाता है दूसरी और जिन लोगों का जीवन ठंडे मौसम में बीता है उनके शरीर को इस प्रक्रिया में थोड़ा
09:11अधिक समय लग सकता है
09:13यही ये समझना भी जरूरी है कि पसीना दुश्मन नहीं बलकि हमारे जान बचाने वाला सबसे बड़ा हत्यार है
09:19सोचिये आपकी कार का इंजन गर्म हो जाए तो क्या होता है उसका radiator अतरिक्त गर्मी बाहर निकालता है ठीक
09:26उसी तरह इंसानी शरीर का radiator है पसीना तवचा से उड़ता है तो वो शरीर की गर्मी अपने साथ ले
09:33जाता है इसी प्रक्रिया को एवोपरेट्टिव कूलिंग कहा
09:36जाता है अगर ये प्रक्रियस सही से चलती रहे तो 45 डिग्री टापमान में भी शरीर का दुरूमी टापमान सामाने
09:43रह सकता है लेकिन यहां एक और वैग्यानिक ट्विस्ट है किवल टापमान ही सब कुछ तैय नहीं करता असली खेल
09:50खेलती है humidity यानि हवा में मौजूद नमी
09:53अगर बाहर 45 डिग्री टापमान है लेकिन हवा सूखी है तो पसीना तेजी से सूख जाएगा और शरीर ठंडा होता
09:59रहेगा प्रोसेस लगतार चलता रहेगा लेकिन अगर टापमान 38 से 40 डिग्री हो और नमी 80 प्रतिशत हो तो पसीना
10:07त्वचा पर ही चिपका रहेगा वो �
10:11जैसे ही ऐसा होता है शरीर का प्राकृतिक एर कंडिशनर फेल होने लगता है इसे वजह से मौसम वैज्यानिक बार
10:18बार वेट बल्ब टेंपरेचर की बात करते हैं ये केवल तापमान नहीं है बलकि तापमान और नमी का संयुक्त माप
10:24है वैज्यानिकों का मानना है कि अगर
10:27वेट बल्ब टेंपरेचर लगभग 35 डिगरी सिल्सियस तक पहुंच जाए तो स्वस्त इंसान भी लंबे समय तक जिवित नहीं रह
10:33सकता क्योंकि उस स्तिति में शरीर चाहे जितना भी पसी ना निकाले वो खुद को ठंडा नहीं कर पाएगा यही
10:40वजह है कि 40 डिगरी का प
10:54जरूर हुए हैं जैसे तुचा में अधिक मिलेनिन जो सूरज की पैरा बैंगनी के रनों से सुरक्षा देता है कुछ
11:01शोद बताते हैं कि गर्म इलाकों में रहने वाली आबादी में शरीर की गर्मी बाहर निकालने की शमता बहतर हो
11:07सकती है लेकिन वैज्ञानिक साफ कहते ह
11:09कि इसका मतलब ये नहीं कि कोई भी आबादी गर्मी से अजेय हो गई है आखिरकार इंसानी शरीर की अपनी
11:16जैविक सीमाएं हैं यानि निश्कर्ष साफ है भारत के लोग इसलिए गर्मी नहीं जेल पाते हैं क्योंकि उनके जीन सूपर
11:23हूमन है बलकि इसलिए कि उनका शरी
11:38के खिलाफ क्यों काम करने लगते हैं ये भी सवाल उठेंगे आप वीडियो तो तमाम तरह के देख रहे हैं
11:42जिसमें सड़क भी पेगलता दिखाई दे रहा है काडियो के टायर पेगलते दिखाई दे रहे हैं वहां के घर सड़के
11:47इमारत हीट वेफ के दौरान मौत का जाल �
11:50बन जाती हैं खिर क्यों और क्यों भारत के पारंपरिक घर पंखे सूती कपड़े और दोपहर की जीवन शैली आज
11:56भी विज्ञान की कसोटी पर सही साबित होते हैं यहीं कहानी का अगला और शायद सबसे चौकाने वाला ध्याय है
12:03लेकिन कहानी यहां खत नहीं हो रही है अ
12:19कि उसके आसपास बना सिस्टम दरसल यूरोप की ज्यादा तर इमारतें ठंड से बचने के लिए बनाई गई थी गर्मी
12:26से लड़ने के लिए नहीं फ्रांस जर्मनी बेल्जियम नीदलैंस और ब्रिटेन जैसे देशों में दशकों तक सबसे बड़ी चुनोती ठंड
12:33थी इस
12:49गर्मी हुई मारतें पूरी रात गर्मी छोड़ती रहती हैं कई शहरों में रात का तापमान 30 टिगरी से नीचे उतर
12:54ही नहीं रहा यानि लोगों के शरीर को आराम करने का मौका ही नहीं मिल रहा अब भारत की तस्वीर
13:00देखिए यहां सदियों से लोग गर्मी के साथ जीना
13:03सीखाए हैं पुराने भारते घरों में उंची छतें बड़े आंगन फुली खिड़कियां और हवा के आने जाने का पूरा इंतिजाम
13:10होता है बेंटिलेशन बनाया जाता है आज भी करोडों घरों में सीलिंग फैन मौजूद है एर कंडिशनर भले हर घर
13:16में ना हो लेकिन प
13:32जारत में गर में शुरू होते ही जिवन शली अपने आप बदल जाती है दोपहर की दूप में लोग बेवजे
13:37बाहर निकलने से बचते हैं गाउ में आज भी कई जगे दोपहर में काम धीमा पढ़ जाता है शेरों में
13:42भी लोग छाया तलाशते हैं सिर ढखते हैं सूती कप�
13:45पहनते हैं और बार-बार पानी पीते हैं यह सब हमें किसी किताब ने नहीं सिखाया यह पीडियों से चली
13:52आ रही समाजिक समझ है और इसके साथ जो किताब पढ़ रहे हैं उसमें अलग से इसके बारे में लिखा
13:56जाता है लेकिन जो किताब नहीं भी पढ़ रहे हैं उनको �
13:59भी इसकी समझ है हमारे खान पार में भी विज्ञान चिपा हुआ है गर्मी बढ़ते ही घरों में छांच बनने
14:04लगती है कहीं लस्ती पी जाती है कहीं आम पन्ना कहीं बेल गशरबद कहीं नीबू पानी कहीं नारियल पाने डॉक्टर
14:11आज ओरस पीने की सला देते हैं लेकिन �
14:12भारतिय समाज सदियों से नमक पानी और दही के जरिये शरीर का इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखता आया है आधुने के
14:19विज्ञान आज इस हाइड्रेशन की बाद करता है उसका एक बड़ा हिस्सा भारतिय जीवन शैली में पहले से मौजूब था
14:25अब एक और जल्
14:41नियम है कई खाड़ी देशों में दोपहर के सबसे गर्म घंटों में आउट्डोर काम रोग दिया जाता है मजदूरों को
14:47नियमित पानी आराम और च्छाया उपलब्द कराई जाती है काम के शिफ्ट सुभे और शाम में बाटी जाती है यानि
14:54वहां भी इनसान नहीं सिस्�
15:01पानी आते हैं और कई मजदूरों की मौत भी होती है इसलिए यह कहना गलत होगा कि भारतियों को गर्मी
15:05का नुकसान कभी होता ही नहीं भारत में भी हीट स्ट्रोक होता है भारत में भी मरते हैं और यह
15:10दुखद है लेकिन अगर कंप्यार किया जाये तो अगर यहां पर 1% है
15:14तो वहां पर 10%, 20%, 50% का रिश्यो है यही सबसे बड़ा मिथक है जो से तोड़ना जरूरी है
15:20अक्सर कहा जाता है कि भारतियों तो 50 डिक्री में आराम से काम कर लेते हैं लेकिन सच्चाइज से अलग
15:26है भारत में हर साल 1000 लोगों की लूट से मौत होती है चपेड में आते हैं क
15:43विश्यो स्वास्त संगठन यानि की WHO और IPCC दोनों लगतार चितावनी दे रहे हैं कि जलवायू परिवर्तन के कारण भविश्य
15:51में भारत भी पहले जैसा सुरक्षित नहीं रहेगा जैसे जैसे तापमान बढ़ेगा और हवा में नमी बढ़ेगी वैसे वैसे शरीर
15:57की प्र
16:13भूल होगी क्योंकि ये भविश्य की वो तस्वीर हो सकती है जिसकी दस्तक भारत के दर्वाजे पर भी सुनाई देने
16:19लगी है सवाल अब यह नहीं है कि भारत के गर्मी ज्येल सकते हैं या नहीं असली सवाल यह है
16:24कि क्या हमारे शहर हमारी स्वास्ता हमारी तयारी और आने
16:42अप्डेडे लाप्ट है अप्डवानाओी प्यावार लाप्ट है
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