00:00चलिए बिना किसी ताखीर के सीधा आज के इस तच्जिये में चलते हैं।
00:03आज हम डेटा, रिपोर्ट्स और हालिया वाकियात के रोशनी में पाकिस्तान के अंदर अवामी और जम्हूरी जगा यानी सिविक स्पेस
00:10की हालत का बिलकुल गेर जानिब दाराना जाहिजा लेने वाले हैं।
00:43पाकिस्तान के सबसे बड़े सैटरिस्ट अनवार मकसूद के बारे में अच्छानक अफवाहें पहलने लगी और उन्हें खुद आके बताना पड़ा
00:51के वो बिलकुल ठीक हैं। आखिर क्यों।
00:53पहला हिस्सा तंज निगार के अखवा की अफवाह।
01:28लूस टॉक टीवी स्क्रीन्स पर राज करता था।
01:30अनवार मकसूद को वजाहत करनी पड़ी कि उनका तंज इसलाह के लिए होता है तोहीन के लिए नहीं।
01:34ये वाज़े करता है कि आज़ाद्य इजहार का पैमाना अब कितना बदल चुका है।
01:41अब थोड़ा तस्वीर को बढ़ा करके देखते हैं।
01:44आलमी इदारे सिविकस मॉनिटर की हालिया रिपोर्ट पर नजर डालें तो उन्होंने पाकिस्तान को रिप्रेस्ट यानी दबाओ का शिकार करार
01:53दिया है।
01:53और ये कोई छोटी बात नहीं है। उनकी रेटिंग में ये दूसरी सबसे खराब कैटेगरी है।
01:59सीधे अलफाज में इसका मतलब ये है कि अवामी अजादियों और हुकूक के हवाले से मसलसल ऐसी करवाईया हो रही
02:06हैं जो बेन अलगवामी मियार के मताबक सच में तश्वीशनाक हैं।
02:10तो यहां सबसे एहम सवाल ये पैदा होता है कि आखिर निशाना कौन बन रहा है।
02:40तीसरा हिस्सा डिजिटल और मीडिया क्रैक्टाउन अब जहन में आता है कि आखिर ये दबाव कानूनी तोर पर लागू कैसे
02:48होता है।
02:48तो यहां पीका कानून का जिकर करना बेहद जरूरी है प्रिवेंशन अफ एलेक्ट्रोनिक क्राइम्स आक्ट।
02:54रिपोर्ट के मताबिक ये कानून अफॉरिटीज को इंटरनेट कॉंटेंट ब्लॉक करने और हटाने के बेहद वसी इख्तियारात देता है।
03:01और तो और जैनवरी दोहजार पचीस में इसमें मजीद तरामीम कर दी गई अब गलत मालूमात पहलाने को जुर्म करार
03:09देकर तीन साल तक की कैद और जुर्माने की सजा मतारिफ करवाई गई है।
03:13इंटरनेशनल राइट्स ग्रूप्स का मानना है कि ये इख्तियारात सीधा सीधा आजादिये इजहार को दबाने के लिए इस्तमाल हो रहे
03:19हैं।
03:20और इस कानून की शिदत का अंदाजा लगाना हो तो इस सत्रा साल की कैद की सजा को देखें।
03:26इंसानी हकुक की वकील इमान जैनब मजारी और उनके शोहर हादी अली चठा का केस सामने हैं, जिनने जैनवरी दोहजार
03:34पच्चिस में पीका के तहट उनकी मुख्तलिफ सोशल मीडिया पोस्ट पर सत्रा साल कैद की सजा सुनाई गई।
03:40ये बताता है कि ये सिर्फ कागजी कानून नहीं रहा, बलके इसके आम जिंदगी पर कितने संगीन नतीजे मुरतब हो
03:47रहे हैं।
04:14ये साला डेटा चीख चीख कर बताता है कि डिजिटल दुनिया में सहाफत की अजादी अब कितनी महदूद हो चुकी
04:21है।
04:40के जरीए सजाओं में इजाफा कर दिया गया, नवेंबर 2024 में एहतजाज को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर इंटरनेट
04:47ब्लाक आउट्स किये गये।
04:48और फिर जैनुरी 2025 में वही PCA की संगीन तरह मीम।
04:53एक के बाद एक, ये तेजी से बदलता हुआ तसलसल दिखाता है कि मालूमात और अवामी इज्टिमा दोनों को किस
05:00तरह बकाइदा मनसूबा बंदी से रोका गया है।
05:03लेकिन इन तमाम सख्त कवानीन के बावजूद लोग हकाइक में सडकों पर निकल रहे हैं।
05:09एक तरफ खवतीन के हुकूक के लिए होने वाला औरत मार्च है जिसके रास्ते में रुकावटे खड़ी की जाती है।
05:15दूसरी तरफ महंगाई के खिलाफ आम, अवाम और किसानों के इहतिजाज है।
05:20डेटा क्या कहता है? डेटा कहता है कि इन इहतिजाजों को रोकने के लिए क्रिमिनल प्रिसीजर कोड की दफ़ा 144
05:27का बार बार इस्तमाल किया जाता है।
05:29यानि पांच या इस से ज्यादा अफराद के जमा होने पर सीध ही पाबंदी। लेकिन ग्राउंड रियालिटी ये है कि
05:36ये मुझाहरे रुक नहीं रहें।
05:38अब आते हैं लिसानी अकलियतों की तरफ।
05:41यहां डॉक्टर महरांग बलोच और बलोच ये जहती कमेटी का जिकर एहम है।
05:46इनकी जानिब से मुनज़म किये गए पुर अमन एतजाजों पर जो सخت रियासती रद्दे अमल सामने आया वो रिपोर्ट का
05:52एक बड़ा हिस्सा है।
05:53रिपोर्ट में बाकाइदा मैस अरेस्ट्स, मसलसल निगरानी और यहां तक के देश्यतगर्दी के चार्जिस का जिकर मोजूद है।
05:59इन हालात ने अवामी रापतों और पीसफुल अक्टिविजम को इंतहाई मुश्किल बना दिया है।
06:05पांच्वा हिस्सा खौफ का हत्मी असर यह तीन महीने का हिंसा यह बहुत कुछ वाज़े कर देता है।
06:36और दोस्तों यही वो खौफ है जो इस कहानी को वापस घुमा कर अन्वर मकसूद की तरफ ले आता है।
07:05पांच्वासती बयानिये की तैसी करना यह एक बहुत ही बड़े और गहरे माशरती बदलाओ की मिशान देही करता है।
07:11उन्होंने उसी प्रेस कांफरेंस में एक बात और कही।
07:15मेरे पास कलम है हत्यार नहीं यह सिर्फ एक जुमला नहीं है।
07:19यह वाकिया पूरी सिविकस रिपोर्ट का एक जिन्दा जीता जाकता सुबूत है।
07:24यह चिलिंग एफेक्ट यानी खौफ की फिजा का एक मुकमल खुलासा है कि किस तरह इन पाबंदियों, कवानीन और दबाव
07:31ने मौशरे में अज़ाद सोचने और बुलने वाले जहनों को भी एतियाद बरतने पर मजबूर कर दिया है।
07:37आखिर में ये तजिया एक बहुत ही एहम सवाल पर आकर रुकता है।
08:07इसे बड़ी खीमत हमेशा आम इनसान को ही चुकानी पड़ती है।
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