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  • 11 minutes ago
दिल्ली हाई कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप पर बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से बालिग लोगों के बीच लिव-इन रिलेशनशिप शादी जैसा ही है. उनकी पसंद में न तो माता-पिता और न ही दोस्त दखल दे सकते हैं या उनकी जान को खतरा पहुंचा सकते हैं. कोर्ट ने लड़की के परिवार से धमकियां झेल रहे एक लिव-इन जोड़े को पुलिस सुरक्षा देने का आदेश दिया. आगे कोर्ट ने कहा कि बालिग होने और अपनी मर्जी से साथ रहने के कारण, उन्हें किसी के दखल के बिना अपनी पसंद का साथी को चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है. कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से शादी करने वाले बालिग लोगों की शादी को उनकी जाति, पंथ, रंग, धर्म या आस्था से अलग मान्यता दी जाती है. कोर्ट ने कहा कि संविधान से मिले उनके मौलिक अधिकारों को सामाजिक नैतिकता और पूर्वाग्रहों के आधार पर सीमित करना, किसी व्यक्ति की अपनी निजी पहचान को छीनने जैसा है.

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Transcript
00:04दिली हाई कोट ने लिविन रिलेशनशिप पर बड़ा फैसला सुनाया है।
00:30किसी के दخल के बिना अपनी पसंद का साथी को चुनने और उसके साथ रहने का पूरा अधिकार है।
01:06याचिका करता ने कोट को बताया कि उनकी उमरत 30 साल के करीब है।
01:10वे कुछ समय से साथ रह रहे हैं और शादी भी करना चाहते हैं लेकिन लड़की के पिता और भाई
01:14उनके रिश्टे से खुश नहीं थे और लगातार उन्हें मारने की धमकिया दे रहे हैं।
01:18इसी याचिका बर कोट ने ये एहम फैसला सुनाया।
01:25झाल
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