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नक्सल प्रभावित इलाकों के युवा आखिर चाहते क्या थे?
Sports Authority of India के DDG और पूर्व IPS अधिकारी Mayank Srivastava ने छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में अपने अनुभव साझा किए।
उनके मुताबिक, वहां के युवाओं की सबसे बड़ी चाहत थी — शांति, आज़ादी और तरक्की। वे बिना डर और दबाव के अपने गांव में रहना और आगे बढ़ना चाहते थे।
उन्होंने जबरन भर्ती, कथित जन अदालतों, युवाओं के पलायन और बदलती आकांक्षाओं पर भी बात की।

“हमें शांति कैसे मिले और हम प्रगति कैसे करें?” — यही युवाओं की सबसे बड़ी इच्छा थी।

Watch the full Episode - https://youtu.be/ccox4uudYWw?si=Go11l9MtAVaC2HKk


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Transcript
00:00सर, चत्यसगड के नकसल अफेक्टेट ट्राइबल एरियास में काम करते हुए आपने यूद को बहुत क्लोजली देखा है।
00:06उनके एस्पिरेशन और फरस्पिरेशन को लेकर आपने क्या सीखा?
00:09उसी मुझे नहीं लगता कि उनके aspirations और frustration हमसे बहुत ज्यादा अलग है
00:15CPI मावेस्ट आपने सुना होगा Communist Party of India मावेस्ट तो ये आधी political है आधी military है और शुरुवात
00:23में ये 90% military होती है 10% political होती है
00:27और साथी साथ इस 90% military और 10% political के साथ एक propaganda activity चलते रहती है जो
00:37कि सबसे ज्यादा होती है
00:38मतलब उसका अलगी एक कहने कि उसकी अलगी एक regime है उसका अलगी एक तरीका है
00:44तो वो इन सबसे जब पूरी उस जगह की जनता तरस्त थी प्रताडित थी शुरू में उनको जो भी लगता
00:55हो लेकिन धीरे धीर उनको समझ में आ गया था
00:57कि ये कुछ और चीज है ये वो चीज नहीं है जो ये लोग claim करते हैं जिसका दावाय करते
01:02हैं बिल्कुल वो नहीं है
01:03तो वहाँ पर जो यूद था ना उसकी सबसे बड़ी जो yearning थी कहलें सबसे बड़ी इच्छा थी वो थी
01:11शान थी कि वो कैसे मिलेगी
01:13यार हम क्यों मजबूर हैं कि हम मावादी आते हैं और हमें हमारे साथ propaganda करते हैं हमें मजबूर करते
01:22हैं maximum recruitment उनके forced recruitment है कोई अपनी मर्जी से नहीं जाता
01:27अब वो system उन्होंने ऐसा बना लिया था गाउंस तर पे उनका व्यक्ति हर जगाए एक गाउं के एक व्यक्ति
01:33का हिसाब किताब रखते थे अगर कोई व्यक्ति गाउं से शहर आया है मैं पर एक्जामपल नरायनपूर में था अगर
01:42कोई गाउं का व्यक्ति शहर आया है तो �
01:45के पास एक खबर रहती थी कि यह शहर गया है अगर वो 24 घंटे के अंदर नहीं लोटा तो
01:50उसके साथ एक तथा कथित जन अदालत होती थी जिसमें जन तो होता नहीं है अदालत भी नहीं होती है
01:55वो डिक्टेटर्शिप होती है कि वह तू गया था यानि तू पुलिस से मुख
02:14होनार पढ़ गई तो उसको होस्पिटल में रहना पढ़ गया है जब वह वापस गया गाहों में तो। दिस्सकी
02:26जाष्ण परक होई कि क्यों गया था क्यों रुका था त। तो इस ने बताया लेकिन इनको यकीन नहीं रहा
02:32क्यों कИ अगर नक्सलियों का सबसे बढ़ा
02:34दुश्मन अपकोर्स मुख्बिर है अगर पुलीस को उनके मुव्मिंट पता चलते रहेंगे तो वो जल्दी खत्म हो जाएंगे तो इसलिए
02:40वो बहुत उसका हिसाब किता बहुत रखते हो बहुत दर्दनाक मोत देते हैं तथाकतित मुख्बिर का यह अलग बात है
02:47कि आज त
03:02बहुत का यहां परिप्रेक्ष में देखो इस बैकग्राउंड में देखो तो उसका यह था कि यह शान्ति कैसे मेलेगी हम
03:10कैसे गाओं में रह सकते हैं नक्सली सहमें जो परदस्ती भरती करते उनके इस आप से चलना पड़ता है तो
03:15वो क्या करता था वह बहुत चला जाता �
03:31उसमें करके फिर चला जाता था तो वहां पर उनके सबसे बड़ी आकामशा थी कि शांती कैसे मिले और हम
03:38प्रोग्रेस कैसे हो इसका एक कहने कि फिलिप साइड भी था वह बाहर गये तो उन्होंने बाहर की दुनिया भी
03:43देखी और उन्होंने देखा कि उन्नति क्या है प्रग
03:58वर्धन भी हुआ तो वहां पर सबसे बड़ा जो था उनको एक सुरक्षा का भाव देना और उस सुरक्षा के
04:05भाव के साथ पैदा होता था उनको विकास की मुख्य धारा में ले आना तो वह कारे हम लोगों ने
04:12करने का प्रयास किया काफी हद तक सफल रहे अब तो आप जा
04:27सकते हैं कि नच सलीए खत्म हो चुका है
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