00:22एक विश्रु विद्याले जो देश के टेक्सपेयर्स के पैसे से चलता है
00:27और एक ऐसा नाम जो 2020 दिल्ली रैट्स के एलेज़ेड लार्जर कॉंस्पिरेसी केस में आरोपी है
00:34और फिर उसी नाम पर जेन्यू में एक पूरा इवेंट और्गनाईज होता है
00:38इस दोरान कई छात्र प्रोफेसर्स मंच पर पहुँचकर उसके फेवर में बात करते हुए नजर आते हैं
00:47लेकिन जब ABVP ने इसका विरोध किया तो सवाल सिर्फ उमर खालित का नहीं रहा
00:52सवाल बन गया क्या पब्लिक फंडड यूनिवरस्टीज में हर वचार को मंच मिलना चाहिए
00:57या कुछ मामलों में कैंपस को अपनी सीमाएं अब तै कर लेनी चाहिए
01:02आज इसी पूरे विवाद को फैक्ट के साथ समझेंगे
01:05कुस दिन पहले जवाहलाल नहरू यूनिवरस्टी में फॉर्मर जेननीव स्टूडिंट उमर खालित की किताब
01:11फ्रेक्चिर्ड कम्यूनिटीज आदिवासी हिस्ट्रीज और पॉलिटेक्स ऑफ पावर पर डिसकशन आयज़ित किया था
01:17कारिक्रम JNUSU की ओर से आयज़ित किया गया और इसका थीम इंडिजिनस पीपल्स और आदिवासी इशूज से जुड़ा बताय गया
01:25लेकिन कारिक्रम से पहले ही विवाद शुरू हो गया
01:28JNU Administration ने प्रिपल SI औरिटोरियम की वुकिंग कैंसल कर दी
01:33युनिवरस्टी ने कहा कि प्रोग्राम की फुल फैक्ट्स पहले डिस्ट्लोज नहीं की गई थी
01:37ABVP ने इवेंट का वरोद किया और इसे उमर खालित को प्लाटफॉर्म देने के रूप में देखा
01:42बाद में डिसकॉशन कैंपस के खुले एरिया में हुआ
01:45जहां ABVP मेंबर्स ने प्रोटेस्ट और स्लोगन्स को बुलंद किया
02:02सबसे पहले तो आप इस पूरे वीडियो को देख लीजे किस तरह से प्रोफेसर बच्चों को डरा रहे हैं
02:08धमका रहे हैं उन्हें चुप रहने की बात कह रहे हैं
02:35सही बात है आप अपनी आवाज बुलंद कर सकती है
02:38लेकिन जब आत बच्चों को अपनी राय रखने की है
02:41तो उसका भी एक सीमित दाइरा बन जाता है
02:45सोशल मीडिया पर वीडियो वाइरल हुई तो कई लोगों ने अपनी राय भी रखी
02:49एक यूजर ने लिखा उमर खालिद इन जेल फॉरिवर औन इवर
02:53एक यूजर ने लिखा JNU needs to be bulldozed, period
02:57zero positive, all negative contribution towards nation building
03:02एक यूजर का कहना है कि मुस्लिम कॉल उमर खालिद देर आइडल
03:06बट आई हैव नेवर सीन देम कॉल अब्दूल कलाम देर आइडल
03:10एक यूजर ने कहाँ, we build this country, old lady
03:14और उन्होंने एक expression के images लगाए
03:17कुछ यूजर का कहना है कि we taxpayers are feeding their leftist professors
03:22should be thrown out, government should close JNU
03:26इस सवाल का जवाब तुम्हें आप पर छोड़ती हूँ
03:29आप नीचे comment section पर अपने विचार जरूर रखेगा
03:32लेकिन अब हम बात करेंगे कि आखर उमर खालिद हैं कौन
03:35उमर खालिद JNU के former student और activist रहे हैं
03:39उनका नाम 2016 के JNU controversy के बाद
03:42national politics में काफी चर्चाओं का विशे रहा
03:45ये वही चात्र हैं जिन्होंने भारत के टुकडे टुकडे हूंगे का नारा बुलंद किया था
03:51अब आप ही बताईए जो भारत के टुकडे टुकडे करना चाहता है
03:55उन्हें सपोर्ट करने के लिए लोग पीछे क्यों पड़े हुए हैं
04:05आखर ऐसी कौन सी आइडियोलोजी है जिसकी चर्चा इस मंच पर की जा रही थी
04:10और विरोध करने पर इस तरह का रुख अपनाया गया
04:15वहीं आपको बताते चलें कि सबसे गंभीर मामला तो 2020 दिल्ली राइट से जुड़ा हुआ है
04:21दिल्ली पुलिस ने उन्हें UAPA के तहत उस लारजर कॉंस्पिरेसी केस में आरोपी बताया
04:27जुसमें फिबररी दोहजार चब्विस के डेली राइट की कतिस साजिश की जाच की गई
04:32खालित को सेप्टेमबर दोहजार बीस में गरफतार किया गया
04:36इस मामले में प्रोसेक्यूशन का आरोप है कि डेली राइट केवल अचानक भड़की हिंसा नहीं थी
04:42बल्कि एक लारजर कॉंस्पिरिसी का हिस्सा थी और उमर खालित की कतित भूमी का उस कॉंस्पिरिसी से जुड़ी थी
04:48इसी वज़ा से उन पर अनलॉफूल अक्टिविटीज प्रवेंशन एक्ट यूएपी के तहत मामला चल रहा है
04:55यूएपी में बेल का कानूनी थ्रेशोल सामाने क्रिमिनल केसे की तुलना में काफी कठूर है
05:00इसी लीगल फ्रेमवर्क के कारण बेल प्रोसीडिंग्स इस मामले का सबसे बड़ा मद्दा बनी हुई है
05:06खेर ये सवाल भावनाओं से जुड़ा प्रिंसिपल का है
05:10अगर कोई व्यक्ति किसी गंभीर क्रिमिनल केस में एक्यूस्ड है तो उसके बारे में फाइनल जज्जमेंट अदालत ही देगे
05:16लेकिन एक पब्लिक फंडेड उनिवरस्टी को किसी अक्यूस्ड व्यक्ति के विचारों, किताबों या पॉलिटिकल लेगसी को प्लेटफर्म देने से पहले
05:24एक सवाल जरूर पूछना चाहिए
05:26क्या ये अकैडमिक डिसकेशन है ये किसी कॉंट्रोवर्शियल पॉलिटिकल फिगर का ग्लॉरिफेकेशन
05:31कॉमेंट जरूर करिएगा
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