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  • 1 day ago
हरिद्वार में कूड़े का हाहाकार! 4.8 करोड़ भक्तों के बाद 8000 MT कचरा

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00:00हरहर महादेव के जैकारे गंगा में आस्था की डुकी, कंदों पर कावर और करोरों शिव भग्त का सैलाफ।
00:06पिछले बारा दिन की कावर यात्रा के बाद हरी द्वार की तस्वीर देखकर सवाल उठ रहे हैं।
00:13आस्था के नाम पर ये कैसी लापर वाही। करीब चार करोर असी लाख श्रक धालू हरी द्वार कहुँचे। गंगा में
00:22डुकी लगाई, पवित्र जल भरा और अब जाते जाते शहर में छोड़ गए।
00:26हजारों टन कच्रा, अनुमान है कि इस बार हरी द्वार में साथ से आठ हजार मिट्रिक टन से ज्यादा कूड़ा
00:35जमा हो गया है। और ये कूड़ा किसी एक जगे नहीं, घाटों पर, मेला ग्राउंड में, पार्किंग एरिया में, कावर
00:43मार्गों पर और गंगा किनारे त
00:56धेर कही जगे कमर तक पहुँच गया है। अब प्रशासन ये पता लगाने के लिए ट्रून की मदद ले रहा
01:02है कि कहां कहां सबसे ज्यादा कच्रा जमा है और किन इलाकों में तुरंट सफाई की जरूत है। लेकिन सफाई
01:09के दौरान जो तस्वीरे सामने आई हैं उन्हों
01:12ने चिंता और बढ़ा दी है। कपड़ों और प्लास्टिक के अलावा बड़ी संख्या में बूतले मिली। सफाई कर्मियों के मताविक
01:19हरकी पाड़ी इलाके के चेंजिंग रूम में बड़ी संख्या में बूतले रखी मिली। उनका आरोप है कि गंगा जल लेने
01:27आए काव
01:27पाड़ियों ने इन बूतलों में पिशाप करके वहीं जोड़ दिया। उनका कहना ये भी है कि अगर ऐसा हुआ तो
01:35यह हर की पाड़ी हरिद्वार तीर्त और कावरियों की मर्यादा के खिलाफ है। यहां तक कि मैला चेंजिंग रूम में
01:42भी पिशाप की बूतले लटकी मि
01:44सवाल ये है कि आखिर ये कच्रा यहां कैसे पहुचा। क्या श्रद्धालू के लिए प्रयाप्त डस्टवीन नहीं थे या फिर
01:51डस्टवीन मौजूद होने के बावजूद कच्रा वहीं छोड़ दिया गया। क्योंकि आस्था सिर्फ गंगा में डुक्की लगाने का नहीं
01:57जिस गंगा को मा कहकर पूजा जाता है उसके किनारे का च्रा चोड़ना उसी आस्था के खिलाफ है और हरे
02:05द्वार सिर्फ सद्धालू का शहर नहीं यहां और भी लोग रहते हैं इन लोगों को इसी सड़क से गुजरदा हैं
02:12इसी हवा में सांस लेनी हैं इसी शहर में रहना
02:16और इसी गंगा के किनारे अपनी सिंद्धी बितानी है पिछले 24 घंटे से नगर निगम के कर्मचारी लगातार सफाई में
02:23जूटे हैं घाट हो पार्किंग हो या कावर मार्क हर जगह से कच्रा हटाने की चुनौती सामने है प्रशासन ने
02:30इस बार पहले से ही अत्रिक्ट कर
02:45हुआ था यानि सवाल सिर्फ इस साल का नहीं हर साल वही तस्वीर दोहराई जा रही है हाला कि इस
02:52बार सफाई विवस्ता में तकनीक का इस्तिमाल बढ़ाया गया है
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