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पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार की मैंडेटरी E20 पेट्रोल पॉलिसी के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी सरकार का तर्क है कि इससे गाड़ियों के इंजन, माइलेज और उपभोक्ताओं की जेब पर बुरा असर पड़ रहा है। लेकिन क्या E20 का विरोध सिर्फ गाड़ियों और पेट्रोल की कहानी है, या इसके पीछे कोई गहरी सियासत छुपी है?

इस विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में हम E20 विवाद के उस पहलू की पड़ताल कर रहे हैं जिसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है—पंजाब का किसान। पंजाब लंबे समय से अत्यधिक पानी की खपत वाले धान के चक्र से निकलकर 'क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन' (फसल विविधीकरण) की कोशिश कर रहा है, जहाँ इथेनॉल ब्लेंडिंग और मक्के की बढ़ती मांग ने किसानों को एक नया और स्थिर बाज़ार दिया है।

इस वीडियो में जानिए:
E20 का इतिहास: 2006 (UPA-1) से लेकर 2025-26 के 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य तक का सच
अमृतसर के किसानों, आढ़तियों और राइस मिलर्स की चिंता: क्या मक्के के दाम ₹2,100 से गिरकर ₹1,500 रह जाएंगे?
केंद्र सरकार का पक्ष: वाहनों की क्षमता और इंजन फेलियर के दावों की सच्चाई
AAP की राजनीति बनाम किसान हित: अरविंद केजरीवाल का विरोध प्रदर्शन और विधानसभा प्रस्ताव के पीछे का सच

क्या मान-सरकार का यह कदम उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा है या केंद्र-विरोधी राजनीति? अपनी राय कमेंट सेक्शन में जरूर साझा करें!



#PunjabE20Controversy, #E20Petrol, #AAPGovernment, #PunjabFarmers, #BhagwantMann

~HT.178~GR.122~PR.100~VG.HM~

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Transcript
00:06पंजाब विधान सभा ने E20 पेट्रोल के खिलाफ प्रस्ताव पास कर दिया है सरकार का तर्क है गाड़ियों की कंपाटिबिलिटी
00:15माइलेज और कुंजूमर्स की चंता लेकिन सवाल दूसरा है क्या E20 सिर्फ और सिर्फ पेट्रोल की कहानी है
00:23सवाल इसलिए भी लाजमी है क्योंकि पंजाब के खेतों में इसकी कहानी मक्का, गन्ना, क्रॉप डाइवर्सिफिकेशन और किसान की आमदनी
00:34से भी जोट चुकी है
00:39चार अगस्त को पंजाब विधान सभा ने केंद्र की मैंदेटरी E20 पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए रेजिलूशन पास किया
00:46प्रस्ताव में उन वाहनों को लेकर चिंता जताए गई जो E20 के लिए डिजाइन या सर्टिफाइड नहीं है
00:53पंजाब सरकार ने वहिकल कंपाटिबिलिटी और कंजूमर चॉइस का सवाल उठाया है
00:59लेकिन E20 को समझाने के लिए थोड़ा पीछे जाना होगा
01:04भारत में एथनॉल ब्लेंडिंग की शुरुआत आज की सरकार से नहीं हुई
01:13UBA1 के समय में साल 2006 से 5 प्रतिशत एथनॉल ब्लेंडिंग किया जा रहा है
01:192018 की बायो फ्यूल्स पॉलिसी में 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष 2030 रखा गया था
01:27लेकिन इस लक्ष को समय से पहले ही यानिकी 2026 तक प्राप्त कर लिया गया
01:34भारत ने 2026 में और सतन 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल कर ली
01:40ये लक्ष कोई आनन फानन में नहीं हासिल किया गया
01:43बलकि इसके लिए सरकार ने आटो मूबील निर्माता कंपनियों के सहयोग से तयारियां की
01:48और ये सुनिश्चित किया गया कि एप्रिल 2023 के बाद आने वाली सभी वाहन E-20 कंप्लायंट हो
02:00पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार ने प्रस्थाव में जिन चिनताओं को प्रकट किया है वो इसका एक पक्ष हो
02:07सकता है
02:08हाला कि केंद्र की सरकार ने उस पर लोगसभा में अपना पक्ष रख दिया है केंद्र सरकार का कहना है
02:15कि E-20 के लिए कालिबरेटिड वहेकर्स में
02:18efficiency impact सीमत है और बड़े पेमाने पर इस्तेमाल के बावजूद widespread engine failure का verified evidence नहीं मिला है
02:28लेकिन इस सवाल का दूसरा पक्ष जिसे मान सरकार आसानी से भूल रही है वो है किसान पंजाब लंबे समय
02:38से धान के पानी खपत वाले चक्र से बाहर निकलने के लिए crop diversification की कोशिश कर रहा है
02:45और यहीं ethanol का नया market बन कर सामने आया
02:49हालिया reporting में पंजाब के किसानों और rice millers ने कहा कि ethanol plant से मिलने वाले maze demand ने
02:57किसानों को मक्का की तरफ जाने का भरोसा दिया
03:01ऐसे में पंजाब सरकार के इस कदम पर पंजाब में ही सवाल उठने लगे हैं
03:06ethanol blending जब पिछले दो दश्कों से चली आ रही है तो आप सरकार ने इसके खिलाफ प्रस्ताव अभी क्यों
03:14पारित किया
03:15क्या ethanol उत्पादन से किसानों को होने वाले फायदे के बारे में कोई विचार नहीं किया
03:21पंजाब सरकार के इस अदूर दर्शी कदम के बाद अमरिच सर के किसानों और मिलर्स की हालिया प्रतीक्रियाओं में यही
03:29जंता सामने आई है
03:30अगर ethanol प्रोग्राम धीमा पड़ता है तो मक्का की डिमांड और प्राइसेस पर दबाव आ सकता है
03:42अमरिच सर से आड़तियों ने ये जंता जदाई है कि अगर ethanol डिमांड कमजोर हुई तो मक्का की कीमत करीब
03:492100-2200 रुपे प्रतिक क्विंटल से गिर कर लगभग 1500 रुपे तक जा सकती है
03:55सवाल सिर्फ मूल्यों का नहीं है बलकि फसल विविधता का भी है
04:00अगर किसानों को अत्याधिक पानी की जरूरत वाले धान की फसल से हट कर मक्का की तरफ ले जाना है
04:08तो उसके लिए क्या एक स्टेबल मार्केट जरूरत नहीं है
04:11यहीं से E20 की बहस एकोनॉमिक से पॉलिटिक्स में प्रवेश करती है
04:16आपने E20 को कंजूमर राइट्स और वहिकल ओनर्स के मुद्दे के तौर पर उठाया है
04:22लेकिन सूबे के सियासत को करीब से देखने वालों का कहना है
04:26कि पंजाब जैसे अग्रिकाल्ट्रिल स्टेट में पॉलिसी डिबेट का दूसरा पक्ष मक्का किसान
04:32डिस्टिलरीज और रूरल मारकेट भी उतना ही गंभीर विशय है
04:37इस गड़ी में सबसे बड़ा सवाल यही है
04:40कि क्या पंजाब के किसान के हितों की चंता को किनारे रखते हुए
04:45आप सरकार का E20 विरोध केवल बाहनों के रख रखाव
04:50या उब भोकताओं की पसंद के आधार पर है
04:53या किसी दीगर सियासी चाल से प्रेरित है
04:57E20 को लेकर वहेकर गंपाटिबिलिटी और माइलज पर सवाल वास्तविक पब्लिक डिबेट का हिस्सा है
05:03लेकिन तस्वीर का दूसरा हिस्सा भी उतना ही जरूरी है
05:08पंजाब जैसे ख्रिशी पर आधारित अर्थ विबस्था में एथनॉल प्लांट के लिए फसलों की खरीद के कारण
05:15एकधान, मक्का, गन्ना जैसे अनेक फसलों पर नियूंतम समर्थन, मूल्यो और निशित आई की विकल्प पर क्यों विचार नहीं किया
05:25गया
05:25इस प्रस्ताफ से पहले पंजाब के किसानों, आर्थियों और मील मालकों की राए भी ली गए गया
05:32यहीं से ये रेजिलूशन, विधाई कम और सियासी जादा लगता है
05:37राजनीतिक आलोचुकों का मानना है कि पंजाब की मान सरकार ने आम आदमी पार्थी की चिर परिचित, ड्रामे बास, केंद्र
05:45विरोधी रणनीती के कारण ये प्रस्ताफ पास कराया है
05:49राजनीतिक पंडित अपने तर्क के पक्ष में कहते हैं कि एक तरफ आम आदमी पार्टी के राश्चिय संयोजक अर्विंद केजरिवाल
05:57पीम आवास तक E20 विरोध मार्च का नेत्रित्व कर रहे थे
06:02दूसरी तरफ पंजाब विधान सभा में मुख्य मंत्री भगवन्त मान E20 का मजाक उड़ा रहे थे और उनके वित्य मंत्री
06:11हरपाल सिंग चीमा E20 विरोधी प्रस्ताफ पेश कर रहे थे
06:15मतलब साफ है मान सरकार की चिंता राज के किसानों के हित नहीं पार्टी की वफदारी है पंजाब की असी
06:24चनौती E20 से कहीं बड़ी है राज को धान से बाहर निकलना है किसानों को और तरनेटिव क्रॉप्स चाहिए और
06:34रूरल एकॉनमी को ऐसी पॉलिसी चाहिए जिसमें क
06:39किसान, कंजूमर और इंडस्ट्री तीनों की आवाज हो.
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