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  • 23 minutes ago
देश में धार्मिक शिक्षा और शिक्षण संस्थानों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आई है. कोर्ट ने 14 साल तक के बच्चों को धार्मिक या सेक्युलर शिक्षा देने वाले संस्थानों के रजिस्ट्रेशन, मान्यता और निगरानी की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से साफ इनकार कर दिया है.वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर इस याचिका में दावा किया गया था कि बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे इन संस्थानों में बच्चों को कट्टरपंथ की ओर धकेले जाने का खतरा है. जो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए चुनौती है। इसके अलावा, याचिका में संविधान के अनुच्छेद 30 की व्याख्या को भी चुनौती दी गई थी. हालांकि, जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल पंचोली की बेंच की सख्त टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता को अपनी याचिका वापस लेनी पड़ी. इस पूरे कानूनी मामले और दलीलों को विस्तार से समझने के लिए वीडियो को अंत तक जरूर देखें.

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Transcript
00:28Supreme Court
00:30Supreme Court
00:30की उस याचिका से जुड़ा है
00:32जिसे वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दाखल किया था
00:36याचिका में धार्मिक सिक्षा देने वाले संस्थानों को भी
00:39निगरानी के दाइरे में लाने की मांग की गई थी
00:42सुनवाई के दोरान उपाध्याय ने दलील दी कि धार्मिक सिक्षा देना
00:46अब प्रत्यक्ष रूप से धर्म के प्रचार प्रसार के बराबर है
00:51इसी दोरान बेंच ने टिपड़ी की कि आप लगतार याचिकाएं दायर नहीं कर सकते
00:58कोट के रुख को देखते हुए याचिका करता ने अपनी याचिका वापस लेने का फैसला किया
01:03याचिका में दावा किया था कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे संस्थान है
01:07जो कथित तोर पर बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे है
01:11आरोप था कि धार्मिक सिक्षा की आड में बच्चों को कट्टर पंथ की ओर धकेले जाने का खत्रा है
01:19याचिका में इसे आंतरिक सुरक्षा, सामाजिक भाईचारे, एकता और राश्रिय अखंडता के लिए गंभीर चुनौती बताया गया
01:28हाला कि ये याचिका में लगाए गए आरोप और दलीले हैं, जिन पर सुप्रीम कोट ने इस सुनवाई में कोई
01:36फैसला नहीं दिया
01:39याचिका में सम्वेधान के अनुच्छेद 30 की व्याख्या को भी चुनौती दी गई थी
01:44अनुच्छेद 30 अल्प संख्यकों को अपनी पसंद के सैक्षिरिक संस्थान स्थापित करने और उनका प्रशासन करने का अधिकार देता है
01:54याचिका करता का तर्क था कि अनुच्छेद 30 को अनुच्छेद 19-1 जी के तहत मिलने वाले अधिकारों से अलग
02:01कोई अतिरिक्त विशेश अधिकार नहीं माना जाना चाहिए
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