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  • 12 hours ago
राष्ट्रीय आम दिवस पर जानिए क्यों भरतपुर की आम की विरासत लगातार घट रही है? श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट...

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00:08एक दौर था जब भरतपुर की हवाओं में लंगड़ा, टपका और देशी आम की मिठास घुली होती थी
00:15करीब 5000 हेक्टेर में फैले आम के लहलहाते बाग इस जिले की पहचान थे
00:21लेकिन अब ये आकड़ा सिमट कर केवल 40 हेक्टेर रह गया है
00:26ऐसे में अब किसान आम के बजाए अमरूद और नीम्बू की खेती को अधिक लावदायक और सुरक्षित मान रहे है
00:36बुसावर बेर और बुसावर चेत्र में काफी पुरानी समय से जो आम और पंदार बवीचों की खेती की जा रही
00:45है
00:45मुक्य रूप से राम के लाव वैराइटी है जिसकी खेती जो मुसावर के चेत्र में की जाती है
00:53और इस वैराइटी की विशिस्ता यह है कि यह आम का अचार बनाने के लिए काम में आती है
00:59इसकी अलावा लंगडा है दसेरी है चोंसा है तो यह वैराइटी यहां भी किसानों के दारा खेती की जारी है
01:16क्रिशी विभाग के उपनिदेशक जनक राज मीना बताते हैं कि आम की अच्छी खेती के लिए 24 से 34
01:23डिग्री सेल्सियस तापमान और 800 से 1000 मिलीमीटर वार्शिक वर्षा उप्युक्त मानी जाती है लेकिन अब भरतपुर जिले में सामान्य
01:31तौर पर इतनी वर्षा नहीं होती इसलिए यहां की जलवायू आम के लिए पूरी तरह अनुकूल नहीं बची है
01:40कि पूछ किसान जो है डिप सिस्टम लगाके और आदनिक टक्निकों से इसकी खेती कर रहे हैं तो इस तरीकी
01:49की खेती हमारे जिले में की जा रही है किसानों का रुजहान आम के वजाए अमरूद और जो नीवू की
01:57फसल है उसके हमारे छितर में ज्यादा हो रहा है क्योंकि �
02:15पानी की कमी को देखते हुए सरकार किसानों को बूंद बूंद सिचाई यानि ड्रिप सिस्टम अपनाने के लिए प्रोचसाहित कर
02:22रही है
02:22इसके लिए किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है विभाग का मानना है कि यदि अधिक किसान आधुनिक सिचाई
02:30तकनीक अपनाएं तो सीमित जल संसाधनों के बावजूद आम की बागवानी को बचाया जा सकता है
02:38भरतपुर से ETV भारत के लिए श्यामबेर सिंग की रिपोर्ट
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