FCRA बिल को लेकर सरकार और अल्पसंख्यक संगठन आमने-सामने हैं. अल्पसंख्यक संगठनों ने बिल को JPC के पास भेजने की मांग कर दी है, वहीं सरकार इसे मानसून सत्र में आगे बढ़ाने की तैयारी में है. दरअसल, विदेशी फंडिंग से जुड़े इस बिल को सरकार मार्च में लोकसभा में पेश कर चुकी है. अब मानसून सत्र खत्म होने से पहले इसे आगे बढ़ाने की तैयारी है लेकिन इसी बीच अल्पसंख्यक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया. संयुक्त अल्पसंख्यक कार्रवाई मंच के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और बिल को वापस लेने या JPC के पास भेजने की मांग की.बिल के विरोध की सबसे बड़ी वजह ये है कि जिन संगठनों का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द, सरेंडर या समाप्त हो जाता है तो उन संगठनों की विदेशी अंशदान से बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए एक नामित प्राधिकरण बनाने का प्रावधान है.सरकार का कहना है इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जवाबदेही तय होगी और विदेशी फंडिंग के दुरुपयोग पर रोक लगेगी, लेकिन अल्पसंख्यक संगठनों को डर है कि इन प्रावधानों के जरिए धार्मिक, शैक्षणिक और मेडिकल संस्थानों की संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है.
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