00:03बांगलादेश की निर्वासित लेखी का तस्लीमा नर्सीन की सुक्रुवार को 19 साल बाद कुलकाता वापसी हुई
00:08नेताजी सुबाश चंद्रबो संतराष्टी हवाई अड़े पर स्वागत के लिए मौजुद लोगों का उन्होंने हाथ जोड़कर स्वागत किया
00:26उन्होंने लाल और सफेद रंकी क्लासिक साडी पहनी थी और माथे पर लाल बिंदी लगाई थी
00:31जो उन्होंने ब्रिटेन से निकलते समय पहनी थी
00:34उतरने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया
00:37और लिखा आज सुबह मैं कॉलकत्ता के लिए निकल पड़ी हूँ
00:40वो यहाँ सेकुलर मिशन और ह्यूमन राइट्स एंड बंगलादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन द्वारा आयो जीत एक कारेक्रम में हिस्सा लेंगी
00:48जिसका उदेश धार्मिक कटरपंद का विरोध करना और स्वतंतर सोच को बढ़ावा देना है
00:53It was possible for me to come back to Kolkata, but you know, Osman Mollik from Secular Mission Trust actually
01:09made it possible.
01:10I really thank him because he invited me and he took initiative to arrange security for me so that I
01:22could come back.
01:24November 2007 में उनकी आत्मकताद्वी खंडितों को लेकर भारी विवाद और विरोध हुआ था,
01:30जिसके बाद वाम मोर्चा की सरकार ने उन्हें Kolkata छोड़ने के लिए मजबूर किया,
01:34तब से वो मुख्य रूप से दिल्ली में रही और फिर विदेश चली गई.
01:38कटर फंद के खिलाब खुल कर लिखने और बोलने वाली लेकिका ने लगभग दो दसक के बाद Kolkata में कदम
01:44रखा है.
01:44उनके सम्मान में कल एक अगस्त को रविंदर सदन में एक स्वागत समारो होगा, जिसमें मुख्य मंत्री सुबेंदू अधिकारी सामिल
01:52होंगे.
01:53तसलीमा नसरीन को साल 1994 में बांगला देश छोड़ना पड़ा था.
01:57उनके उपन्यास लज्जा और उनके लेखन के विरोध में कटरपंती समुहों द्वारा लगतार जान से मारने की धमकिया मिल रही
02:03थी और उनके खिलाब फत्वा जारी किया गया था.
02:06जिसके बाद लगबग 10 साल सुईडेन, यूरोप और अमेरिका में बिताने के बाद 2004 में कुलकता आ गई थी और
02:13यहां लगबग 3 साल रही थी.
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