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  • 13 hours ago
बांग्लादेश की निर्वासित लेखिका तस्लीमा नसरीन शुक्रवार को लगभग 19 वर्षों बाद कोलकाता लौटीं. उन्होंने इस यात्रा को एक भावुक वापसी बताया, क्योंकि वह आज भी इस शहर को अपना मानती हैं.उनका आगमन शनिवार को होने वाले एक साहित्यिक कार्यक्रम से ठीक पहले हुआ है. नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत करने के लिए मौजूद लोगों से हाथ जोड़कर नसरीन ने अभिवादन किया और कहा, "वापस आकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा है." बताया जा रहा है कि उनकी यह यात्रा पूरी तरह से निजी और साहित्यिक कार्यक्रम के लिए है.वह 'सेक्युलर मिशन' और 'ह्यूमन राइट्स एंड बांग्लादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन' द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक सम्मेलन में भाग लेने वाली हैं, जिसका उद्देश्य धार्मिक कट्टरपंथ का विरोध करना और स्वतंत्र सोच को बढ़ावा देना है.

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00:03बांगलादेश की निर्वासित लेखी का तस्लीमा नर्सीन की सुक्रुवार को 19 साल बाद कुलकाता वापसी हुई
00:08नेताजी सुबाश चंद्रबो संतराष्टी हवाई अड़े पर स्वागत के लिए मौजुद लोगों का उन्होंने हाथ जोड़कर स्वागत किया
00:26उन्होंने लाल और सफेद रंकी क्लासिक साडी पहनी थी और माथे पर लाल बिंदी लगाई थी
00:31जो उन्होंने ब्रिटेन से निकलते समय पहनी थी
00:34उतरने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट किया
00:37और लिखा आज सुबह मैं कॉलकत्ता के लिए निकल पड़ी हूँ
00:40वो यहाँ सेकुलर मिशन और ह्यूमन राइट्स एंड बंगलादेश फ्रीडम फाइटर्स फाउंडेशन द्वारा आयो जीत एक कारेक्रम में हिस्सा लेंगी
00:48जिसका उदेश धार्मिक कटरपंद का विरोध करना और स्वतंतर सोच को बढ़ावा देना है
00:53It was possible for me to come back to Kolkata, but you know, Osman Mollik from Secular Mission Trust actually
01:09made it possible.
01:10I really thank him because he invited me and he took initiative to arrange security for me so that I
01:22could come back.
01:24November 2007 में उनकी आत्मकताद्वी खंडितों को लेकर भारी विवाद और विरोध हुआ था,
01:30जिसके बाद वाम मोर्चा की सरकार ने उन्हें Kolkata छोड़ने के लिए मजबूर किया,
01:34तब से वो मुख्य रूप से दिल्ली में रही और फिर विदेश चली गई.
01:38कटर फंद के खिलाब खुल कर लिखने और बोलने वाली लेकिका ने लगभग दो दसक के बाद Kolkata में कदम
01:44रखा है.
01:44उनके सम्मान में कल एक अगस्त को रविंदर सदन में एक स्वागत समारो होगा, जिसमें मुख्य मंत्री सुबेंदू अधिकारी सामिल
01:52होंगे.
01:53तसलीमा नसरीन को साल 1994 में बांगला देश छोड़ना पड़ा था.
01:57उनके उपन्यास लज्जा और उनके लेखन के विरोध में कटरपंती समुहों द्वारा लगतार जान से मारने की धमकिया मिल रही
02:03थी और उनके खिलाब फत्वा जारी किया गया था.
02:06जिसके बाद लगबग 10 साल सुईडेन, यूरोप और अमेरिका में बिताने के बाद 2004 में कुलकता आ गई थी और
02:13यहां लगबग 3 साल रही थी.
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