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दिल्ली में हुए राजनीतिक घटनाक्रम ने एक बार फिर सियासी हलचल तेज कर दी।प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया।इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाए।
वहीं पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई।इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस शुरू हो गई है।क्या यह केवल एक विरोध प्रदर्शन था या इसके पीछे कोई बड़ी राजनीतिक रणनीति है?इस वीडियो में जानिए घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन और सभी प्रमुख प्रतिक्रियाएँ।देखिए ग्राउंड रिपोर्ट, राजनीतिक विश्लेषण और इस पूरे मामले की बड़ी तस्वीर।
A major political confrontation unfolded in Delhi during an opposition protest.Rahul Gandhi was detained by Delhi Police, drawing nationwide attention.The Congress accused the government of suppressing democratic protests.Police, however, maintained that the action was taken to ensure law and order.The incident has sparked intense political debate across the country.Was this simply a law-and-order measure, or does it carry larger political significance?In this video, we break down the complete sequence of events and key reactions.
Watch the full ground report, political analysis, and all the latest developments.

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~HT.410~PR.512~ED.520~GR.510~VG.HM~

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00:00कौकरोज जन्ता पार्टी के उस प्रोटेस से जो की सुमवार के दिन पूरे देश में हेड्लाइंस बरकर सामने आया मंगलवार
00:06उससे कुछ अलग नहीं था लेकिन इस बार फोकस शिफ्ट हो गया प्रधान मंत्री नरेदर मोदी के निवास्तान के ठीक
00:10बाहर जहाँ पर कॉं
00:28क्या पहले ही जो दवाव सरकार पर था अभीजीत दिप के सोनम वांग्चुक के प्रोटेस को लेकर उससे जादा आप
00:34जब कॉंग्रेस के साथ ऐसा किया जा रहा है क्या बीजेपी के लिए उसकी ताबूत में ये आखरी कील हो
00:39सकता है
00:39बिल्कुल पंकज कॉक्रोट जनता पार्डी का पर दरसन पिछले एक महीने से चल रहा है बीस दिन से सोनम वांग्चुक
00:46और उनके कई साथियों का अंसन भी चल रहा था लेकिन पिछले 24 घंटे में ऐसा क्या हुआ है कि
00:50सरकार थोड़ी सी बैक पुट पर भी नजर आ रही ह
00:53और ऑपोजिशन भी एक्टिव है ऑपोजिशन वही कल से सारा ऑपोजिशन एक्टिव हो गया तीस दिनों से जो आंदोलन चल
00:59रहा था उसमें एंटरी होती है डिमपल यादव की अखलेश यादव की धरमेंदरी यादव की वरिंदा करात की उसमें एंटरी
01:05होती है और जो �
01:07एक consolidated opposition इस समय है, minus Congress,
01:11हलांकि Congress के भी कुछ leader गए थे उस protest में,
01:14लेकिन कल की जो घटना है, अचानक से एक साथ सारे opposition को activate कर देती है,
01:21और जो opposition activate कल होती है, उसमें और आज उफान आ जाता है,
01:26जब इस पूरे protest को lead करते हैं, राहूल गांधी,
01:29और cjp की demand होती है धर्मिन्द प्रधान का इस्तिफा,
01:32इनकी मांग है accountability और प्रधान मंत्री का इस्तिफा,
01:37तो सरकार दवाब तो जरूर महसूस कर रहे हैं,
01:39और सवाल है कि राहूल गांधी को पहली बार मारसल लगा के सदन से बाहर नहीं कर वायागा,
01:44पहले राहूल गांधी के साथ ऐसा होता रहा है,
01:46लेकिन इस वार जिस तरह से बल प्रयोग किया गया है,
01:49और जो मुद्दा है, ये एक ऐसा issue है,
01:52जिस पर देश भर के युवा consolidate हो सकते हैं,
01:57भारतिये जनता पार्टी को ये खत्रे की गंटी जरूर लग रही होगी,
01:59ये लग रही होगी, और तभी शायद इस तरह के action लिया जारा है,
02:02लेकिन ये knee-jerk reaction निकनी, क्योंकि राहूल गांधी के साथ अखिलेश यादब भी मौजूद थे,
02:15उन्हें भी दिल्ली पुलेस उठा कर लेगी है, जो तस्वीर हैं आप भी स्ट्रीन पर देख रहे हैं,
02:23वो सीधा बया कर रहे हैं कि स्थिती वहां पर कैसी थी,
02:26कि नीट पेपर लीक को लेकर ही, वो देश भर में यात्राएं करेंगे, आंदोलन चलाएंगे,
02:30और उन्होंने गूंज नामक अभियान की केम्पेंट की शुरुवात भी किती उत्राघंट से,
02:34तो अपोजिसन के बड़े लीडर है राहूल गांधी, ये लोग सभा में प्रक्षिनेता है,
02:38उनका अपना अजेंडा है, उनके अपने कारेकरम है,
02:42सीजेपी आई इस प्रोटेस्ट को उन्होंने फ्यूवेल जरूर किया,
02:45लेकिन राहूल गांधी ने पहले से कहा था कि ये आंदोलन करेंगे,
02:48राहूल गांधी अपने राफ्ते पर बढ़ रहे थे,
02:50हाँ ये जरूर है कि सीजेपी ने इस पूरे मुव्मेंट को,
02:54इस पूरे कैम्पेन को पॉपुलराइज जरूर किया है,
02:57जो कांग्रेस की विचाल हारा सहमती नहीं भी रखते हैं,
03:00जो कांग्रेस के फॉलोवर और सिंपेथाइजर नहीं है,
03:03अभीजीत दीपकेया और उनके समर्थ को ने ये बात देश के कोने-कोने में पहुंचा जरूर दिया,
03:08और उसका मुझाहिरा हम कल देख चुके हैं, जब जंतर मंतर से इनका काफिला चला था,
03:13पार्लियमेंट की तरब तो वो क्या दृष्य था,
03:16कि मतलब जो हम आजादी के समय में, जो जापरकास नाराइन के अंदोलन के समय में,
03:21और कुछ हद तक अना के अंदोलन में भी 2011 में देखा था,
03:25वही द्रिश्ट कल दिल्ली की सरकों पर था,
03:27और उसका आज उत्सा में दिखाई दिया है राहूल गांधी के कैम्पेन में,
03:30यह तस्वीरें इखास करके केशब मैं कहूंगा,
03:32जिस तरह से राहूल गांधी जमीन पर लेटे हुए हैं,
03:34अपने ट्रेडमार्क सफेड टी-शिर्ट और खाकी रंग की पैंट्स में,
03:37और देखे किस तरह से जमीन पर लेटे हुए हैं,
03:53समाज़ादी पार्टी हमने डिंपल यादव को देखा था,
03:55हमने श्रवानाजबी को भी देखा,
03:56और अब राहूल गांधी जब इसमें जुड़ते हैं,
03:58तब उनके साथ इस तरह से होता है,
04:00मुझे लगता है कहीं न कहीं,
04:01इसको सरकार जिस तरह से हैंडल करना चाहिए थी,
04:04वो सुरक्षा के तर्श्रकोन से ज़रूर कह रही है,
04:06लेकिन अगर वो प्रोटेश शांति पूर्ण है,
04:08वापर किसी तरह के लठबाजी, पत्थरबाजी नहीं हो रही है,
04:11तो इसको हैंडल करने का तरीका क्या होना चाहिए?
04:13बिल्कुल पंकत जो आप कह रहे हैं,
04:14मैं तो ये कहना चाहूंगा कि वो राहूल गांधी नहीं है,
04:17वो विपक्ष का चेहरा है,
04:19और विपक्ष नहीं, दरसल मैं तो कहूंगा,
04:21इस वक्त धर्ती पर गिड़ा हुआ भारत का लोक तंत्र है,
04:24जिसे एक सरकार जिसके पास तमाम संसाधन है,
04:29उसको मैं हैंडल कर रही है,
04:30उसको बलपुरवक्त नियंत्रिट करने की कोशिस कर रही है,
04:33इस सरकार की सबसे बड़ी कमजोडी मैं कहता हूँ,
04:36और इस सरकार की नहीं, तमाम सरकारे जो रही है,
04:38सब्ता की सबसे बड़ी दुर्वलता होती है,
04:40समवाद नहीं करने की प्रविर्ती,
04:42आखिर एक महीने से कौकरोच का अंदोलन चल रहा है,
04:45क्यों नहीं बात की गई,
04:46राहूल गांदी जब यह मुद्दे उठा रहा है,
04:47क्यों नहीं बात की गई,
04:48और आज की बात देखिए,
04:49पंकज पार्लियमेंट में प्रधान मंत्री क्या बोलते हैं,
04:52ये एक राष्ट्रिये चिंता है,
04:53नीट पेपर लीक एक राष्ट्रिये चिंता है,
04:55भाई ये सरकार है या क्या है,
04:57वो कैसे हैं कि युवाओं को भड़काओं नहीं,
04:59अगर युवाओं के अधिकारों की बात करना,
05:02अगर युवाओं खुद अपने अधिकारों की मांग करना तो उसको भड़काना कहा जाएगा,
05:08पर ना किया है सब से पहले सरकार को सुनीशित करने चाहिए
05:13पर जिए अपर कहनी करें दूसरी बात मैं जो बात यहां पर कहना गोडाया
05:30हें पर कोई कोबिड आए对 एilly जनतानी पटले नोट वंदी जनतानी प्टलेद में
05:36पठले जो भी मुश्कीले आई सम्में जनता नि पठले नीट का पेपर लिख हो जनता नहीं पठले हाँ प्रेस कॉंफरस
05:42में कहा था धा कि हमें मीडिया से सही हो जबकि मीडिया के त्रूई उन्हें पता से ला थाथग यह
05:47पेपर लिख वा है दो चीज़ों पर आपका ध्या
06:01और बस में ठूच दिया गया फिर उन्होंने अपनी मांगे रखे हैं उससे पहले प्रियंगा गांधी ने वहाँ पर जब
06:06गिरफसारी के समय उन्होंने कहा तब मोधी गवर्मेंट is cowardly डर्पोक सरकार है वो डरी हुई है और लेकिन हम
06:11उससे नहीं डरते हैं कॉंग्रेस महासर
06:26करीब डियर सालों तक चला था और साथ सो के आसपास लोगों की जाने गई थी लेकिन उसमें किसी भी
06:32मृतक के घर में प्रधान मंत्री या प्रधान मंत्री के कैबिनेट का यहां तक की बीजेपी का कोई बड़ा ओहदेदार
06:38वक्ती नहीं गया था आज देखिए एजेपी �
06:41नडड़ा जाते है रामानोर लोहिया हॉस्पीटल में जो कल के प्रधरशन में घायल हुए हैं उनको देखने उनसे मिलने तो
06:49आखिर सरकार की तो इस बार चूले हिली जरूर है और इस बार ऐसा मुद्दा किसानों का जो मुद्दा था
06:55एक बड़ा मुद्दा था और आखि
07:09भारत में हर घर में युवा है हर घर में चात्र है इसी लिए सरकार ये समझ रही है कि
07:14शायद इस बार निशाना सही जगह लगा है विपक्च का और सरकार से एक के बाद एक चूक होती रही
07:21है आप देखिए धर्मेंदर प्रधान इस मोधी कैबिनेट में मैं तो कहूंगा कि
07:26सबसे विवादित मंत्रियों में से एक रहे हैं इससे पहले युजीसी वाले में भदपिट वाली जब पिछली बार नीट पेपर
07:32लिख हुआ तो यही सामने आकर कहे थे कि यह आखरी गलती है और सायद उनका आखरी होई यह सितम
07:38हर सितम हम सोच कर यह सहगे हर बार चंता ठ
07:56इश्वास जताया है अब इसका समाधान कौन करेगा अगर यह जो नीट पेपर लिख का मामला है पहले ही इस
08:02पर कारवाई हो गई होती तो यह पुरा प्रोटेस्ट नहीं होता सरकार को यह मौका आमिन विपक्ष को यह मौका
08:08नहीं मिलता सरकार हिलाने का अब आप समझे पं
08:25हैं उनको एक मां की ममता के साथ आसरे देती हैं ये उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव का संखनाध है
08:34और वही ये घड़ी थी जिसने इस सरकार को सोचने पर मजबूर किया और फिर आनन फानन में जेपी नड़ा
08:42से बाचित की तैयारी कराई गई
08:44चलिए ठीक है हम आपको दर्जोंगों को बता दें राहूल गांधी जब जमीन पर लेटे हुए थे तब भी मीडिया
08:50उनसे बातचीत करी थी मीडिया के माइक्स उसके मुह से उनके मुह से हटाए जा रहे थे उसको भी लेकर
08:55कॉंग्रेस ने ट्वीट किया है उस वीडियो को स
08:56साथ ही साथ एक बहुत ही पाउरफुल विज्वल के साथ जहां पर दिल्ली पुलिस के आठ से दस कर्मचारी राहूल
09:01गांधी को अपने जबरदस्ती उठाय हुए है पूरी तरह हवा में उठाय हुआ है उसको लेकर कॉंग्रेस ने ट्वीट किया
09:08है अंडर मोधी डिमोक्र
09:22को कैसे दबा रही है या इसको क्यों मान नहीं रही है पॉइंट यह है कि अगर डिमोक्रेसी में जहां
09:27पर खुर्म प्रतानमंत्री मोधी भी कहते हैं कि हम इस पर चर्चा करनी चाहिए बहस करनी चाहिए अगर उसका स्कोप
09:32है तो फिर इस तरह का जबरन लाठी चार्ज और
09:52कि इस पूरे प्रोटेस्ट को अगर हम डियो वन से कवर कर रहे हैं तो आप हम और हमारे कई
09:57सारे सहयोगी जाते रहे हैं जिस तरह से इस मुद्य को उठाया जाना चाहिए था जंता की आवाज बननी चाहिए
10:04मीडिया शुरुवात में थोड़ा पीछे था लेकिन जैसे जैस
10:21और सपस्ट कहता हूं कि यहां पर भी दो गुट बने हुए हैं लोग एक तरफ सरकार के स्टेंट को
10:25तरह तरह से जस्टिफाई करने की कोशिश करते हैं अब प्रोटेस्ट के क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाते हैं और राइकली सो
10:31वो उनका हो सकता हूं की एडिटोरियल �
10:47में होता है सवाल यह है कि वो मीडिया कर्मी खास करके जो कि जेफरी एपस्टीन जैसे कॉन्विक्टेड पीडोफाइल को
10:54अगर वो कहते हैं कि वो बिजनसमेन है और वो फिर बाद में ऐसी तस्वीरें डालते हैं जहां पर स्टूडेंट्स
11:00पुलिस द्वारा फेके गए प
11:14देश की प्रॉपर्टी को तोड़ रहे हैं कि आपको पत्रकार्टा यहीं नजर आती है आप सवाल क्यों नहीं कर पाते
11:19हैं कि क्यों यह ऐसी स्थिटी आई उसमें तो यहां पर भी फिल्टर्ड अप्रोच में भी फिल्टर एडड किया गया
11:26है जी आप देखें एक आप में
11:41की वधता है देखें कि किस तरह से सब कुछ प्लान किया है एक विज्युल तेयार करने के लिए जिससे
11:47लगे कि छात्रों ने युवाओं ने सरकारी संपत्रिक को नुकसान पहुँचाया गया है
11:52दरसल वो सब कुछ planted दिख रहा है दिख रहा है वहां पर की planted है पुलिस को देखा जा
11:58सकता है कई फ्रेम्स में कि किस तरह से जबकि इस आंदोलन के शुरुवात से लोग कहें पुलिस के ध्यरे
12:04की काफी तारीफ भी कर रहे थे फिर अचानक से क्या बदल जाता है क्या आगा को
12:10पुलिस तो ध्यरे जो वहां दिखा रही थी हम लोग वहां पर उस प्रोटेस साइट पर थे पुलिस वहां पर
12:13बैठी रहती थी किसे पतर का कोई एक्शन नहीं लिया गया पहले बीस पच्चिस तीस दिन बीस जुलाई के पहले
12:18से वो crackdown शुरुआ जब वहां पर जो प्रो
12:38तो इसको कमाड नहीं आता है क्योंकि वही उनके सुर्वेदार मालिक भी है इस चीज़ को ध्यान में रखते हुए
12:45दिल्ली पुलिस को इसले इस तरह का और है कभी कवार होता था अभी जी दिपके कहते थे कि देखी
12:49दिल्ली पुलिस हमारे साथ सपोर्ट कर रही है उनके ब
13:07बहुत रिस्क पे बोल रहा हूँ कि पुलिस को भी पत्थर फेकते हुए कुछ फ्रेम्स में देखा गया है अकि
13:12यह कौन सा लोग की तंद्र है जिसमें लोग की मर्यादा का भी हमें ध्यान नहीं है पुलिस पत्थर फेक
13:19रही है अब पुलिस तो कहेगी कि हमारे उपर पत्
13:34सब्टी विकार भी रख दी जाती है कि चात्रों ने उपद्रब किया है सरकारी संपत्ति को नुक्सान पहुंचाया है बलकि
13:41हम लोग डे वन से यह देखते आ रहे हैं कि देश का जंजी बहुत सतर्क है वह आंदोलन की
13:49निष्ठा को समझता है आंदोलन की गरिमा को समझता ह
13:53है जैसे हमारे परोशी देशों में हुआ सरकारी संपत्ति को नुक्सान पहुंचाया गया आंदोलन अक्रामक हो गया लेकिन इहां तक
14:00कल हमने देखा दिल्ली की सरकों पर जुंड के जुंड लोग चल रहे हैं लेकिन किसी ने एक पेड़ की
14:06डाली तक तोड़ने का कोई यत
14:08नहीं किया बारिश हो रहे थी कुछ लोगों के सर पेचाता था कुछ लोग बारिश में भीगते हुए चल रहे
14:13थे किसी ने सोचा भी नहीं कि किसी के दुकान या फिर किसी के मकान से कोई चीज खीच लिया
14:20जाए पुलिस वालों से कोई बलप्रियोग किया जाए धक्कामु
14:38जो इमर्जेंसी में जेल में बंद थे जो इमर्जेंसी के दौरान ऐसी यातनाओं के शिकार हुए थे और उसका प्रतिरोध
14:46करते हुए आगे आये थे और उस समय की जो सत्ता थी उसकी जड़े हिला दी थी और जब आप
14:53सरकार में आते हैं फिर वही सारी चीज़े रिपीट कर
14:56रहे हैं अगर ये कहा जाए कि क्या देश में अगोशित इमर्जेंसी है तो मुझे नहीं लगता है कि बहुत
15:02बढ़ा आतिशोक्ती हो गया चलिए अगोशित इमर्जेंसी है और कॉंग्रेस का ये दावा कि प्रधान मंतरी मोधी कॉंग्रेस से डरते
15:08हैं प्रधान मंतरी मो�
15:22सभी आपके सामने लेकर आएंगे
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