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यह वीडियो 15 मार्च 2026 को IIT इंदौर में आयोजित "संवाद" सत्र से लिया गया है।
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Transcript
00:00ये जो आजादी के बाद की हमारी दो-तीन पीडियां हैं, पिटा जी की और दादा जी वाली जो पीडियां
00:06हैं तुम लोगों से, ये बहुत नायाब और लाजवाब पीडियां हैं
00:10मैं first semester में ही था, जो पहली बार rendezvous में, उसमें बोलने गया, तो उसमें सवाल कुछ ऐसा ही
00:16था, भारत की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार या शायद ऐसा था कि क्या नई पीडी नालायक निकल गई है,
00:22तो मैंने कहा कि जो 47 का साल है, वो शताबदी के लगबग बीचो �
00:27मैंने का तुम पहले के 50 साल देखते हो, मने 1900 से लेकर के 1947 या 1950 मान लो, उसमें
00:35तुमें एक के बाद एक कद्दावर लोग दिखाई देते हैं, क्या उचाईया हैं उनकी, तुम गिंते गिंते ठक जाओ, सिर्फ
00:42यह नहीं की राजनीती, सिर्फ यह नहीं की क्रांतिकारी, वि
00:56और वो पीडियां शुरू होती हैं, जो हमारे बाप दादाओं की हैं, गरो इसमें तो कोई दिखाई नहीं देता हैं,
01:01यह पीडियां बतल गई, और आजादी के बाद जो महौल मिला वो उनहीं की देन था जो चले गए, जिन
01:09पीडियों को यह महौल मिल गया, उन्हें मुफ
01:17पीडियों में आपको आजाद दिखाई देते हैं, भगत सिंग दिखाई देते हैं, इन पीडियों में तो बस यह दिखाई देता
01:24है कि बेटा जल्दी से सोशल परमीशन ले लो, कोई भी तुमारी जॉब लग जाए और शादी करके सेटल हो
01:30जाओ, और वहां भगत सिंग ज
01:45जरूरी है मैं मरूंगा नहीं तो इदेश जगेगा नहीं और उनके भी माबाप थे कि नहीं थे और उनके माबाप
01:51आकर उन पर दबाओ नहीं बना रहे थे कि बेटा जल्दी से माफी मांगकर बाहर आजा शादी वादी कर ले
01:56तो इतना हैंडसम है तू कैसे जान देदेगा अ
02:13ये अपने बच्चों को भी नहीं जीने देते, कोई क्रांतिकारी निकल पाता अगर उसके माबाप उस पर वैसे ही चढ़े
02:19जाते, जैसे आज के माबाप और आज के दादा और दादी अपने बच्चों पर चढ़े रहते, मैं पूछ रहा हूं
02:25बता दो न, वो इसलिए हुआ,
02:27क्योंकि आजादी बहुत सस्ती मिल गई, जिनों ने कुछ नहीं करा था आजादी के लिए उनको भी आजादी मिल गई
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