00:07गले में स्थेतोस्कोप, हाथों में गलव्स और दिल में गरीबों की सेवा की प्रबलभावना
00:13काली गोपाल मुखर जी पेशेस से डॉक्टर है, पिछले 76 सालों से मरीजों का इलाज कर रहे हैं
00:19अब शरीर साथ नहीं दे रहा, वो खुद से चल नहीं सकते, चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता
00:26है
00:26लेकिन अब भी लगता है कि अगर घर बैट जाएंगे तो घरीबों का इलाज कौन करेगा
00:33मैं लंबे समय से मेडिकल की प्रटिश कर रहा हूँ, मुझे याद नहीं कि कितने साल से
00:38अब भी मरीज आते हैं, अब पहले के जैसा सब कुछ नहीं हो पाता
00:43सिर्फ एक्छा शक्ती की वज़ा से सब चल रहा है
00:54काले गोपाल मुखर जी के पिता अंग्रेजों के जमाने में गोल्ड मेडिलिस्ट फिजिशिन रहे
00:59पिता से बिमार लोगों का इलाज करने की सीख मिली, तब से आज तक वो लोगों की सेवा कर रहे
01:05हैं
01:05सुभह शाम मरीज को देखने अपनी क्लिनिक में आते हैं
01:16सुभिदार नहीं थी, वो मरीज का नारी देखकर बिमारी को पहचान लेते हैं
01:21एक सा साल की उम्र में भी वो इलाज कर रहे हैं
01:24अगर कोई भगवान के बरावर है तो वो डॉक्टर है
01:28वो अग्रामीन शत्रों में स्वास्त सुभिदाएं दे रहे हैं
01:32डॉक्टर काली गोपाल मुखर जी का जन्म 5 मई 1927 को वर्धमान में हुआ
01:37वहीं से स्कूलिंग की, फिर आरजी कर मेडिकल कॉलेज से MBBS की डिग्री ली
01:42और डॉक्टर बन कर 1950 से लोगों की सेवा कर रहे हैं
01:46पिता की इच्छा से उन्होंने ग्रामिन इलाके को अपना कर्मक शेत्र चुना
01:50शुरू शुरू में वो 5 रुपए में लोगों का इलाज करते थे
01:54एक वक्त ऐसा भी आया जब वो फ्री में इलाज करने लगे
01:572025 में कैंसर ने उनकी एक आँख छीन ली
02:00अब वो एक आँख के सहारे ही मरीजों की सेवा करते हैं
02:05EGV भारत के लिए हुगली से पलाश मुखोबाध्याई की रिपोर्ट
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