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Sonam Wangchuk Protest: जंतर-मंतर पर CJP के मंच पर क्यों बैठे Sonam Wangchuk, क्या बदल गया है आंदोलन का रास्ता? | Oneindia Hindi
लद्दाख के जाने-माने शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक एक बार फिर दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। लेकिन इस बार उनके मंच को लेकर राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छिड़ गई है।

लद्दाख के अधिकारों और पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई लड़ने वाले प्रख्यात कार्यकर्ता सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) एक बार फिर देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठ गए हैं। "3 इडियट्स" फिल्म के 'फुंसुख वांगड़ू' की असली प्रेरणा माने जाने वाले वांगचुक इस बार लद्दाख के स्थानीय बैनर के बजाय 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के राजनीतिक मंच पर दिखाई दे रहे हैं। इस कदम ने सियासी गलियारों में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या कभी खुद को राजनीति से ऊपर बताने वाले वांगचुक का यह आंदोलन अब राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बन चुका है?


इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें साल 2019 में जाना होगा, जब केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 (Article 370) को हटाकर लद्दाख को जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) घोषित किया था। शुरुआत में लद्दाख के लोगों ने इसका स्वागत किया, लेकिन जल्द ही स्थानीय युवाओं को रोजगार, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर बाहरी प्रभाव का डर सताने लगा। इसके बाद सोनम वांगचुक ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची (Sixth Schedule) के तहत सुरक्षा प्रदान करने जैसी चार प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया था।

गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई हाई पावर्ड कमेटी के साथ कई दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद, सितंबर 2024 में वांगचुक ने "दिल्ली चलो पदयात्रा" का नेतृत्व किया था, जहां उन्हें दिल्ली सीमा पर हिरासत में भी लिया गया था। अब जंतर-मंतर पर CJP के बैनर तले उनके दोबारा भूख हड़ताल पर बैठने से लद्दाख का यह मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। देखिए वनइंडिया हिंदी की इस विशेष रिपोर्ट में कि कैसे एक शिक्षक से आंदोलनकारी बने सोनम वांगचुक के सफर में यह नया मोड़ आया है और इसका लद्दाख के भविष्य पर क्या असर पड़ेगा।

Renowned Ladakh-based innovator and environmentalist Sonam Wangchuk has launched a fresh hunger strike at Delhi's Jantar Mantar, this time sharing the stage with the Cockroach Janta Party (CJP). Tracing the 7-year history of the Ladakh agitation since the abrogation of Article 370 in 2019, this analytical report covers Wangchuk’s core demands regarding the Sixth Schedule, full statehood for Ladakh, and explores how a peaceful localized movement has expanded onto the national political stage.

#SonamWangchuk #LadakhProtest #SixthSchedule #JantarMantarProtest #CJPProtest #Article370

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Transcript
00:00कभी बर्ष से ढखे पहाडों के बीच खड़ा एक शिक्षक जिसने बच्चों को नई शिक्षा दी
00:04पर्यावन बचाने की लड़ाई लड़ी और पूरे देश में
00:08फ्री इडियेट्स वाले फुनसुक वांग्रों की असली प्रेणा के रूप में भी पहचान बनाई
00:13फिर वही शक्स लड़ाख की पहचान बचाने के लिए सड़क पर उत्रा
00:17हाथ में तिरंगा था, जुबान पर संविधान था और हत्यार था अहिंसक अंशन
00:23लेकिन आज तस्वीर बदल चुकी है
00:25अब सोनम वांग्चुक दिल्ली के जंतर मंतर पर बैठे हैं
00:29इस बार लद्धाख के बैनर तले नहीं बलकि कौकरुजंता पार्टी यानि की सीजेपी के मंच पर
00:34उन्होंने फिर से भूख हर्ताल का एलान किया है
00:36वेज़े बताई जार ये पर्यावरन की रक्षा और सीजेपी के आंदोलन को समर्थन
00:41यहीं से सबसे बड़ा सवाल खड़ा होने लगा है
00:44क्या ये वही सोनम वाग चुक हैं जिन्होंने कभी कहा था कि उनका आंदोलन राजनीती से उपर है
00:49क्या लद्धाख की लड़ाई अब राष्ट्य राजनीती का हिस्सा बन चुकी है
00:53क्या एक पर्यावरन कारेकरता धीरी धीरी राजनीती का आंदोलन का चेहरा बनता जा रहा है
00:59और सबसे एहन सवाल
01:012019 में शुरू हुआ लद्धाख का आंदोलन आखिर जंतर मंतर तक कैसे पहुँच गया
01:06एक शिक्षक से आंदोलन कारी और अब एक राजनीतिक मंच पर बैठने तक की पूरी कहानी क्या है
01:12नमस्कार मैं हुरी चाप राष्टर और आप देख रहे हैं वरेंडिया हिंगी
01:20आज हम सिर्फ ये नहीं बताएंगे कि सोनम वांचुक आज क्या कर रहे हैं
01:25बलकि समझेंगे कि पिछले साथ वर्षों में उनका आंदोलन किन किन पड़ाओं से गुजरा
01:30कैसे उनकी मांगे बदली, सरकार का रुख क्या रहा, उन पर कौन-कौन से आरोप लगे
01:35और क्यू आज उनका नाम फिर से देश की राजवीती के केंदर में आ गया है
01:39इन सवालों का जवाब समझने के लिए हमें साथ साल पीशे लोटना होगा
01:42साल 2019 में
01:44पांच अगस 2019 जब केदर सरकार ने अनुछे 370 को समाप किया
01:49और जमू कश्मीर का उनर गठिन करते हुए लद्दाख को अलग केंदर शासित प्रदेश बना दिया
01:54तेश के कई हिस्सों में इस फैसले का स्वागत हुआ
01:57लद्दाख में भी शुरुआत में लोगों ने इसे कहती हासिक अवसर माना
02:00लोगों को लगा कि अब दिल्नी से सीधा विकास होगा
02:03तुशासन तेज होगा और छेतर को नई पहचान मिलेगी
02:07लेकिन कुछी महीनों बाद तस्वीर बदलने रगी
02:10लद्दाख के कई सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और स्थानियन नेताओं ने कहना शुरू किया
02:16कि केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद विधान सबह खत्म हो गई
02:19स्थानिय राजनिती अतिकार सिमित हो गए
02:22और अब जमीन प्राकृतिक संसाधनों ततसरकारी नौक्रियों पर बाहरी प्रभाव बढ़ सकता है
02:27यहीं से सोनम वांग्चुक पहली बार खुलकर इस बहस का हिस्स्ता बढ़े
02:32उन्होंने कहा
02:33कि लद्दाख सिर्फ खुपसूरत पहाडों का नाम नहीं है
02:37यह एक बेहद संविधनशील हिमालेई छेत्र है
02:40जिसकी संस्कृती पर्यावरन और जनसंख्या
02:43तीनों को विशेश संरक्षन की जरूरत है
02:46दीर दीरे उन्होंने चार प्रभुख मांगों को आंदोलन का आधार बनाया
02:50पहला लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले
02:54दूसरा संविधान की छटी अनुसुची अनिकि सिक्स शिडूल के तहत
02:59संविधानिक आरक्षन दिया जाए
03:01ताकि जमीन, संस्कृती और स्थानिय संसाधनों पर स्थानिय लोगों का अधिकार सुरक्षित रहे
03:06तीसरा स्थानिय युवाओं के रोजगार और भरती में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
03:11और चौथा, हिमालेई परियावरण को ध्यान में रखते हुए विकास की अलगनीती बनाई जाए
03:16शुरुवात में उनका अंदोलन पूरी तरह सामाजिक और परियावरण के इंद्रित दिखाई देता था
03:20वो प्रस कॉंफरेंस करते थे, वीडियो संदेश जारी करते थे, छात्रों और युवाओं से समबाद करते थे
03:26और बार-बार कहते थे कि ये किसी राजश्रितिक दल की लड़ाई नहीं है, बलकि लद्दाह के भविश्य की लड़ाई
03:33है
03:33उनकी भाष्य टकराव की नहीं समबाद की थी, वे सरकार से बादशीत की अपील करते रहे
03:39उनका कहना था कि अगर आज समयधानी सुरक्षा नहीं मिली, तो आने वाले वर्षों में लद्दाह की पहचान, पर्यावरण और
03:45स्थानिय समाज पर गंभीर असर पड़ सकता है
03:48इसी दोरान केदे सरकार ने भी बादशीत का रास्ता चुना, बाद में ग्रिह मंत्राले की ओर से हाई पावर्ड कमेटी
03:55बनाई दे, जुसमें लद्दाह के प्रतिनिधियों से कई दोर की चक्चा
03:59सरकार ने अनुसुची जन जाती आरक्षिन बढ़ाने, स्थानिय भाषाओं को मान्यता देने, महिलाओं के प्रतिनिधित्व और भरती जैसे कदम भी
04:07गिनाए
04:07लेकिन आंदोलन कारियों का कहना था कि उनकी मूल मांग, राज्य का दर्जा और छट्टी अनुसुची अब भी अधूरी है
04:16यही से सोनम वांग्चु का आंदोलन धीरे विरे लद्दाह के सीमाओं से निकल कर राष्ट्वे बहस का हिस्ता बनने लगा
04:22और फिर आया साल 2024, जब उन्होंने फैसला किया कि अब वो आवाज सिर्फ लेह में नहीं, बल्कि दिल्ली तक
04:29पहुँचाएंगे
04:30यही से शुरू होती है आंदोलन की दूसरी और सबसे चर्चित कहानी
04:35तो अब कहानी पहुँचती है साल 2024, सोनम वांग्चु कांदोलन सिर्फ लद्दाह कांदोलन अब नहीं रहा था, बल्कि दाष्ट्री राज़्वीती
04:43की सुर्खियां बनने लगा था
04:44कई महीनों तक बाच्ची चली थी, पतिर निति मंडल दिल्ली आता जाता रहा, हाई पावर्ड कमीटी की बैठके होती रही,
04:51लेकिन आंदोलन कारियों का आरुख वही था जो हमने आपको बताया कि सरकारुं की सबसे इंपोर्टेंट जो मांग थी, राज़्य
04:56का दर्जा औ
05:09इसी सोच के साथ सितंबर 24 में उन्होंने पैसला लिया कि दिल्ली चलो पध्यात्रा इसका एलान की, योजनाथी की लद्दाख
05:19से कारेकरता पैदल चलते हुए दिल्ली पहुँचेंगे और दिल्ली की संसद के सामने अपनी बात रखेंगे, आंदोलन पूरी तरह गांधि�
05:39पर पुलिस ने इस रोनम वांग्चुक समेत करीब 120 प्रदर्शिन कारियों को रोप दिया, कई घंटों तक उन्हें आगे बढ़ने
05:46की अनुमती नहीं मिली और बाद में हिरासत मिले लिया गया, जैसे ही ये खबर सामने आई सोचल मीडिया पर
05:51बहस शुरूरी पूरी, कई �
06:05समय बाद वांग्चुक और उनके साथियों को रिहा भी कर दिया गया, दो अक्टूबर, या निकांधी चुहनती के दिन उन्हें
06:11राजगाट जाकर स्रद्धानजली देने की अनुमती भी दिन दे, यही से उन्होंने एक नया रास्ता चुना, अनिश्चित कालीन भूख हर
06:20उनका संदेश साथ था, अगर हमारी आवाज बातचीत से नहीं सुनी जा रही, तो हम अहिंसक सत्याग रह का रास्ता
06:27अपनाएंगे, वो खर्ताल कई दिनों तक चलिए, देशपर के कई परियावरण विद्ध, शिक्षा विद्ध, समाजी कारे करता और कुछ विपक्षिन
06:37इताओं ने उनके समठन में बयान के, सोशल मीडिया पर सेव लद्धाक और सिक्स के शिड्यूल पर लद्धाक जैसे अभ्यान
06:44भी चलने लगे, दूसरी तरफ केंदर सरकार का कहना था कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं हुआ है, सरकार ने
06:51बार-बार कहा कि हाई पावर्�
07:07समठन समवाद से निकलेगा सड़क के दवाब से नहीं, अब करीब दो सप्ताहबाद 21 ओक्टूबर 2024 को आश्वासनों के बाद
07:15सोनम वांग्चुक ने अपना अंशन समात कर दिया, उस समय लगा कि शायद अभिवाद धीरी-धीरी सुलह चाहेगा, वेकिन ऐसा
07:24हुआ नहीं
07:24करीब एक साल बाद सितंबर 2025 में सोनम वांग्चुक ने एक बार फिर से ले में बुखरताल शुरू कर दिया,
07:31इस बार माहौल पहले से ज्यादा गर्म था, युवास संगठनों में नाराजगी बढ़ चुकी थी, सोशल मीडिया पर अभियान और
07:39टेज हो चुके थे, स्था
07:54कारी दफ्तरों पर हमला हुआ, कई वाहनों में आग लगा दी गई और सुरक्षा वलों के साथ टकराओ की खबरे
07:59सामने आने रही, यही वो मोड था, जहां आंदोलन पहली बार हिंसा की छाया में आ गया, हलाकि सोनम वांग्चुक
08:06ने तुरंट सारवजनिक अपील की, उन्
08:21से शांती बनाए रखने की अपील की, लेकिन हालात बदल चुके थे, कुछी समय बाद उन्हें आपचारिक रूप से गिरफतार
08:29कर लिया गया, सरकार की कारवाई के समर्थकों का खहना था कि कानून अपने तरीके से काम करेगा और इंसक
08:35घटनाओं को किसी भी कीमत पर स्व
08:49नहीं रहा, ये लोगतांत्रिक अधिकार, विरोध प्रदर्शन और केंट्र लग्दाख संबंधु पर राष्ट्री राजुनितिक बहस का हिस्ता मन गया, यही
08:58से सोनम वांग्चु की छवी एक पर्यावरन कारेकर्टा से आगे बढ़कर एक बड़े राजुनितिक विवा
09:19बदला आंदोलन का स्वरत, मार्च दोहजार चवीस में जब सोनम वांग्चु की रिहाई की खबर सामनी आई, तब लोगों को
09:27लगा कि वे फिर से केवल लदाख और पर्यावरन के मुद्वों पर सिमुत आंदोलन करेंगे, लेकिन इसके बाद जो तस्वीर
09:33सामनी आई, उ
09:48इसी दोरार अब उनका नाम सीजेपी यानि की कौकरोज जंता पार्टी के मंच के इसके साथ जोनने लगा, अब जंतर
09:55मंतर पर एक नए शुरुआत होगा, दिली के जंतर मंतर पर आयोग्जीत विरोध प्रदेश्वन में सोनम वांग्चुक ने हिस्सा लिया,
10:02और घोशना
10:03की कि वे परियारण संग्रक्षन तथा सीजेपी के आंदोलन की समर्थन में भूखर ताल करेगे, उनका कहना था कि ये
10:11किवल लद्दाह का बुद्दा नहीं है, बलकि पूरा हिमालय और आने वाली पीडियों का सवाल है, उन्होंने कहा कि अगर
10:19हिमालय शेत्र अन्यंतरत व
10:32क्या सोनम वांग्चूक एक गैर राजनितिक सामाजी कार्य करता नहीं रहे, क्या उनका अंदोलन पूरी तर्य राजनितिक दिशा में बढ़
10:40चुका है, क्या लद्दाह की मांगो को राष्टिय राजनितिक मन से जोड़ना उनकी पुरानी स्तिति से अलग कदम है, अब
11:00बह
11:01सरकार उनकी मांगों पर पर्याप्त कदम नहीं उठाती, तो बड़े मंचों पर आवाज उठाना स्वभाविक है, लेकिन सरकार का क्या
11:08रुख है, केंदर सरकार लगतार ये कहती रही है, कि लद्दाह के बुद्दो पर बाचीत की दर्वाजे बंद नहीं हुए
11:14है, सरकार क
11:29पर शाओं को मानेता, महिलाओं को प्रतिन धित्व, भरती प्रक्रियाओं में सुधार, लेकिन आंदोलन कारियों का कहना है, कि उनकी
11:36मुख्यमांग वही राजवे का दर्जा और छट्टियन उसुचिवों उस पर टिके हुए हैं, क्या बदल गया है सोनम वांग्चुक में
11:42क्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं, और यही सवाल सबसे ज़ादा पूछा जा रहा है, क्या 2019 में लदाख
11:47की पहचान बचाने निकले सोनम वांग्चुक आज राश्ट्य राजवे के किंद्र में आ गया है, क्या उनका आंदोलन पर्यावरन से
11:54आगे बढ़कर सत्ता और मीत
11:55की बहस बढ़ चुका है, या फिर वही कर रहे हैं, जो किसी भी जन आंदोलन का अंगला चरण होता
12:01है, स्थानिया मुद्धों को राश्ट्य मंच तक ले जाना, अब आज की जो तस्वीर है, आज जंतर मंतर पर बैठे
12:08सोनम वांग्चुक सिर्प लद्दाख की बात नहीं क
12:25लोग को अक्रोचों पर भी सवाल उठा रहे हैं, कि आपका नीट पेपर लीक और धर्विनिक प्रदान का स्थीफा मुद्ध
12:30था, इसमें पर्यावरण भी आप में गुसा दिया है, तो अलग-अलग-अलग तरह की बाते कर रहे हैं, लेकिन
12:36एक बात ताय है कि 2019 में शुरू
12:49और आंदोलन कारियों को फिर बातचीत के मेश तक लाएगा, ये तकराव की राश्डिती और तेज हो जाएगा।
13:19के प्रतनिद्यों के साथ कई दौर की बातचीत हुए, अनुसुचित जनजाती का मुद्धा आरक्षन बढ़ाया गया, महिलाओं को परिशदों में
13:28आरक्षन दिया गया, भाशाओं को माननिता दी गई, जो महां की स्थानी अभाशाएं थी, इसके लावा भी कई सुधार क
13:34सरकार का ये भी कहना है कि बाचित का रास्ता थोरने कभी बंद किया ही नहीं, लेकिन आंदोलनकारी मानते ही
13:39नहीं है, कई बैटकों में बहुत बाते हुए, लेकिन फैसले कम हुए, अब ऐसा आंदोलनकारी कह रहे हैं, और राज्य
13:47के मांग का दर्जा जो है, आनि कि केंद
14:02लग्दा सामने रखते हैं और सरकार कहते हैं कि हमने और अपके पांच मुद्दों को एक्सेप्ट कर लिया है उसकर
14:07काम भी कर दिया लेकिन वो कहते हैं कि नहीं हमारा तो बस यह है तो क्या लग्दा का अंदूलन
14:11अपूरी तरह पर्यावरण और समय धानी का दिकारू कांद�
14:30पूछ पूछ रहे हैं कि अगर आंदोलन पूरी तरह गया राजनितिक था तो अब राजनितिक संगठनों के मंज पर क्यों
14:36दिखाई दे रहे हैं कुछ लोग ये भी आरोप लगा रहे हैं कि अलग अलग राजनितिक दल और संगठन इस
14:41आंदोलन को अपने अपने एजेंडे क
14:43के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं हो पियला के इन आरोस पर सूनंब वांक्चुक लाघार कहते रहे
14:48कि उनका संगर्श किसी पार्टी के लिए नहीं बलकी हिमालय लधाक और आने वाली
14:53पीडियों की दिये है
14:54तो अब सवाल सिर्थ सोनम वांग चुक का नहीं है
14:57सवाल ये भी है
14:58किया लोगतंतर में लंबे समय तक चलने वाले आंदोलनों का अंद हमेशा राज़ुनिती में ही होता है
15:03क्या हर समाजिक आंदोलन किसी ना किसी राजनितिक घुरुविकरण का हिस्सा बन जाता है
15:08या फिर ये व्यवस्था की मजबूरी है कि बिना राजनितिक दबाब के बड़े फैस्वे नहीं लिये जाते हैं
15:15फिलहाल जंतरबंतर पर आंदोलन जारी है ब्युखरताल की घुशना हो चुकी है
15:18सरकार की ओर से अभी तक कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है
15:22लेकिन ये तय है कि आने वाले दिनों में ये मुद्धा केवल पर्यावरण या लादाख तक सिनित नहीं रहने वाला
15:27है
15:27बलकि राश्टिय राजनिती में भी इसकी गूंच सुनाई दे सकती है
15:30अब देखना ये होगा कि क्या सरकार फिर बाच्वित का रास्ता चुनती है
15:34क्या आंदोलन अपनी पूरानी गांधिवादी दिशा में आगे बढ़ता है या फिर ये संगर्ष एक नए राजनितिक मोड पर पहुंच
15:41जाता है
15:42फिल्हाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि सोनम बांग्चु का सफर सिर्फ एक इंजीनियर या शिक्षा सुधारक का सफर
15:49नहीं रहा
15:49ये कैसे व्यक्ति की कहानी है जिसने विज्ञान से शुरुआत की पर्यावरन तक पहुंचे
15:54सम्मेधानिक अधिकारों की लडाई लड़ी और आज देश की राजधानी में एक नए आंगोलन के केंदर में खड़े हैं
16:00लेकिन इस पूरे विवाद का अंतिम फैसला सड़क पर नहीं बलकि बाचीत सम्मेधानिक प्रक्रिया और राजनितिक इक्षा शक्ती से ही
16:08निकलेगा
16:09इस खबर में इतना ही और इस नए प्रोटेस्ट से जो भी नए खबरे आएंगी कोपरोजुंत पार्टी के जो अंशन
16:15का प्रोटेस्ट है वांग्चु का उससे जो भी अपडेट्स आएंगे आपको हम ज़रूर बताएंगे
16:40subscribe to one India and never miss an update
16:45download the one India app now
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