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  • 4 hours ago
आईआईटी कानपुर के वरिष्ठ प्रोफेसर बोले इस ख़ास स्पेस जोडेसी इक्विपमेंट डोरिस से देश के 65 केंद्र सीधे तौर पर जुड़े हैं.

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Transcript
00:00Doris is a very important step for the state of Geodetic Infrastructure.
00:08In this regard, the Department of Science and Technology
00:12in July 2019,
00:15the National Center for Geodacy was established in the I.I.T. Kahnpur,
00:19the state of Geodetic Infrastructure and Geodacy in general,
00:27the Department of Science and Technology in general,
00:32and the state of Geodetic Infrastructure was one of the four
00:37of the state of Geodacy.
00:42One is the VLBI, one is the SLR, one is the GNSS,
00:48and the fourth is Doris.
00:50तो उस उदेश से ये एक बहुती खास कदम है,
00:56देश के Geodetic Infrastructure को प्रमोट करने के लिए,
01:00जिसका प्रियोक करके बहुत सारे
01:03strategic, societal और scientific applications में इसका प्रियोक किया जाएगा.
01:08आज की तारिक में इन सभी जिन आपने applications का नाम लिया,
01:16इन सभी के लिए एक बहुत ही precise measurement की जरुवत होती है,
01:21ताकि आप किसी प्रकार का prediction करना चाहते हैं,
01:25उसके अंदर में उसकी uncertainty बहुत कम हो,
01:29बहुत ज्यादा आप सटीकता के साथ उनका prediction कर सकें,
01:35उस उद्देश से Doris और Unspace Geodetic Infrastructures इसका नाम मैंने आपको पहले बताया,
01:42यह सारे मिलके एक बहुत ही high precision measurement के लिए आप contribute करते हैं,
01:49जिसकी वज़े से इन सारे जो sea level rise है,
01:54या melting है, ice melting है, या आपका भूकम समंदित गणना हैं,
02:01या और दूसरे जो disaster related जो भी जो areas हैं,
02:07उनमें सारे मिलके precision के साथ गणना करने में आपको सयोग करेंगे.
02:12आप जैसे जानते हैं कि Doris मुख्य रूप से France द्वारा निर्मित Space Geodetic equipment है,
02:21तो इसको आप market में जाके खरीद नहीं सकते.
02:26इसके लिए आपको एक international Doris service करके एक agency है,
02:34जिसके सहयोग से ही आप इसको स्थापित कर सकते हैं.
02:37तो इस प्रिक्रिया में IIT कानपूर ने भी जब 2019 में ये National Center for Geodacy IIT कानपूर में established
02:46हुआ था,
02:59इस लिहाँ से मेरा पूरे विश्वास है कि हमारे student और दूसरे research scholars हैं,
03:08ये French scientist के साथ मिलके इस area में बहुत सारा काम कर सकते हैं.
03:13उधान के तौर से हमारे कुछ student इस समय फ्रांस में हैं, जो इस पूरे equipment से जो data आता
03:21है, उसको कैसे process किया जाएगा, उसके क्या क्या applications हो सकते हैं, इसके बारे में ये वो लोग इस
03:27समय काम कर रहे हैं.
03:29तो ये equipment कुणकी खास्तोर से एक tripitrite arrangement के तहत इस equipment को है set up किया गया है,
03:51और उसी के तहत हमारे एक student को भी एक
04:00प्रिक्रिया को आगे बढ़ाने में लगा हुआ है, और हम लोग भी अभी हम लोगों ने रिसेंटली एक
04:14GeoCon 26 organized किया था, पहली national conference GeoDC के उपर, जिसमें वहां से भी scientist आय थे और हम
04:22सब लोग इस प्रिक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कि इस area में हम कैसे सहयोग कर सकते हैं, कैसे
04:29IIT कानपूर एक एक local center established के आ जा सकता है, डोरिस data processing के तहत, तो इस प्रिक्रिया
04:36में हम आगे काम कर रहे हैं और बहुती शीग हम इस area में आगे student exchange, faculty exchange, इसके
04:43बारे हम काम करेंगे ताकि इस data को process करने के लिए, ज्यादा से ज्यादा well qualified human resource country
04:50में उपलबद हो सके
04:51इस समय डोरिस network लगभग 65 station set up किये जा चुके हैं, in fact ये विश्व के बहुत अलग
05:04अलग जगों पे स्थापित किये गए ताकि एक uniform network पूरे विश्व में स्थापित किया जा सके
05:10ताकि जो satellite orbit determination जो की बहुती महत्वपूर्ण अंग है इस प्रक्रिया में वो बहतर किया जा सके
05:21इसकी वज़े से ये पूरा network जो कनेस और IGN हैं इनके सहयोग से पूरे विश्व में ideas ने करीब
05:3065 जगों पे स्थापित किया हुआ है
05:36इसका मुख्य उदेश जैसा मैंने आगे के लिए प्लान बनाया है कि हम किस तरीके से इसको और विस्तित कर
05:41सके
05:42जैसे कि मैंने आपको बताया नेशनल सेंटर फोर जोडेसी की स्थापना डीस्टी के सहयोग से जुलाई 2019 में की गई
05:49थी
05:49उसके बाद उसी सहयोग को आगे बढ़ाते हुए हम लोगों ने छे और रीजनल सेंटर फोर जोडेसी स्थापित किये
06:00इसका मुख्य उदेश जैसा मैंने आपको पहले बोला कि देश में जीओडेसी रिलेटेड जो इंफ्रास्रक्ट्चर या इको सिस्टम में इसको
06:08बढ़ावा देना था
06:09क्यूंकि इस समय देश में नेशनल जीओस्पेशल पॉलसी के तहत एक बहुत ही स्पेशल मिशन भी बढ़ाया जा रहा है
06:22जिसको हम नेशनल जीओस्पेशल मिशन बोलते हैं
06:24और उसके अंदर जो सबसे खास चीज है जिसको आप बोल सकते हैं बैकबोन फॉर पोजीशनी वो कंट्री का जीओडेटिक
06:33इंफ्रास्रक्ट्चर है तो उस लिहाज से सर्वेव इंडिया द्वारा स्थापित किया गया जी एनेसेस इंफ्रास्रक्ट्चर जिसमें देश मे
06:42लगबग 1100 से जादा जी एनेसेस कोर्स स्टेशन सेट अप किया गये इसके लावा इस समय कंट्री में यह जो
06:50हमने पहला डोरिस सेशन सेट अप किया है और भविश में आचा है कि हम लोग दो और स्पेश जोडेटिक
06:58इंफ्रास्रक्ट्चर सेट अप कर सकेंगे जिनका ना
07:11सिस्टम डेवलप करने में साहिक होंगे जिसका प्रयोक करके आप नेविगेशन सम्मंदित और बहुत सारी साइंटिफिक गतिविदियों में आप कारे
07:20कर सकेंगे
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