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India has signed multiple Free Trade Agreements (FTAs) with countries across the world, but is the country really benefiting from them? In this video, we break down the three major reasons behind India's rising trade deficit, including tariff asymmetry, inverted duty structure, and underutilization of FTAs by exporters.

Topics Covered:

What is FTA?
Why is India's trade deficit rising?
Tariff structure explained
Inverted duty structure impact
GTRI report findings
Indian manufacturing and exports

Watch till the end for a simple explanation of how FTAs affect India's economy and industries.
#FTA #TradeDeficit #IndianEconomy #Economy #BusinessNews #Export #Import #Manufacturing #GTRI #IndiaNews #EconomicAnalysis #StockMarket #Finance

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Transcript
00:00भारत दुनिया भर में FTA पर FTA sign कर रहा है। सरकार कह रही है कि इससे export बढ़ेगा, नई
00:05बाजार खुलेंगे और भारत global trade power बचाएगा। लेकिन एक चौकाने वाला सच यह है कि जिन देशों के साथ
00:11भारत ने FTA किया, उन ही देशों के साथ हमारा trade deficit सबसे तेजी से बढ़ा ह
00:18आखर यह समझोते हैं भारत को फायदा पहुंचा भी रहे हैं या विदेशी कमपनियों को ही सिर्फ फायदा पहुंच रहा
00:23है। GTRI की ताज़ा report में ऐसे आक्रे सामने आए हैं जो आपको हैरान कर सकते हैं। तो चलिए, free
00:29trade agreements यानी FTA भारत इस समय दुनिया के साथ जो तेज
00:45मिलेगा और भारत global trade में अपनी पकड मजबूत करेगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर FTA
00:52इतने ही फायदेमंद हैं तो जिन देशों के साथ भारत ने पहले ही FTA किया हुआ है, उन्हीं देशों के
00:57साथ भारत का trade deficit लगाता राकिर क्यों बढ़ रह
01:00है। क्या हम दुनिया के बाजार जीत रहे हैं या फिर विदेशी कंपनियों के लिए अपना बाजार और भी ज्यादा
01:06खोल रहे है। देखें GTRI यानि Global Trade Research Initiative की जून 2026 की ताज़ा रिपोर्ट में कई ऐसे आकरे
01:13सामने आए जो इस बहस को और भी ज्यादा दिल्चस्प बना
01:30को कवर करते हैं। भारत के कुल 15 FTA implemented हैं जो 27 देशों को कवर करते हैं। इसके अलावा
01:369 और trade agreements अलग-अलग cycles अलग-अलग processes में हैं। अगले महीने 15 July 2026 से इंडिया UK
01:44trade agreement भी लागू होने जा रहा है। यानि कुल मिलाकर भारत 79 देशों के साथ 69 countries के साथ
01:51FTA या तो लागू कर
01:52चुका है या लागू करने की process में है। अब दिल्चस्ट बात यह है कि ये 69 countries भारत के
01:58कुल export का 75.3% और import का 65.5% कवर करते हैं। यानि भारत की trade strategy
02:07में free trade agreements अब एक बहुत important role निभा रहे हैं। अब आते हैं सबसे एहम सवाल पर trade
02:14deficit का क्या हुआ। देखियो GTRI के report ने FTA लाग�
02:21नौ के बाद के दौर या फिर 2023 से 2025 की जो दौर है उन दोनों के बीच का comparison
02:27किया एक तुलना की है। और आंक्डे जो सामने आए हैं वो देख करके आप भी चौकेंगे। एस यान देशों
02:33के साथ भारत का trade deficit 381% जापान के साथ trade deficit 318% बढ़ा।
02:42South Korea के साथ यही trade deficit 268% बढ़ा। अब compare करें तो बाखी दुनिया के देशों के साथ
02:49इसी duration में भारत का trade deficit सिर्फ 142% बढ़ा।
02:54यानि जिन बड़े देशों के साथ भारत ने free trade agreement किया, FTA किया, उनके side deficit कहीं ज्यादा तेजी
03:01से बढ़ा है, यानि घाटा बढ़ा है।
03:04पिछले तीन सालों में ASEAN, जापान और South Korea के साथ भारत का average yearly trade deficit लगभग 62 अरब
03:12डॉलर तक पहुँच किया है।
03:13यही आँख्डे आप policy makers के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
03:17अगर आपको लगता है कि पुराने समझोतों में यह दिक्कत है, तो नए FTA का data भी देख लीजे।
03:21वितवर्श 2025 में, fiscal year 2025 में UAE, Australia, Mauritius और EFTA देश जिसमें की Switzerland, Norway, Iceland जैसे देश
03:31आते हैं, उनको भारत ने कूल 48.6 Arab dollars का export किया।
03:36लेकिन इन देशों से इंपोर्ट हुआ है सिर्फ और सिर्फ 100 Arab dollar का।
03:41अब GTRI का कहना है कि जैसे जैसे इन डील्स के तहट टारिफ और काम होंगे, इंपोर्ट और बढ़ सकता
03:47है जिससे यह deficit भी और ज्यादा बढ़ने की पूरी-पूरी संभावना है।
03:51पंद्रा लागू FTA जो 27 देशों को कवर कर रहे हैं भारत के कुल export का 28.5%, 28.5
03:58% और import का 32.2% हिस्सा रखते हैं।
04:04तो 10 पुराने FTA जो 2012 से पहले 19 देशों के साथ हुए थे, वो export का 16.6%
04:10और import का 18% यानि 18% कवर कर रहे हैं।
04:14वहीं 2020 के बाद जो FTA हुए, वो 5 नए FTA थे, वो export का 11.9% और import
04:20का 14.1% हिस्सा कवर करते हैं।
04:23इसके अलावा 42 कंट्रीज, 42 देशों के साथ अभी प्रस्तावित 9 FTAs हैं जो आने वाले समय में भारत के
04:30export का 46.8% और import का 33.3% कवर करेंगे।
04:35यानि आने वाले सालों में भारत का एक बड़ा हिस्सा FTA आधारेट ट्रेट पर निर्भर रहने वाला है।
04:41अब सबसे जरूरी सवाल, आखे ट्रेट डेफिसिट बढ़ क्यों रहा है और वो भी FTA होने के बात।
04:47GDRR इसके पीछे तीन बड़े कारण बता रहा है।
04:49पहला कारण है टारिफ इस्ट्रक्शर में असमान था।
04:52भारत का औसत MFN टारिफ लगभग 12.6% है और काई प्रोडेक्स पर ये 150 फीसिदी तक पहुंचता है।
04:59दूसरी तरफ सिंगपोर का आवरेज MFN टारिफ लगभग 0% है।
05:03जबकि जपान, उस्ट्रेलिया, मलेशिया और UAE में ये 4 फीसिदी से भी कम है।
05:07ऐसे में जब भारत FTA के तहट अपने टारिफ कम करता है, तो विदेशी सामान भारतिय बाजार में काफी सिस्ता
05:13हो जाता है।
05:13लेकिन भारतिय प्रोडक्स को उन देशों में उतना एक्स्ट्रा फायदा नहीं मिलता क्योंकि वहां पहले से ही टारिफ काफी कम
05:20है।
05:21अब आते हैं दूसरे कारेंट पर, inverted duty structure यानि raw materials, कच्छे माल पर ज्यादा tax और तयार माल
05:28पर यानि finished product पर कम या फिर शून्य tax एक्जाम्पल के लिए समझें, steel और aluminium जैसे inputs पर
05:347.5% से 10% तक की duty लगती है, लेकिन इन ही से बने कई products, FTA केते
05:40हैं, duty-free भारत में आ जाते हैं।
05:42अब इसका नतीजा यह होता है, कि Indian manufacturer मेहंगा raw material खरीते हैं, जबकि विदेशी कंपनियां तयार माल सस्ते
05:48में बेच देती हैं, ऐसे में घरेलू, business की competitiveness कमजोर पर जाती है।
06:12DTRI के report का concept साफ है, सिर्फ tariff घटा देने से trade नहीं बढ़ता, जब तक भायती है, businesses
06:17की competitiveness या फिर competitive capacity नहीं बढ़ेगी, input cost कम नहीं होगी और manufacturing मजबूत नहीं होगी, तब तक
06:25FTA का पूरा फायदा भारत को नहीं मिल पाएगा।
06:28अब सवाल आपसे, क्या भारत को अपने FTA strategy में बदलाफ करना चाहिए, या फिर focus manufacturing और industry को
06:34मजबूत बनाने पर होना चाहिए।
06:35आपकी जो भी राय है, comment box में लिखेगा ज़रूर।
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