00:00भारत दुनिया भर में FTA पर FTA sign कर रहा है। सरकार कह रही है कि इससे export बढ़ेगा, नई
00:05बाजार खुलेंगे और भारत global trade power बचाएगा। लेकिन एक चौकाने वाला सच यह है कि जिन देशों के साथ
00:11भारत ने FTA किया, उन ही देशों के साथ हमारा trade deficit सबसे तेजी से बढ़ा ह
00:18आखर यह समझोते हैं भारत को फायदा पहुंचा भी रहे हैं या विदेशी कमपनियों को ही सिर्फ फायदा पहुंच रहा
00:23है। GTRI की ताज़ा report में ऐसे आक्रे सामने आए हैं जो आपको हैरान कर सकते हैं। तो चलिए, free
00:29trade agreements यानी FTA भारत इस समय दुनिया के साथ जो तेज
00:45मिलेगा और भारत global trade में अपनी पकड मजबूत करेगा। लेकिन यहां एक बड़ा सवाल खड़ा होता है। अगर FTA
00:52इतने ही फायदेमंद हैं तो जिन देशों के साथ भारत ने पहले ही FTA किया हुआ है, उन्हीं देशों के
00:57साथ भारत का trade deficit लगाता राकिर क्यों बढ़ रह
01:00है। क्या हम दुनिया के बाजार जीत रहे हैं या फिर विदेशी कंपनियों के लिए अपना बाजार और भी ज्यादा
01:06खोल रहे है। देखें GTRI यानि Global Trade Research Initiative की जून 2026 की ताज़ा रिपोर्ट में कई ऐसे आकरे
01:13सामने आए जो इस बहस को और भी ज्यादा दिल्चस्प बना
01:30को कवर करते हैं। भारत के कुल 15 FTA implemented हैं जो 27 देशों को कवर करते हैं। इसके अलावा
01:369 और trade agreements अलग-अलग cycles अलग-अलग processes में हैं। अगले महीने 15 July 2026 से इंडिया UK
01:44trade agreement भी लागू होने जा रहा है। यानि कुल मिलाकर भारत 79 देशों के साथ 69 countries के साथ
01:51FTA या तो लागू कर
01:52चुका है या लागू करने की process में है। अब दिल्चस्ट बात यह है कि ये 69 countries भारत के
01:58कुल export का 75.3% और import का 65.5% कवर करते हैं। यानि भारत की trade strategy
02:07में free trade agreements अब एक बहुत important role निभा रहे हैं। अब आते हैं सबसे एहम सवाल पर trade
02:14deficit का क्या हुआ। देखियो GTRI के report ने FTA लाग�
02:21नौ के बाद के दौर या फिर 2023 से 2025 की जो दौर है उन दोनों के बीच का comparison
02:27किया एक तुलना की है। और आंक्डे जो सामने आए हैं वो देख करके आप भी चौकेंगे। एस यान देशों
02:33के साथ भारत का trade deficit 381% जापान के साथ trade deficit 318% बढ़ा।
02:42South Korea के साथ यही trade deficit 268% बढ़ा। अब compare करें तो बाखी दुनिया के देशों के साथ
02:49इसी duration में भारत का trade deficit सिर्फ 142% बढ़ा।
02:54यानि जिन बड़े देशों के साथ भारत ने free trade agreement किया, FTA किया, उनके side deficit कहीं ज्यादा तेजी
03:01से बढ़ा है, यानि घाटा बढ़ा है।
03:04पिछले तीन सालों में ASEAN, जापान और South Korea के साथ भारत का average yearly trade deficit लगभग 62 अरब
03:12डॉलर तक पहुँच किया है।
03:13यही आँख्डे आप policy makers के लिए चिंता का सबब बन रहा है।
03:17अगर आपको लगता है कि पुराने समझोतों में यह दिक्कत है, तो नए FTA का data भी देख लीजे।
03:21वितवर्श 2025 में, fiscal year 2025 में UAE, Australia, Mauritius और EFTA देश जिसमें की Switzerland, Norway, Iceland जैसे देश
03:31आते हैं, उनको भारत ने कूल 48.6 Arab dollars का export किया।
03:36लेकिन इन देशों से इंपोर्ट हुआ है सिर्फ और सिर्फ 100 Arab dollar का।
03:41अब GTRI का कहना है कि जैसे जैसे इन डील्स के तहट टारिफ और काम होंगे, इंपोर्ट और बढ़ सकता
03:47है जिससे यह deficit भी और ज्यादा बढ़ने की पूरी-पूरी संभावना है।
03:51पंद्रा लागू FTA जो 27 देशों को कवर कर रहे हैं भारत के कुल export का 28.5%, 28.5
03:58% और import का 32.2% हिस्सा रखते हैं।
04:04तो 10 पुराने FTA जो 2012 से पहले 19 देशों के साथ हुए थे, वो export का 16.6%
04:10और import का 18% यानि 18% कवर कर रहे हैं।
04:14वहीं 2020 के बाद जो FTA हुए, वो 5 नए FTA थे, वो export का 11.9% और import
04:20का 14.1% हिस्सा कवर करते हैं।
04:23इसके अलावा 42 कंट्रीज, 42 देशों के साथ अभी प्रस्तावित 9 FTAs हैं जो आने वाले समय में भारत के
04:30export का 46.8% और import का 33.3% कवर करेंगे।
04:35यानि आने वाले सालों में भारत का एक बड़ा हिस्सा FTA आधारेट ट्रेट पर निर्भर रहने वाला है।
04:41अब सबसे जरूरी सवाल, आखे ट्रेट डेफिसिट बढ़ क्यों रहा है और वो भी FTA होने के बात।
04:47GDRR इसके पीछे तीन बड़े कारण बता रहा है।
04:49पहला कारण है टारिफ इस्ट्रक्शर में असमान था।
04:52भारत का औसत MFN टारिफ लगभग 12.6% है और काई प्रोडेक्स पर ये 150 फीसिदी तक पहुंचता है।
04:59दूसरी तरफ सिंगपोर का आवरेज MFN टारिफ लगभग 0% है।
05:03जबकि जपान, उस्ट्रेलिया, मलेशिया और UAE में ये 4 फीसिदी से भी कम है।
05:07ऐसे में जब भारत FTA के तहट अपने टारिफ कम करता है, तो विदेशी सामान भारतिय बाजार में काफी सिस्ता
05:13हो जाता है।
05:13लेकिन भारतिय प्रोडक्स को उन देशों में उतना एक्स्ट्रा फायदा नहीं मिलता क्योंकि वहां पहले से ही टारिफ काफी कम
05:20है।
05:21अब आते हैं दूसरे कारेंट पर, inverted duty structure यानि raw materials, कच्छे माल पर ज्यादा tax और तयार माल
05:28पर यानि finished product पर कम या फिर शून्य tax एक्जाम्पल के लिए समझें, steel और aluminium जैसे inputs पर
05:347.5% से 10% तक की duty लगती है, लेकिन इन ही से बने कई products, FTA केते
05:40हैं, duty-free भारत में आ जाते हैं।
05:42अब इसका नतीजा यह होता है, कि Indian manufacturer मेहंगा raw material खरीते हैं, जबकि विदेशी कंपनियां तयार माल सस्ते
05:48में बेच देती हैं, ऐसे में घरेलू, business की competitiveness कमजोर पर जाती है।
06:12DTRI के report का concept साफ है, सिर्फ tariff घटा देने से trade नहीं बढ़ता, जब तक भायती है, businesses
06:17की competitiveness या फिर competitive capacity नहीं बढ़ेगी, input cost कम नहीं होगी और manufacturing मजबूत नहीं होगी, तब तक
06:25FTA का पूरा फायदा भारत को नहीं मिल पाएगा।
06:28अब सवाल आपसे, क्या भारत को अपने FTA strategy में बदलाफ करना चाहिए, या फिर focus manufacturing और industry को
06:34मजबूत बनाने पर होना चाहिए।
06:35आपकी जो भी राय है, comment box में लिखेगा ज़रूर।
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