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  • 2 minutes ago
ईश्वरपुर के पंडित कृष्ण मोहन पाठक संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार 2025 के लिए चयनित हुए, जिससे गया का ये ऐतिहासिक गांव गौरवान्वित हुआ है.

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00:05बिहार के गया में एक ऐसा एतिहासिक गाउं है जहां हवाओं में भी शास्त्रिय संगीत घुलता है
00:12करीब 300 से 400 साल पुराने ईश्वरपुर गाउं के 300 घरों में विद्या देवी सरस्वती माता का साक्षात निवास है
00:20तब ही तो ग्रामिन बच्पन से ही तबला, हार्मोनियम और अध्रुपत गाई की का कड़ा अभ्यास शुरू कर देती है
00:41इस म्यूजिशिन विलिच की कहानी बेहत जादूई है
00:44स्थानिया बताते हैं कि मुगल काल में राजस्थान से आएवे लोग तान से इनके वनशज हैं
00:49इस घराने के संगीत विद्या में इतनी शक्ती थी कि सदियों पहले उन्होंने टिकारी महराज के गुसेल हाथी को संगीत
00:57से ठीक कर दिया था
00:58इससे खुश होकर महराज ने इनाम में साथ सो एकड का मौजे दिया था जहां आज ये संगीत कारों का
01:05गाउं बसा है
01:32इश्वरपुर गाउं का नाम एक बार सर से पूरे देश में गुंज रहा है
01:35गया घराने के प्रख्यात धुरुपद गायग पंडित कृष्ण मोहन पाठक को भारत सरकार द्वारा देश के प्रतिश्चत संगीत नाटक अकादमी
01:44पुरसकार 2025 के लिए चैनित किया गया है
01:47आगा में दिनों में राश्ट्रपती द्रौपदी मुर्मू उन्हें इस सम्मान से नवाजेंगी
01:52अभ्यास और प्रियास से हम इसमें आगे बढ़ते गए और बढ़ते बढ़ते देश-विदेश के कौने-कौने में भी हमने
02:07अपना प्रोग्राम दिया
02:09बनारस धुर्बत मेला में टेलिवीजन आपको पटना से आपको सर्व अकाल कनाडा से ये सब प्रोग्राम होते रहा और होते
02:24होते अंत में भारत की सरकार संगीत नाटक एकाइडमी एवाड भी हमें
02:35प्राप्ट करने का सोसर प्राप्ट हुआ हाँ राश्वती पुर्षकार राश्वती देंगी जो अब दिम मुर्मुर ऐसा समझा जाता है
02:50पंडित कृष्ण मोहन पाठक अपने परिवार की चौथी पीड़ी हैं जो धुरुपद, खयाल, ठपपा और ठुमरी की प्राचीन परंपरा को
02:58नई पीड़ी तक पहुँचा रहे हैं
02:59ये सम्मान सिर्फ उनका नहीं बलकि पीड़ियों की उस कठन साधना का है जो सदियों से इस मिट्टी में जिन्दा
03:06है
03:06जया घराना की विशेष्टा ये है की इसकी पैट धुर्बत धमार में रही
03:19धुर्बत धमार हमारे दादा परदादा ये सब करते आए हमारे पिता भी करते आए और पहुच से पहुच से ये
03:31चौची पिड़ी है
03:32This is the four people who are doing this.
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