00:00इससे बड़ा दुश्मन किसी इस्तरी का नहीं हो सकता, ये जो भाव है, I need a man in my life,
00:07इस्तरी को ये अनुमती ही नहीं दी गई क्यों ये सोच भी पाए कि पुरुष के बिना जीवन हो सकता
00:11है, कि अगर पुरुष नहीं है तो मैं क्यों हूँ, हाई जिन्दगी कितनी सूनी है, �
00:16बेरोनक है, वीरान है, शम्शान है, कैसे, जीवन में इतना कुछ है करने को देखने को चार जिन की जिन्दगी
00:25है, समय वैसे इतना कम है, उसको किसी सार्था को देश्य में डाली है न, क्या करेंगी किसी इंसान के
00:31पीछे भाग भाग के लिपट के क्या करना है, क्या करो गय
00:45या दूसरे को अपने उपर निर्भर बना लेना ये सब हिंसा के रूप हैं अपने आप में संपून रहिए अपने
00:53आप में पर्याप्त रहिए उसके बाद जो रिष्टा बनता है उस रिष्टे में प्रेम की खुश्बू होती है उस रिष्टे
01:00में हिंसा नहीं होती है उस रि
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