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गर्मी में मायके की रात vs ससुराल की रात||Hindi Cartoon Stories||A Summer Night at My Parents' Home v
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00:00माईके की रात वर्सिस सस्राल की रात
00:03रात के ग्यारा बजे हैं बाहर उमस और बहंकर गर्मी है
00:06गौरी रसोई के तबे के पास फर्श पर बिख्री होई जली रोटियों के बीच बैठी होई है
00:10उसकी बड़ी ममी कलो जी हाथ में जलती हुई लकड़ी का जलता हुआ टुकड़ा लियो गुस्टे से हाफ रही है
00:16चचेरे भाई निठला और निकमा सोफे पर बैठ कर हस रहे हैं
00:20और बड़े पापा चतुर सिंग दर्वाजे पर खड़े होकर कलाई घड़ियां देख रहे हैं
00:24अरे ओ कल मुही आँख्या फूट गई थी क्या तेरी या रोटी बनाई है या कोईला
00:29यहां मुद का ठूसने के लिए बैठी है इस घर को धरमचाला समझ रखा है क्या
00:33बड़ी ममी माफ कर दो छूला बहुत तेज जल रहा था और उमस से चक कर आ गया था
00:38इसलिए ध्या देरा मुझे मत बहरो बहुत दर्द हो रहा है
00:42अरे कल लो क्यों अपना खून जला रही है इस मनहूस के पीछे
00:45इसके बाप के मनने के बाद से हमारे घर का तो सुक्चैन ही छिन गया है
00:48खिला खिला कर इसकी खाल मोटी करती है तब ही जुबान लडाती है
00:53ममी यह ऐसे नहीं सुद्रेगी इसकी जुबान बहुत चलने लगी है आज कल
00:56कल कह रही थी कि इसे आगे पढ़ाई करनी है पढ़ लिकल लाट साब बनेगी मारानी
01:02अरी पढ़ाई करेंगी नौ दिन चड़े हडाई कोस इससे घर का जाड़ू पहुचा तो ठीक से होता है नहीं है
01:08चलिए शैर की मेम साब बनने दो कोड़े मारो इसे
01:11कलो जी गौरी के बाल पकड़ कर उसे जोर से जमीन की तरफ धक्का देती है
01:15गौरी का सिर्थ रसोई के एक काउंटर से टक्राता है चूडियां तोड़ जाती है और वो दर्द से चीक पढ़ती
01:20है और वेहोश हो जाती है
01:21रात के दो बज़े उसे होश आया है
01:23चैतुर सिंग कलो और दोनों बेटे अंदर ठंडी हवा में सो रहे हैं
01:27गौरी के माथे से खून बैरा है
01:28वो हाद में एक कटा हुआ पुराना तक्या सीने से चिपकाई
01:31उनके बंद दर्वाजे के बाहर भाहर बहां करूमस और पसीने में खड़ी है
01:35ताई जी मुझे बहुत तेज गर्मी लग रही है क्या मैं आपके कमरे में सो जाऊँ
01:41अच्छा हमारे कमरे में सोएगी कहीं कि मारानी पटरानी हो रही है
01:45अच्छा तो अब तू आदी रात को हमारी नींद खराब करके हमारी जगा सोने के सपने देख रही है
01:50कहीं दिमाग सत्या तो नहीं गया तेरा भागया से
01:53ये भगवान कैसी है ये मेरी माईके की रात
01:56जहां बाहर जून की बहेंकर लूट चल रही है
01:59सब लोग अंदर सो रहे हैं और मैं
02:01क्या मेरा कोई घर नहीं है
02:03अरे ओ मनहूस की अउलाद
02:04अब यहां बाहर खड़ी होकर
02:06क्या भूतनी की तरह दर्वाजे पर मंडरा रही है
02:08जा नीचे उस कोट्री में जाकर मर
02:10और हां बाहर की ये लाइट बंद कर देना
02:13बिजली का बिल क्या तेरे मरे हुए बाप के खाते से आएगा
02:33कलो जी गौरी को जोर से धक्का देकर
02:36उस अनेरे छोटे स्टोर रूम में धके लेती है
02:38और बाहर से लोहे की भारी कुणी चड़ा देती है
02:41स्टोर रूम में बंद होते ही
02:42गौरी घुटनों के बलबैट जाती है
02:44मच्छरों का जुंड उसके चेहरे पर मंडराने लगते है
02:47और पसीने से भीग जाती है
03:01रोते रोते गौरी की आँख लग जाती है
03:04अगली सुबा पांच बजे कलो जी चीखती हुई अपने कमरे से आती है
03:09अरे ओ महरानी जा जा कर हैंड पंप से पानी लेकर आ
03:12मेरे बच्चों को गर्मी हो रही है परेशान हो रहे है
03:15और यहाँ पर महरानी को आराम परवाने से फुरसत नहीं है
03:19अब जा जा कर बाल्टी भर कर लेकर आ
03:50जी ताही जी
03:51मदुमक्की का चत्ता चोड़ दिया ओ इस बेचारी पर
03:54अरे विमला चाची क्या बताएं तुम्हें
03:57ये गौरी जो है ना पूरे घर की मिठा या केले ही सफा चटकर जाती है अंदर बैटके
04:02अब तुम तो जानती हो जिसका खून इतना मीठा होगा उसे तो मच्छर जादा काटे गे ही ना
04:07सारा खून चूज गए इसके
04:09देखो हमारे निठला निकम्मा को तो एक मच्छर भी नहीं चूता
04:39कलू जी विमला के अंदर जाते ही गोरी का कान पकड़कर उसे अंदर खींचती है
04:50दोपैर के दो बजे हैं सुरज की सीधी और तीखी धूप खुले आंगन में पड़ रही है
04:55जमीन का फर्ष तवी की तरह तपरा है
04:57अरे ओ कामचोर सीधे इस तपते फर्ष पर गुटनों के बल बैट और पूरे आंगन का पोच्छा लगा
05:15तपती धूप में गौरी छत का पोचा लगाती है और पसीने में भीगती हुई दिन भर काम में लगी रहती
05:20है
05:20शाम के साथ बजे है निठला और निकम्मा गौरी को दोनों हाथों से पकड़ कर खसीट कर ला रहे हैं
05:26वो उसे घर के कोने में बने एक छोटे अंधेरे स्टोर रूम की तरफ ले जा रहे हैं जहां कबाल
05:31भरा है
05:33बहुत रो रही थी ना दूपैर में आज तेरी आवाज इस गोठी से बाहर नहीं जानी चाहिए
05:39रोड़ो मुझे बड़े बाबा बजाओ
05:42बेटियां अंधेरे में आज रात के खाना बंद है तेरा
05:45निठला निकमा गोरी को कमने में बंद करके लोही की भारी कुन्डी चड़ा कर ताला बंद कर देते हैं
05:51अंधर से गोरी के दरवाजा पीटने की दबी दबी आवाज आती है
05:54नरात के डेड़ बजे है आसमान में बिجली कड़क रही है पर हवा बिलकुल बंद है
05:58निठल लाओ निकम मैं स्टोर रूम का ताला खोल कर गौरी को बालों से पकड़ कर खींचते हुए सीडियों से
06:03ऊपर खुली छट पर लाते है
06:06नीचे कोठरी में तेरे रोने के आवाज से पापा की नीद खराब हो रही थी
06:09आज की पूरी रात तो इसी तपती हुई छट पर काटेगी
06:12भया उपर बहुत मच्चर है हवा भी नहीं चल रही मेरा दम गुट जाएगा मुझे नीचे सीडियों में सो जाने
06:19दो
06:19चुक चाप पड़ी रहे यहां पर सुब़ पाच बजे नीचे आकर पानी भनना है याद रखना
06:25चट का दर्वाजा बाहर से बंध हो जाता है
06:27गौरी अकेली पसीने से लटपद मच्चरों की जुन के बीच चट पर घुटनों में सिर छपा कर सुबख रही है
06:32आगले दिन दोपैर के तीन बज रहे हैं बाहर जून की चलचलाती धूप और भहन कर गर्मी है
06:37रसुल की कोने में एक स्टील की थाली में सोकी फफून लगी बासी रोटियां रखी है
06:41गौरी पसीने से पूरी तरह भीगी होई है और उसने ताई कलो जी के जबरदस्ती करने पर उनका भारी सर्दियों
06:47वाला स्वेटर पहन रखा है
06:49बड़ी मम्मी बगवान के लिए मुझ बरता रसकाओ जून का महीना इस भारी स्वेटर में मेरा दम घुट रहा है
06:56बहुत पसीने आ रहे हैं मुझे मुझे दूसरे कपड़े दे दो
07:00अरे ओ महारानी नए कपड़े क्या तेरे लिए आसमान से टपकेंगे गर्मियों के कपड़े फट गए तो क्या इन सर्दियों
07:06के कपड़ों का चार डालेगी
07:08चुपचा पैन इस है नहीं तो धूप मैं खड़ा कर दूँगी
07:10जाड़ा नगरे मत कर ले चुपचा भी रोटी खा और बरतन मायना बैट
07:14भाया ये तीन दिन पुरानी बासी रोटी इसमें से बदबु आ रही मुझसे नहीं खाए जाएगी
07:20खानी तो ये ही पड़ेगी नहीं तो आज का क्या अगले दो दिन का दाना पानी बंद कर दूँगा
07:25हमारी मम्मी के दिये कपड़ों और खाने पीने में मीन वेग निकालती है
07:30तब ही चतुर सिंग कमरे से बाहर आकर कड़कडाते थे वो चलाते है
07:44उस बहेंकर गर्मी में भारी स्वेटर पहने गौरी को निठला और निकम्मा जबर्दस्ती धक्का देकर फिर से उस अंधेरी कोठरी
07:50में डाल देते हैं
07:51गर्मी और भारी कपड़ों के कारण गौरी का चहरा लाल पड़ चुका है
07:55वो बेहोश होने के हालत में फर्ष पर गिर जाती है
07:57तब ही कलो जी के फोन पर गाउं से राजिश्वरी जी का फोन आता है
08:01कलो जी तरंद गौरी को घसीट कर अपने पास लाती है
08:04उसके बाल पीछे से कसकर पकड़ लेती है
08:06हलो हरे हां माची पाए लागू हां सब ठीक ठाक है शहर में
08:12गौरी हां गौरी तो मेरे पास ही बैठिये बड़े लाड प्यार में है
08:18हां कलो बहू ज़ादा हमाजी गौरी से बात तो कजाओ
08:22बज़े दिन होगे उसकी आवाज सुने ठीक से तो है ना मेरी बच्ची
08:28ले बात कर और याद रखना गर एक शब्द भी उल्टा सीधा मूँ से निकाला तो तरी खाल उधेर दूँगी
08:45गौरी बेटा सुनो शहर के बड़े रईस देप्रकाश अगरवाल जी के बेटे आकाश का रिष्टाया है तुम्हारे लिए बहुत बड़ा
08:54खानदार है वो लोग लड़की देखना चाहते हैं इसलिए हम भी कल सुबहा तक शहर आ रहे हैं वहीं बैटकर
08:59बात पक्की करेंगे
09:00गौरी के हाथ से फोन छूट कर सोफिय पर गिर जाता है वो डर और घबरार से थर थर कांपने
09:06लगती है चतो सिंग तुरंथ फोन काट कर आगे आते हैं
09:09अरे बाप रे कल लो ये क्या सुन्दा हूँ मैं अगर मा बाबुजी कल सुबह यहां आ गए और उन्होंने
09:15गौरी का ये हाल देख लिया ये फट्डे पुराने कप्ड़े और चेहरे पर मार के निशान और मच्छरों के चकत
09:20ते तो छोटे भाई के गाउँ वाली सारी जाय
09:39आने हम गाउं की सारी प्रॉपर्टी पहले अपने नाम करवा लेंगे चतुर सिंग जी तुम अभी इसके हुलिया को सुधारने
09:44का बंदोबस करो वाना मारा पूरा खेल बिगड़ जाएगा
09:47कलो जी की बात सुनके निठला और निकम्मा को तिलता से हसने लगते हैं चतुर सिंग अपनी जेव से पैसे
09:53निकालकर निठला को देते हैं
09:55इठला ये पकड़ पैसे अभी इसी वक्त बजार लेकर जा इसे और दो जोड़ी पट्री वाले सस्ते सूट और एक
10:02प्लास्टिक की चपल दिला कर ला इसे और हां रास्ते में मेडिकल स्टोर से वो मच्चनों के चकत्ते और मार
10:07के निशान मिटाने वाली क्रीम ज़रूर ल
10:28लड़के वालों के सामने तुने जरा सा भी रोना धोना किया या दादा दादी को अपनी आप बीती सुनाई तो
10:33विदाई से पहले तेरह वो हाल करूँगी कि यम्राज भी काप उठेगा सीधे जायदात के कागजात पर साइन करेगी तू
10:40समझ गई
10:41हाँ हाँ बड़ी ममी मैं कुछ नहीं बोलूँगी जैसा आप कहोगे मैं वहसा ही करूँगी मुझे मत मारना
10:47अगले ही पल निठला गौरी का हाथ बेरेमी से पकड़कर उसे जटके से घर के बाहर बाजार की तरफ घसीटते
10:52हुए ले जाता है
10:53दुपैर का समय है बजार में भाहन कर भीड़ और शो शराबा है सुरज की तेज धूप चमक रही है
10:58निठला गौरी को खींचते हुए एक कपड़े के ठेल के सामने लाकर खड़ा करता है
11:02गौरी शरम और डरके मारे अपनी फटी होई आस्तीन से चैना चपाने की कोशिश कर रही है
11:08ए भाई इस लड़की के नाब के दो सबसे सस्ते वाले सूट निकाल जो सबसे कम दाम का हो वही
11:14दे
11:14भाई आप पैरों में चाले पड़ गें वो प्लास्टिक वाली चिपल भी दिला दो रास्ता बहुत गरम है
11:20चुप चाप खड़ी रहे हैं बेकाली की तरह मांगना बंद कर जादा मारा नहीं मत बन चुप चाप यह सूट
11:25पगर
11:26सूट हाथ में लेकर निठला आगे बढ़ता है और एक मैडिकल स्टोर के सामने रुखता है
11:30भाई या इस लड़के के हाथ पेर पर जो मच्छरों के कारने के लाल निशान है न इने दो दिन
11:35में गायब करने वाली कोई तगणी क्रीम दे तो जल्ली से
11:40भाई साब यह सिर्फ मच्छरों की निशान नहीं लग रहे हैं कुछ चोट के भी हैं
11:45अरे तो डॉक्टर तू अपने ग्यान अपने पास रख जितनी दबा मांगे होतनी दे जादा पकवास मत कर
11:51दुकानदार सेम कर क्रीम दे देता है निठला वो क्रीम और कपड़े गौरी के हाथ में जोर से मारता है
11:57ले इसे पकट और चल घर घर चलते ही पूरा शरीर पर मल लेना
12:02कल जब अगरवाल खांदान के लोग आएं तो तू एक रईस घर की संसकारी बेटी दिखनी चाहिए
12:06कोई आनात नौकरानी नहीं चल अप घर
12:09निठला गौरी को डराता धमकाता वो वापस अपने घर लाता है
12:13घर के कोने में बैटकर गौरी कामते हाथों से अपने जखमों और मच्छनों के निशानों पर वो क्रीम लगा लेती
12:17है
12:18लेकिन क्या जिस शादी के लिए गौरी को इतना तयार किया जा रहा है
12:21क्या वो शादी गौरी की जिंदगी में नया सवेरा और खुशनुमा राते लेकर आईगी? कॉमेंट में बताईएगा
12:26खेर दो दिन बाद सुबा की ग्यारा बजे हैं
12:29गाउं से दादा दादी आ गए हैं और सोफे पर बैठे हैं
12:32दूसरी तरफ देव प्रकाश जी, उनका बेटा आकाश और गाईत्री जी बैठे हैं
12:35चतुर सिंग और कलो जी हाथ जोड़ कर उनकी खातिरदारी में लगे हैं
12:39गौरी कोने से नई चपपल और ठेल वाला नया सूर पहन कर कामते हाथों से चाई का नाश्टा लेकर हॉल
12:44में आती है
12:45क्रीम लगाने की वज़ा से उसके निशान थोड़े हलके बढ़ चुके हैं
12:49आईए आईए देव प्रकाश्टी धन्य भाग हमारे जो आप जैसे बड़े रई समाय घर आए हमारी गौरी तो साक्षाद गाय
12:56है सुभासर असोई में ही आपके लिए पहकवान बना रही थी
13:02हाँ समधी जी हमारी बच्ची बहुत सुघर है माबाप के जाने के बाद इसकी बड़ी मम्मी ने इसे अपनी सगी
13:09बेटी की तरह पाला कोई कमी नहीं छोड़ी
13:11आपके बाद बिलकुत सच लग रही है राजे शुरी जी लड़की के चैरी पर ही संसकात दिख रहे है
13:17वैसे हमारी बेटे आकाश को लड़की से अकेले में थोड़ी बात करनी थी अगर आप लोगों के इजाज़त हो तो
13:33अकाश और गौरी अकेले बात करने आए है
13:35निठला दर्वाजे के बाहर कड़ा होकर
13:37खिड़की से गौरी को आखे दिखा रहा है
13:41गौरी थर-थर काप रही है
13:45गौरी तुम इतना काप क्यों रही हो
13:47मुसे डरो मैं कोई भूत नहीं हूँ
13:49क्या तुम इस शादी से खुश हो
13:51तुमारी हाँ है ना
13:53अकर मैंने जमीर लड़के को ना कह दिया
13:56तु बड़ी ममी विदाई से पहले मेरी जान ले लेंगी
13:58और अगर हाँ कह दिया तो कम से कम इस नरक जैसे माय के और इन भयानक
14:03तड़पती रातों से हमेशा के लिए पीचा छूट जाएगा
14:06गौरी तुमारे माथे पर ये कैसा निशान है तुम ठीक तो हो न
14:10हाँ हाँ जी मैं ठीक हो पसकल रसुई में चक्कर आ गया था
14:15मेरी तरफ से इस शादी के लिए हाँ है
14:18अकाश उसके साथगी और सैमी ओई आंकों को देखकर मुस्करा देता है
14:21उसके बाद दोनों की शादी पक्की हो जाती है
14:23कुछ समय बाद शहर के एक नॉर्मल मैरेज हाल में
14:26अकाश गौरी के गले में मंगल सूत पहना रहा है
14:28और उसके मांग में सिंदूर भर रहा है
14:30फिर ये खतम होते ही विदाई से ठीक पहले
14:32चतुर सिंग और कल्लो जी गौरी को कोने वाले कमरे में खीच ले जाते हैं
14:36चतुर सिंग की जिब में गाउं की जायदाद के काखजात है
14:51चले कलमोई
14:52बाहर गाड़ी खड़ी है तेरी
14:54चमड़ी जाय पर दमड़ी ना जाय अपने बाप की जायदाद हमारे नाम कर
14:57तब ही तु इस घर की दहलीस पार करेगी
15:10काखजात हाथ में आते ही कल्लो और चतुर सिंग बनावटी तोर पर रोते हुए
15:14गौरी को विदा करते है गौरी बिना रोईकार में बैठती है रात के साड़ी दस बजे है अगरवाल निवास के
15:19बाहर पूरा परिवार खड़ा है
15:21गायतिर जी हाद में कुम-कुम अक्षत और आरती के थाली लिये खड़ी है
15:25दर्वाजे पर तामे का एक सुंदर कलश और कुम-कुम के पानी से भरी थाली रखी है
15:28गौरी लाल जोडे में गुंगर निकाले खड़ी है
15:32नजर ना लगे मेरी प्यारी बहु को
15:34चल बेटा गौरी अपने दाहेने पैर से इस कलश को हलके से गिरा कर घर के अंदर कदम रख
15:44अगर ये कलश मुझसे ठीक से नहीं गिरा तो क्या ये लोग भी मुझे मारेंगे
15:48हरी डरो मत गौरी पैर आगी बढ़ाओ
15:51मार कब से तुम्हारी आरती उतारने के लिए खड़ी है
15:53गौरी कापते हुए पैर से कलश को हलके से ढखेलती है
15:56और कुमकुम की थाली में पैर रखकर जैसे ही सफिद पर्ष पर चलते है
15:59उसके पैरों के सुंदर लाल निशान छप जाते है
16:02गायतरी जी तुरंत आगे बढ़कर उसे गले लगा लेती है
16:05आज से ये घर तुम्हारा हुआ बेटा
16:08राधा लगकर जाओ अपनी भाबी को घर के अंदर ले जाओ
16:12चलो भाबी आपको आपका नया कमरा दिखाते है
16:15राध के साड़ी ग्यारा बजे हैं आकाश के कमरे में एसी चल रहा है
16:18जिससे ठंडी ठंडी हावा आ रही है
16:20बैट पर मखमली गद्य और सुंदर चादर बिछी है
16:22लेकिन गौरी उस आलीशान बैट पर ना बैठ कर
16:24कमरे के सुदूर कोने में
16:26फर्ष पर जमीन पर घुटने मोड कर सिकुड कर बैठी है
16:29उसने डर के मारे ना तो एसी का रिमोट चुआ है
16:31और ना ही लाइट बंद की है
16:33आकाश कमरे में आता है
16:36गौरी अरे तुम यहाँ नीचे फर्ष पर क्यों बैठी हो
16:39और इतनी कर्मी में कमरे का एसी और पंखा क्यों बंद कर रखा है
16:42देखो तुम पूरी पसीने से भीग गई हो
16:44मुझे माफ कर दीजे मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गया
16:47मैं आपके इस कीमती बैठ को घंदा नहीं करना चाहती थी
16:50मुझे बस इस खोड़े में फर्ष परी सो जाने दीजे मैं कोई आवास नहीं करोगी प्लीज मुझे मारना मत
16:55अरे पागल हो क्या गौरी तुम मेरी पतनी हो
16:58इस घर की लक्षमी हो ये बैठ ये कमरा ये सब कुछ तुमारा ही है
17:02तुम्हें याँ फर्ष पर सोने की कोई जरूरत नहीं है
17:04आकाश उसे सारा देकर फर्ष से उठाता है और बड़े प्यार से मखमली बैट पर बिठाता है
17:09उसके बाद आकाश अलमारी खोल कर उसमें सजे सुन्दर कपड़े दिखाते हुए मुस्कुराता है
17:14ये देखो अलमारी इसमें जितने भी नई सूट और सारिया है वो सम ममी ने खास तुम्हारे लिए खरी दे
17:19है
17:19जाओ पहले बात्रूम में जाकर फ्रेश हो जाओ तुम्हें बहुत आरा मिलेगा
17:24गौरी डरते जिरकते हुए आलिशान बात्रूम में जाती है जहां शावर से ठंडा ठंडा पानी गिर रहा है
17:29जब वो कपड़े बदल कर बाहर आती है तो कमरे की ठंडी एसी की हवा उसके चेहरे को छूती है
17:34हरी आगी तो आज तो बहुत जादा गर्मी है ना बाहर अच्छा हुआ तुम्हें कपड़े चेंज कर लिए
17:39चलो आओ यहाँ पर मैंने एसी चला दिया है तुम्हारा आम से सो जाओ
17:43क्या मैं पलंग पर एसी की हवा में मैं यहाँ सोंगी
17:48हाँ गौरी अपसे यह कमरा तुम्हारा भी तो है आओ चलो यहाँ पर सो जाओ
17:55आकाश के कहने पर गौरी बैट पर लेट जाती है और अपने माईकी की तड़पती रातों को याद करते हुए
18:00गौरी अपने सस्वाल में पहली रात बिना किसी खौफ के चैन की नींद सो जाती है
18:04अगली सुबा दस बच चुकी है अचानक घड़ी में अलाम बचता है अलाम की आवास सुनते ही गौरी हरबड़ा कर
18:09उठती है
18:19गौरी जोर जोर से रोने और खुद का सिर पीटने लगती है उसकी चीखे सुनकर गायत्री रादा और लखन दोरते
18:25हुए कमरे में आते हैं
18:26गौरी बैट से उतर कर सास गायती जी के पैर पकड़ लेती और बिलक बिलक कर रोने लगती है
18:31मा जी मुझे माफ कर दो मुझसे बहुत बड़ा पाप हो गया मैं सुबह लेट उठी हूँ मुझे थपड़ मत
18:36मारना मुझे धूप में तप्ती चत पर मत निकालना मेरे बाल मत केशना प्लीज बड़ी बम्मी की तरह मेरी चमणी
18:41मत उधेरना मैं अभी सारा काम कर दूँग
19:00आपके लिए गरम-गरम पोहा और चाय उपर कमरे में ही ला रही हो अरे सुनो भाबी यह आकाश भई
19:06अब बहुत खड़ूस देखते हैं पर है नहीं अगर इनोंने आपको जरा सा भी डराया ना तो मुझे बता ना
19:11मैं और मा मिलकर इनकी क्लास लगा देंगे
19:13अपनी सासु मा की ममता और बुरे परिवार का प्यार देखकर गौरी के आँखों के आँसु थम जाते हैं गौरी
19:19धीरे धीरे शान्त होती है तब ही आकाश कमरे में दाखिल होता है
19:24मा क्या हुआ गौरी रो क्यों रही है तुम्हारी तब्यत तो ठीक है ना गौरी
19:29आकाश जर अपनी पत्नी के हाथ और पीट के निशान देखो ये बच्ची आथ सुभा लेट के आउठी इसके दिल
19:35का खौफ बाहर आ गया
19:36ये हमसे भीक मांग रही है किसे धूप में मत बेजना इसके बाल मत खीचना उस चतुर सिंग और कलो
19:42ने इस बच्ची को जानवर बना का रखा था
19:44क्या ये लोग इतना गिर सकते हैं
19:48हा लेकिन वो बाद में देखेंगे पहले इस बच्ची को देखते हैं बेटा तु नहा ले हलके कपड़े पहन ले
19:53फिर नीचे आजा
19:54जी ठीक है ममी जी
19:56सुबा के साड़े दस बजे हैं सासो मा गायत्री जी रसोई में खड़ी है
20:00गौरी हिच के चाती होई रसोई के दरवाजे पर खड़ी होती है
20:02गायत्री जी के हाथ में गरम गरम पोही की बलेट और चाय का कप है
20:07अरे गौरी आ गई बेटा चल पहले गरम गरम पोहा खा और चाय पी
20:11माजी माईके मैं अगर रात को जरा सी भी देर से सों तो सुबा चार बजे ये बड़ी मम्मी लाथ
20:17मार कर उठा देती थी
20:18कहती थी कि मुप की रोटिया तोड़ती है पहले सारा काम कर
20:21आज पहली बार सुबा की दूब देखकर भी मुझे डर नहीं लग रहा
20:26वो माईके की काली राते थी मेरी बच्ची उन्हें भूल जा अब तू ससुराल की रातों को याद रखना बस
20:32गाईतर जी खुद अपने हाथों से गौरी को पहला निवाला खिलाती है
20:35नाश्टा करने के बाद सासु मा और आकाश उसे लेकर लिविंग रूम में आते हैं
20:39लिविंग रूम में पूरा परिवार बैठा है
20:41फोन पर गाउं से दादा हरी प्रसाद और दादी राजिश्वरी वीडियो कॉल पर है
20:46गौरी हिचके चाते हुए दादा दादी से बात कर रही है
21:16जोला लेकर ताओ जी के घर आई थी तब से लेकर शादी की आकरी रात तक
21:20मुझे कभी चैन की नीन सोने नहीं दिया गया
21:22विदाई की रात को भी बड़ी मम्मी ने मेरा गला दबाने की कोशिश की थी
21:26और जबर्दस्ती अंगुठा लगवालिया था
21:29गौरी रोते हुए उठकर अंदर चली जाती है दादा दादी एकदम शौक डरह जाते है
21:33अरे राजैश्वरी अरे डाल में कुछ काला नहीं पूरी डाल ही काली है
21:39उस चतुर सिंग और कलो ने हम से जूट बोला कि वो गौरी को अपनी बेटी की तरह रखते है
21:45हमें तुरन शहर जाकर सच का पता लगाना होगा
21:49दोस्तों गौरी के माता पिता की मौत के बाद उसके सगे ताउ और ताई ने उसके साथ जो वरताउ किया
21:54क्या समाज में अनात लड़कियों के साथ ऐसा वाकई होता है
21:57क्या अपनों के वेश में छुपे ऐसे कसाईयों को बे नकाब करना जरूरी है
22:01अपनी राई कमेंड में जरूर दें
22:03अब देखे कहानी का सबसे बड़ा मोड
22:05दोपैर के समय है दादा दादी गाउं से सीधे शेहर में चतुर सिंग के घर पहुँचते हैं
22:10ताई कलो और ताउ चतुर सिंग आंगल में बैठे हैं
22:13दादा जी जोर से तरवाजा खर-कटाते हैं
22:17हरे बाबु जी, अम्मा, आप लोग अचानक या शेहर में?
22:30अरे राम जी अम्मा जी आपका दिमाग खराब हो गया है क्या एक तो हमने उस मन्हूस लड़की को इतने
22:37अपने घर में रखा खिलाया पिलाया और अब आप हमी पर ऐसे घटिया इल्जाम लगा रही है वो लड़की नमबर
22:43एक की जूटी है
22:50अरे अम्मा जी ये कल्लो सर असर जूट बोल रही है हमने अपनी आखों से देखा है जेट के तपते
22:55महीनों की रातो या कड़कडाती ठंड की रात ये कल्लो गौरी को घर से बाहर निकाल देती थी वो बच्ची
23:01आँठ में तक या लेकर बाहर खड़ी रोती रहती थी अंदर �
23:04ये लोग ऐसी मिस होते थे मच्चर उसे काट देते पर इने तरस नहीं आता था इन लोगों ने उस
23:09बच्ची को जानवर से बत्तर बना कर रखा था परलोसन की बास सुनते ही दादा हरी परसात का खून खौल
23:14उठता है उनका गुसा साथ में आस्मान पर पहुंच जाता है अ
23:33और सारी प्रपटी गौरी के नाम की थी और उसे ही की रहेगी दादे जी तुरंट जेव से फोन निकालते
23:39हैं और गौरी के ससो देव परकाश जी को फोन लगाते हैं
23:42देव परकाश जी मैं गौरी का गौनेगाज दादा बोल रहा हूँ हमसे बहुत बड़ी भूल हो गई हमारी फूल सी
23:51बच्ची को इन बेडियों ने जीते जी नरक की आग में जोग रखा था उसकी हर राद आसूओं में बीती
23:59है अब सब आपके हाथ में देव परकाश जी म
24:11हर रात दर्दनाग थी तो अगरवाल परिवार का वादा है कि ससुराल के उसकी हर रात हम खुशियों से सराबोर
24:16कर देंगे गौरी के ससुर जी ने जो वादा किया था उसे अगरवाल परिवार के हर सदसिन निभाया माईके की
24:23वो डरावनी राते अब बीच चुकी थी और स
24:25सब्सक्राइब के हर रात गौरी के लिए सुख की मिसाल बन रही थी
24:28रात के 11 बज रहे हैं पूरा परिवार गौरी को लेकर लॉंग ड्राइब पर जा रहा है गारी में बैठे
24:33हुए
24:34गौरी ज़रा गारी का इसी कम करूं क्या काफी ठंडी हवा आ रही है
24:38नहीं आकाश रहने दीजे माईके में गर्मियों की रात को ताई जी मुझे घर से बाहर निकाल देती थी और
24:44मैं मच्छरों के बीच तडपती थी
24:46आज गाडी की इस ठंडी हवा में आपके साथ बैठ कर लग रहा है जैसे मैं कोई सपना देख रही
24:50हूँ
24:51सपना नहीं हकीकत है बेटा चलो आज सम्मिल कर रात की थंडी हवा में केसर पिस्ता आइस्क्रीम खाएंगे
24:56और भाई आइस्क्रीम खाते खाते कल रात का प्लान भी तो फाइनल कर लो कल शहर में वो बहुत बड़ा
25:02वी आईपी म्यूजिक कॉंसर्ट है ना
25:22और अगली ही रात आकाश अपना वादा पूरा करता है शहर के सबसे बड़े और शानदार वी आईपी म्यूजियम कॉंसर्ट
25:28के ठीक सामने
25:28जहां रंग बिरंगी रोशनिया जगमंगा रही थी वहां आकाश और गौरी फ्रंट रो में बैठे थे
25:33गौरी देखो सामने स्टेज की तरफ तुम्हारा फेवरेट सिंगर लाइब परफॉर्म कर रहा है कैसा लग रहा है तुम्हें
25:50और मेरे साथ तुम्हारी हर रात का मतलब होगा रोशनी, सुकून और ये खुबसूरत मुस्कान जो बीद गया है उसे
25:57उस अंधेरे में ही छोड़ दो गौरी
25:59सची आकाश, आपके साथ इस उजाले में आकर ऐसा लग रहा है जैसे मुझे मेरी कोई हुई जिंदकी फापस मिल
26:05गई है, थांक्यू सो मच
26:07गौरी की सस्राल में राते हंसी खुशी गुजर रही थी, कुछ दिनों बाद गौरी अपने सस्राल वालों के साथ पास
26:12के एक बड़े मंदिर में दर्शन करने गई है
26:14परिवार के सभी लोग पन्डिजी से बात कर रहे हैं और गौरी हाथ में पूजा के थाली लिए वीरान में
26:19बने एक पेड के पास खड़ी है
26:21तब ही अचानक ताउ चतुर सिंग और उसके दोनों निकम्मे बेटे निठला और निकम्मा उसे घेर लेते हैं
26:26चतुर सिंग के हाथ में जायदाद के नई कागजात है
26:28बहुत उड़ रही है ना तू? तेरे दादा दादी ने हमारे घर आकर तमाशा किया
26:34चलचुप चाप इस नई पेपर पस साइन कर नहीं तो आज तुछे जिन्दा नहीं चोड़ेंगे
26:38नहीं दाओ जी मैं साइन नहीं करूँगी वो बाबा की आखरी निशानी है
26:43और इस साइन कैसे नहीं करीगी? आज तेरी ये सस्राल वाली हेकड़ी यहीं निकाल दूगा
26:47गौरी का गला दबते ही उसकी पूजा की थाली हाथ से छूट कर गिरती है
26:51गौरी तडबने लगते है तबी
26:54निकम्मे निठले जैसे नाम है वैसे ही करम, कमीनो, तुम्हारा ही हिम्मत की सरया मेरी पद्नी पर हाथ उठाओ
27:01अरेस कर लो इन तीनों कसाईयों को
27:02दबरदस्ती साइन करवाना घरेल उहिंसा और जान से मालने की कोईशिश
27:05अब अलाद में चक्की फिसेंगे अब ये तीनों
27:07पुलिस ताई ताओ और दोनों बेटों को घसीरते हुए जीप में डालती है
27:11गाउं की और शेहर की पूरी प्रापर्टी कानूनी तोर पर गौरी के नाम सरक्षित हो जाती है
27:16कुछ दिनों बाद आकाश गौरी को हनीमून के लिए पहाड़ों की खुबसूरत बादियों में ले गया
27:20जहां एक शांत बहती नदी के किनारे आलिशान लक्शुरी टेंट लगा हुआ था
27:48अनिमून से लोटने के बाद गर्मियों की एक रात को पूरा अगर्वाल परिवार घर की बड़ी सी खुली बालकनी में
27:53एक ठा हुआ
27:54जहां ठंडी हवा देने वाला एक बड़ा कूलर लगा था
27:58भाबी भाबी देखो मैं कैसे दिख रहा हूँ एक दम मैंगो भूद ना
28:01लखन तुम कभी नहीं सुधरोगे बहुत मजा क्या हो तुम
28:04लखन परेशार मत कर अपनी भाबी को
28:07आकाश बेटा फ्रिज से वो गाढ़ा ठंडा ठंडा मैंगो शेक और हर बूजे के टुकरे निकालना
28:12गौरी बेटा अब तो तुम्हें इस घर में माईके जैसी घुटन नहीं लगती ना
28:17बलकुल नहीं पापा जी माईके की वो बयानक राते अब एक बुरा सपना लगती
28:21इस परिवार ने मुझे जो प्यार दिया उसके बाद मेरी हर रात खुशनुमा हो गई है
28:26रात के दो बजे कमरे में एसी के मखमली ठंड़ थी
28:29गौरी किंग साइस बैट के मखमली गदे पर बिना किसी खौफ और बिना किसी आसु के सुकून की गहरी नींद
28:35सो रही थी
28:36आकाश सोती ओई गौरी को देखकर मुस्कुराता है
28:38सो जाओ सुकून से गौरी अब तुम्हें अपनी जिंदगी की किसी भी रात में कभी रोना नहीं पड़ेगा
28:44यह आकाश का वादा है
28:46दोस्तो क्या आपको लगता है कि गौरी के ताई ताउ जैसे लाल्ची और क्रूर लोगों को पुलिस के हवाले करके
28:51ताउ उम्र जैल की सलाखों के पीछे सरने के लिए छोड़ देना चाहिए
28:55अपनी राय कमेड में जरूर दें
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