00:21Nair Dhu Ghazal
00:25ये खेले जिन्दगी ये खेले जिन्दगी भी अजब दासता हूँ
00:48हर मोड पर खोशी थी मगर बेन शाँ हुई
00:59जिन को समझ रहे थे सहारे सफ़र के हम
01:09वो ही हवा के साथ कहीं राईगा हुई
01:18एक शाखस दिल में आया दुआ बनके एक दिन
01:28फिर उसकी याद उम्र बिभैर उम्तहा हुई
01:40हम चप रहे तो दर्द में आवाज बनके खुद
01:53आनखों की खामशी में कई कहकशा हुई
02:01दिन धल गया तो सूच के सहरा में क्यो गए
02:31क्यों हर खुशी हमारे ले ये आरजी हुई
02:40जो खुब रात बहर हमें जीने का दे गए
02:52सुब हाई तो उनकी भी मिट्टी उड़ा हुई
03:04अब खुद से रोज मिलने का होसला नहीं
03:14ये जिन्दगी भी जिसे कोई दासता
03:23जिन्दगी भी जिसे कोई नहीं खुद से लोजड़ा हुई
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