00:01कोई बईयत आई, पैसों का कोई बंदुबस हुआ, बोलना मुरीद, क्या होगा, कहां से आएंगे पैसे?
00:19दुआ कर, किसी के घर मौत हो जगे, अब यही दुआ ना हने हुगे,
00:30किसी के घर मौत होगी, तो हमारे घर में खुशी होगी।
00:35पर मुरीद, मेरी दुआ मांगने से, अगर कोई मर गया तो उसकी मौत की सिमेदार तो मैं होगी ना?
00:43खलत सोच रही है तू, तो किसी की मौत की दुआ थोड़ी कर रही है, तो तो तुमने घर के
00:51लिए रोजी रोटी मांग रही है।
01:03तो क्या कह रहा है, मुरीद?
01:06जो हकीकत है, वो ही बता रहा हूं तुझे हाज्रा मैं।
01:10रोजी मांगने से गुना नहीं मिलता है।
01:13नहीं मिलता गुना रोजी मांगने से!
01:19जो हुआ है
01:46कर दो कर दो
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